ट्रॉमा सेंटर में अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के आरोप, निष्पक्ष जांच की उठी मांग
वाराणसी। काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के ट्रॉमा सेंटर को लेकर एक बार फिर विवाद गहरा गया है। विश्वविद्यालय की कार्यकारी परिषद (EC) के सदस्य एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री महेन्द्रनाथ पांडे को छात्रों के एक प्रतिनिधिमंडल ने ट्रॉमा सेंटर प्रभारी डॉ. सौरभ सिंह को पद से हटाने की मांग को लेकर ज्ञापन सौंपा।
छात्रों ने ट्रॉमा सेंटर में लंबे समय से अनियमितताओं, भ्रष्टाचार और प्रशासनिक अव्यवस्थाओं के गंभीर आरोप लगाते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की। प्रतिनिधिमंडल का कहना था कि अस्पताल की कार्यप्रणाली लगातार प्रभावित हो रही है, जिससे मरीजों और उनके परिजनों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
छात्रों द्वारा सौंपे गए ज्ञापन में आरोप लगाया गया कि ट्रॉमा सेंटर में बाहरी हस्तक्षेप और प्रशासनिक दबाव के कारण कई महत्वपूर्ण निर्णय प्रभावित हो रहे हैं। छात्रों ने कहा कि चिकित्सा व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए आरोपों की स्वतंत्र जांच आवश्यक है। साथ ही जांच पूरी होने तक डॉ. सौरभ सिंह को तत्काल प्रभाव से पदमुक्त किए जाने की मांग की गई।
इस दौरान महेन्द्रनाथ पांडे ने छात्रों की बातों को गंभीरता से सुना और आश्वासन दिया कि इस मुद्दे को कार्यकारी परिषद की बैठक में प्रमुखता से उठाया जाएगा। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय की गरिमा और चिकित्सा सेवाओं की गुणवत्ता बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता है तथा संबंधित अधिकारियों से चर्चा कर उचित कार्रवाई सुनिश्चित करने का प्रयास किया जाएगा।
छात्र नेता शिवांश सिंह ने कहा कि जिन अधिकारियों पर भ्रष्टाचार और आपराधिक मामलों के आरोप लगे हों, उन्हें महत्वपूर्ण प्रशासनिक पदों पर बने रहने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन को छात्रों और मरीजों के हितों को ध्यान में रखते हुए पारदर्शी और जवाबदेह व्यवस्था लागू करनी चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा कि काशी हिन्दू विश्वविद्यालय देश की प्रतिष्ठित शिक्षण एवं चिकित्सा संस्थाओं में शामिल है और यहां किसी भी प्रकार की अनियमितता या बाहरी हस्तक्षेप स्वीकार नहीं किया जा सकता। छात्रों ने चेतावनी दी कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो व्यापक आंदोलन शुरू किया जाएगा।
ज्ञापन सौंपने के दौरान बड़ी संख्या में छात्र मौजूद रहे। पूरे घटनाक्रम के बाद विश्वविद्यालय परिसर में इस मुद्दे को लेकर चर्चाओं का दौर तेज हो गया है और अब सभी की नजर विश्वविद्यालय प्रशासन की आगामी कार्रवाई पर टिकी हुई है।
