वाराणसी। मानसून के आगमन से पहले शहर को जलभराव की समस्या से बचाने के लिए नगर निगम ने नाला सफाई अभियान को अंतिम चरण में पहुंचा दिया है। नगर निगम के अनुसार शहर के कुल 386 छोटे-बड़े नालों में से 364 नालों की सिल्ट सफाई (गाद निकासी) का कार्य पूरा कर लिया गया है। अब शेष बचे नालों की सफाई अगले तीन दिनों के भीतर पूरी करने के लिए नगर आयुक्त हिमांशु नागपाल ने संबंधित अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया है कि मानसून शुरू होने से पहले सभी नालों की सफाई हर हाल में पूरी होनी चाहिए, ताकि बारिश के दौरान जल निकासी व्यवस्था प्रभावित न हो और लोगों को जलभराव की समस्या का सामना न करना पड़े।

नगर निगम का कहना है कि इस वर्ष नालों की सफाई पर विशेष ध्यान दिया गया है। जिन स्थानों पर वर्षों से जलभराव की शिकायतें मिलती रही हैं, वहां अतिरिक्त निगरानी रखी जा रही है। अधिकारियों का दावा है कि समय से सफाई कार्य पूरा होने पर इस बार शहर में बारिश के दौरान पानी का निकास पहले की तुलना में बेहतर रहेगा।15 जून से बढ़ाकर 30 जून तक किया गया अभियान

नगर निगम ने पहले नाला सफाई अभियान को 15 जून तक पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया था। हालांकि कुछ स्थानों पर कार्य अधूरा रहने और बड़े नालों की सफाई में अधिक समय लगने के कारण अभियान की समय-सीमा बढ़ाकर 30 जून कर दी गई। अब विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि किसी भी स्थिति में निर्धारित समय के भीतर सभी लंबित कार्य पूरे किए जाएं।

नगर आयुक्त हिमांशु नागपाल ने समीक्षा बैठक के दौरान अधिकारियों से प्रत्येक नाले की प्रगति रिपोर्ट भी मांगी है। उन्होंने कहा कि सफाई कार्य केवल कागजों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि इसका असर जमीनी स्तर पर भी दिखाई देना चाहिए।

नगर आयुक्त हिमांशु नागपाल

नगर निगम ने नालों की सफाई का कार्य दो विभागों के बीच बांट रखा है। स्वास्थ्य विभाग शहर के 258 छोटे एवं मध्यम आकार के नालों की सफाई करा रहा है, जबकि सामान्य अभियंत्रण (इंजीनियरिंग) विभाग 128 बड़े नालों की जिम्मेदारी संभाल रहा है।

स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार उनके अधीन आने वाले अधिकांश नालों की तली तक सफाई कर दी गई है। करीब 250 नालों से गाद निकालकर जल निकासी का रास्ता साफ किया जा चुका है। विभाग का दावा है कि लगभग 97 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है और शेष कार्य भी जल्द समाप्त कर लिया जाएगा।

नगर निगम के अनुसार ककरमत्ता, भेलूपुर, पांडेयपुर, आदमपुर, सिगरा, नारायणपुर, नेवादा, भगवानपुर, लेढ़पुर, अलईपुरा, लोहता, लहरतारा, सारनाथ, नदेसर, जेतपुरा, कंदवा, सुसवाही, हुकुलगंज समेत शहर के कई प्रमुख क्षेत्रों में नालों की सफाई पूरी कर ली गई है। इन स्थानों पर केवल गाद निकालने का कार्य ही नहीं किया गया, बल्कि नालों की तली की भी सफाई कराई गई है, ताकि बारिश के समय पानी का प्रवाह बाधित न हो।

मानसून के दौरान अक्सर खुले मैनहोल दुर्घटनाओं का कारण बनते हैं। इसे देखते हुए नगर आयुक्त ने लोक निर्माण विभाग, जलकल विभाग, नगर निगम के मुख्य अभियंताओं तथा नगर स्वास्थ्य अधिकारी को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि किसी भी सड़क या गली में खुला अथवा क्षतिग्रस्त मैनहोल नहीं रहना चाहिए।

उन्होंने कहा कि यदि बारिश के दौरान किसी खुले मैनहोल या क्षतिग्रस्त गली पिट के कारण कोई दुर्घटना होती है तो संबंधित अधिकारी एवं कर्मचारी के खिलाफ जिम्मेदारी तय करते हुए कड़ी कार्रवाई की जाएगी। इसके लिए सभी विभागों को संयुक्त रूप से निरीक्षण करने के निर्देश दिए गए हैं।

नगर निगम ने ऐसे स्थानों की सूची भी तैयार की है जहां हर वर्ष बारिश के दौरान जलभराव की समस्या सामने आती है। इन क्षेत्रों में विशेष निगरानी रखने, अतिरिक्त पंपिंग मशीनें लगाने तथा आपात स्थिति में तुरंत जल निकासी सुनिश्चित करने की तैयारी की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि मानसून के दौरान भी नालों की नियमित निगरानी जारी रहेगी ताकि कहीं भी कचरा या सिल्ट जमा होने पर तत्काल सफाई कराई जा सके।

नगर निगम ने शहरवासियों से भी सहयोग की अपील की है। अधिकारियों ने कहा कि कई बार लोग नालों में प्लास्टिक, घरेलू कचरा और निर्माण सामग्री फेंक देते हैं, जिससे पानी का प्रवाह रुक जाता है और जलभराव की समस्या बढ़ जाती है। यदि नागरिक इस आदत से बचें और नालों को साफ रखने में सहयोग करें तो शहर को जलभराव से काफी हद तक बचाया जा सकता है।

नगर निगम का मानना है कि प्रशासनिक तैयारियों के साथ-साथ जनसहभागिता भी उतनी ही जरूरी है। यदि दोनों स्तरों पर जिम्मेदारी निभाई जाए तो इस मानसून में वाराणसी के लोगों को जलभराव की परेशानी से काफी राहत मिल सकती है।

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