प्राकट्य महामहोत्सव

करपात्री जी और शंकराचार्य जी का प्राकट्य महामहोत्सव: काशी से देशभर में गूंजा सनातन का संदेश

वाराणसी। श्रावण शुक्ल द्वितीया, शुक्रवार 14 अगस्त 2026 को धर्मसम्राट स्वामी करपात्री जी महाराज एवं परमधर्माधीश धर्मावतार ज्योतिष्पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामिश्री अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती जी महाराज का 57वां प्राकट्य महामहोत्सव श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया गया। काशी के शंकराचार्य घाट स्थित श्रीविद्यामठ में इस अवसर पर दिनभर धार्मिक अनुष्ठान, पूजन-अर्चन, भजन-कीर्तन और महाभंडारे का आयोजन हुआ। कार्यक्रम में संतों, दंडी संन्यासियों, वैदिक आचार्यों, बटुक विद्यार्थियों और बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने सहभागिता की।

वैदिक मंत्रोच्चार के साथ हुआ रुद्राभिषेक

महामहोत्सव का शुभारंभ श्रीविद्यामठ में वैदिक आचार्यों द्वारा विधि-विधान से रुद्राभिषेक के साथ किया गया। आचार्यों ने भगवान शिव का अभिषेक करते हुए ज्योतिष्पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य जी महाराज के स्वस्थ, दीर्घायु और मंगलमय जीवन की कामना की।

इसके बाद श्रीविद्यामठ के प्रभारी ब्रह्मचारी परमात्मानंद जी के नेतृत्व में श्रद्धालुओं ने धर्मसम्राट करपात्री जी महाराज और शंकराचार्य जी महाराज के चित्र पर माल्यार्पण कर पुष्प अर्पित किए। शंकराचार्य जी महाराज की चरण पादुकाओं का भी विधिवत पूजन किया गया।

सैकड़ों दंडी संन्यासियों के लिए हुआ भंडारा

प्राकट्य महामहोत्सव के दौरान श्रीविद्यामठ में सैकड़ों दंडी संन्यासियों के लिए भंडारे का आयोजन किया गया। इसके साथ ही दिनभर चले महाभंडारे में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया।

 57 वा प्राकट्य महामहोत्सव

महामहोत्सव के दौरान मातृशक्ति ने भजन-कीर्तन और सोहर का गायन किया, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया। महिलाओं ने हर्षोल्लास के साथ नृत्य कर अपनी श्रद्धा और आस्था व्यक्त की।

सलधा में शंकराचार्य जी ने दिया आशीर्वचन

शंकराचार्य जी महाराज के मीडिया प्रभारी संजय पाण्डेय ने बताया कि वर्तमान समय में छत्तीसगढ़ के बेमेतरा जिले स्थित सपाद लक्षेश्वर धाम सलधा में शंकराचार्य जी महाराज का चातुर्मास्य व्रत अनुष्ठान चल रहा है। प्राकट्य दिवस के अवसर पर देश के अलग-अलग हिस्सों से पहुंचे श्रद्धालुओं ने वहीं 57वां अवतरण दिवस श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया।

इस अवसर पर भक्तों ने 57 अलग-अलग वस्तुओं से शंकराचार्य जी महाराज का अर्चन किया। इसके अलावा फल, अनाज, मिष्ठान, रबड़ी और सूखे मेवों से तुलादान भी किया गया। शंकराचार्य जी महाराज ने परंपरागत पूजन संपन्न किया और वहां मौजूद श्रद्धालुओं को आशीर्वचन प्रदान किया।

ज्योतिर्मठ बद्रिकाश्रम में भी हुए धार्मिक आयोजन

प्राकट्य महामहोत्सव के अवसर पर ज्योतिर्मठ बद्रिकाश्रम में भी विभिन्न धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए गए। ज्योतिर्मठ के प्रभारी स्वामी प्रत्यक्चैतन्य मुकुंदानंद गिरी जी महाराज के सान्निध्य में धार्मिक अनुष्ठान संपन्न हुए। इस दौरान शंकराचार्य जी महाराज के स्वस्थ और दीर्घायु जीवन की कामना की गई।

काशीप्राकट्य महामहोत्सव

देशभर के धार्मिक केंद्रों में हुए आयोजन

शंकराचार्य जी महाराज के प्राकट्य दिवस के अवसर पर द्वादश ज्योतिर्लिंगों, चारों धामों, सप्तपुरियों सहित देश के विभिन्न धार्मिक और आध्यात्मिक केंद्रों पर भी धार्मिक अनुष्ठान आयोजित किए गए। संतों और श्रद्धालुओं ने शंकराचार्य जी महाराज के दीर्घायु जीवन की कामना की।

आयोजकों के अनुसार, शंकराचार्य जी महाराज ने राम मंदिर से जुड़े लंबे समय से चले आ रहे धार्मिक एवं कानूनी संघर्ष, रामसेतु की रक्षा, गंगा को राष्ट्रीय नदी का दर्जा दिलाने की मांग तथा काशी के मंदिरों और सनातन परंपराओं के संरक्षण जैसे विषयों पर सक्रिय भूमिका निभाई है। वर्तमान समय में गौमाता की रक्षा के लिए चलाए जा रहे राष्ट्रव्यापी आंदोलन को भी सनातन धर्म और गोवंश संरक्षण से जुड़े महत्वपूर्ण अभियान के रूप में बताया गया।

संतों और श्रद्धालुओं ने की मंगलकामना

महामहोत्सव में दंडी संन्यासियों, वैदिक आचार्यों और बटुक विद्यार्थियों के साथ बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। इस दौरान जयंतु जय शास्त्री, हजारी कीर्ति शुक्ला, हजारी सौरभ शुक्ला, विमलेश तिवारी, रमेश पाण्डेय, लता पाण्डेय, सावित्री पाण्डेय, चांदनी चौबे, माधुरी पाण्डेय, नीलम दुबे सहित हजारों श्रद्धालुओं की उपस्थिति रही।

प्राकट्य महामहोत्सव

मपूरे दिन चले धार्मिक आयोजनों से श्रीविद्यामठ सहित काशी का वातावरण भक्तिमय बना रहा। श्रद्धालुओं ने धर्मसम्राट करपात्री जी महाराज की सनातन परंपरा को स्मरण करते हुए ज्योतिष्पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामिश्री अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती जी महाराज के स्वस्थ, दीर्घायु और मंगलमय जीवन की कामना की। श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाए गए इस प्राकट्य महामहोत्सव में काशी से लेकर देश के विभिन्न धार्मिक केंद्रों तक सनातन परंपरा और आध्यात्मिक संदेश की गूंज दिखाई दी।

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