वाराणसी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी को जल्द ही एक और बड़ी आधारभूत परियोजना की सौगात मिलने जा रही है। आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (सीसीईए) ने ₹10,998.32 करोड़ की लागत से बनने वाले 43.218 किलोमीटर लंबे वरुणा एलिवेटेड कॉरिडोर को मंजूरी दे दी है। इस परियोजना का उद्देश्य शहर की यातायात व्यवस्था को आधुनिक बनाना, जाम की समस्या कम करना और एयरपोर्ट तक आवागमन को तेज़ एवं सुगम बनाना है।
यह एलिवेटेड कॉरिडोर वाराणसी के सबसे व्यस्त इलाकों—छावनी, वाराणसी जंक्शन, फुलवरिया और चौकाघाट—को बेहतर कनेक्टिविटी प्रदान करेगा। वर्तमान में इन क्षेत्रों में संकरी सड़कों, भारी वाहनों, ई-रिक्शा और स्थानीय यातायात के कारण रोजाना लंबा जाम लगता है। नई परियोजना से इन समस्याओं में काफी हद तक राहत मिलने की उम्मीद है।
दो चरणों में बनेगा कॉरिडोर
परियोजना को दो पैकेज में विकसित किया जाएगा। पहले पैकेज के तहत एनएच-31 से फुलवरिया जंक्शन तक 28.498 किलोमीटर लंबा मार्ग बनाया जाएगा। इसमें 11.744 किलोमीटर का छह लेन मुख्य एलिवेटेड कैरिजवे और 16.754 किलोमीटर के फ्लाईओवर, रैंप, लूप एवं सर्विस रोड शामिल होंगे।
दूसरे पैकेज में फुलवरिया जंक्शन से काशी रेलवे स्टेशन तक 14.720 किलोमीटर लंबा मार्ग विकसित किया जाएगा। इसमें 7.676 किलोमीटर का चार एवं छह लेन मुख्य मार्ग तथा 7.044 किलोमीटर लंबे रैंप बनाए जाएंगे। परियोजना में ग्रीनफील्ड और ब्राउनफील्ड दोनों प्रकार के एलाइनमेंट का उपयोग किया जाएगा।
परियोजना के पूरा होने के बाद वाराणसी रेलवे स्टेशन से लाल बहादुर शास्त्री अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे तक पहुंचने का समय करीब 60 मिनट से घटकर मात्र 20 मिनट रह जाएगा। इससे यात्रियों, व्यापारियों और देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों को बड़ी सुविधा मिलेगी।
कॉरिडोर को इस तरह डिजाइन किया गया है कि सम्पूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय, चौकाघाट, फुलवरिया, छावनी और वाराणसी जंक्शन जैसे अत्यधिक व्यस्त क्षेत्रों में यातायात का दबाव कम हो सके। इसके लिए कई स्थानों पर विशेष लूप और रैंप बनाए जाएंगे, जिससे स्थानीय और बाहरी वाहनों का आवागमन अलग-अलग हो सकेगा।
2044 की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार योजना
सरकार ने इस परियोजना को भविष्य की यातायात आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए तैयार किया है। अनुमान है कि वर्ष 2044 तक इस मार्ग पर प्रतिदिन लगभग 59 हजार पीसीयू (Passenger Car Unit) का यातायात होगा। इसी को देखते हुए कॉरिडोर को चार से छह लेन क्षमता के साथ विकसित किया जा रहा है।
वरुणा एलिवेटेड कॉरिडोर के निर्माण से वाराणसी की शहरी परिवहन व्यवस्था को नई गति मिलेगी। साथ ही पूर्वांचल के विभिन्न जिलों से आने-जाने वाले लोगों को भी तेज, सुरक्षित और जाम मुक्त सफर का लाभ मिलेगा।
