हिन्दू जनजागृति समिति ने अधिकारियों को सौंपा ज्ञापन, प्लास्टिक के राष्ट्रध्वजों की बिक्री और इस्तेमाल पर रोक की मांग

वाराणसी। 15 अगस्त (स्वतंत्रता दिवस) से पहले राष्ट्रध्वज के सम्मान और उसके अपमान को रोकने को लेकर हिन्दू जनजागृति समिति ने वाराणसी प्रशासन से सख्त कार्रवाई की मांग की है। समिति की ओर से अपर जिलाधिकारी प्रशासन वाराणसी पंकज कुमार, उप जिलाधिकारी पिंडरा कुंदन राज कपूर और सहायक पुलिस आयुक्त प्रशांत सिंह को ज्ञापन सौंपा गया। समिति ने ‘प्लास्टिक बंदी’ कानून के साथ ही राष्ट्रध्वज से जुड़े नियमों का प्रभावी ढंग से पालन कराने की मांग की।

स्वतंत्रता दिवस के बाद सड़कों और कूड़ेदानों में मिलते हैं राष्ट्रध्वज

समिति का कहना है कि 15 अगस्त को देशभर में लोग पूरे सम्मान और गर्व के साथ राष्ट्रध्वज फहराते हैं। हालांकि, स्वतंत्रता दिवस का कार्यक्रम समाप्त होने के बाद बड़ी संख्या में राष्ट्रध्वज सड़कों, कूड़ेदानों और नालियों में पड़े दिखाई देते हैं। कई बार ये झंडे फटे और क्षतिग्रस्त अवस्था में मिलते हैं। समिति के अनुसार प्लास्टिक से बने राष्ट्रध्वज जैविक रूप से आसानी से नष्ट नहीं होते, जिसके कारण लंबे समय तक इनके पड़े रहने से राष्ट्रध्वज के सम्मान को ठेस पहुंचती है।

समिति ने यह भी कहा कि टी-शर्ट, मास्क और अन्य परिधानों पर राष्ट्रध्वज के चित्र या स्वरूप का इस्तेमाल भी कई बार देखने को मिलता है। ऐसे मामलों में लोगों को राष्ट्रध्वज के सम्मान और उससे जुड़े नियमों के प्रति जागरूक किए जाने की जरूरत है।

प्रशासन से कानूनों का कड़ाई से पालन कराने की मांग

ज्ञापन के माध्यम से समिति ने प्रशासन से राष्ट्रध्वज के सम्मान से संबंधित कानूनों और नियमों को प्रभावी रूप से लागू करने की मांग की। समिति ने भारतीय ध्वज संहिता 2002, प्रतीक और नाम (अनुचित प्रयोग निवारण) अधिनियम 1950 तथा राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम 1971 के प्रावधानों का उल्लेख किया।

समिति का कहना है कि देश में सिंगल यूज प्लास्टिक के खिलाफ लागू प्रतिबंधों के मद्देनजर प्लास्टिक के राष्ट्रध्वजों के उत्पादन और बिक्री पर भी प्रभावी निगरानी जरूरी है। स्वतंत्रता दिवस और अन्य राष्ट्रीय पर्वों के दौरान प्रशासन को बाजारों में प्लास्टिक के झंडों की बिक्री रोकने के लिए विशेष अभियान चलाना चाहिए।

मुंबई हाईकोर्ट के निर्देशों का दिया हवाला

हिन्दू जनजागृति समिति ने बताया कि प्लास्टिक के राष्ट्रध्वजों से होने वाले अपमान को रोकने के लिए उसने मुंबई उच्च न्यायालय में जनहित याचिका संख्या 103/2011 दायर की थी। समिति के अनुसार मामले की सुनवाई के दौरान न्यायालय ने सरकार को प्लास्टिक के राष्ट्रध्वजों के इस्तेमाल से होने वाले अपमान को रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए थे।

समिति ने कहा कि इसके बाद केंद्र और राज्य स्तर पर गृह तथा शिक्षा विभागों की ओर से इस संबंध में परिपत्र भी जारी किए गए। समिति ने प्रशासन से इन निर्देशों और संबंधित कानूनों का जमीनी स्तर पर प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करने की मांग की।

राष्ट्रध्वज का सम्मान के लिये ज्ञापन

जागरूकता अभियान चलाने का दावा

समिति ने बताया कि वह पिछले दो दशकों से अधिक समय से ‘राष्ट्रध्वज का सम्मान रखें’ अभियान चला रही है। इसके तहत विद्यार्थियों के बीच जागरूकता कार्यक्रम और प्रश्नमंजूषा आयोजित की जाती है। इसके अलावा लोगों के बीच हस्तपत्रक बांटने, भित्तिपत्रक लगाने तथा स्थानीय केबल चैनल और सोशल मीडिया के माध्यम से राष्ट्रध्वज के सम्मान को लेकर जागरूकता फैलाने का काम किया जाता है।

समिति के अनुसार सड़कों पर गिरे या लावारिस हालत में मिले राष्ट्रध्वजों को एकत्र कर उनका सम्मानपूर्वक निस्तारण करने का कार्य भी अभियान के तहत किया जाता है।

ज्ञापन देने के दौरान मौजूद रहे कई लोग

ज्ञापन सौंपने के दौरान ज्ञानवापी मामले के मुख्य याचिकाकर्ता डॉ. सोहनलाल आर्य, अधिवक्ता दीपक सिंह, संजीवन यादव, अरुण कुमार मौर्य, ज्ञान प्रकाश राय, आनंद कुमार राय, अवनीश कुमार तिवारी, संजय सिंह, प्रमोद गुप्ता, उमेश कुमार सिंह, श्याम शंकर सिंह, संतोष सिंह, अतुल सिंह, बृजेश मिश्रा, त्रिशांत सिंह, रविंद्र कुमार पटेल, आदर्श पटेल और प्रमेश विश्वकर्मा सहित अन्य लोग मौजूद रहे।

समिति ने प्रशासन से अपील की कि स्वतंत्रता दिवस से पहले प्लास्टिक के राष्ट्रध्वजों की बिक्री और इस्तेमाल पर निगरानी बढ़ाई जाए तथा लोगों को राष्ट्रध्वज के उचित सम्मान और उसके इस्तेमाल से जुड़े नियमों के प्रति जागरूक किया जाए।

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