वाराणसी। शहर के विशोखर-लठिया बाईपास हाईवे के किनारे स्थित एक कबाड़ परिसर को लेकर स्थानीय लोगों ने गंभीर दावे खड़े किए हैं। क्षेत्रवासियों का आरोप है कि यहां कबाड़ के कारोबार की आड़ में बड़े पैमाने पर दोपहिया वाहनों की कटाई किया जा रही है। लोगों का कहना है कि यह गतिविधि काफी लंबे समय से चलती आ रही है, लेकिन संबंधित विभागों की ओर से अब तक कोई ठोस जांच या कार्रवाई तक नहीं की गई है। इस कारण स्थानीय लोगों में असंतोष के साथ-साथ कई तरह की आशंकाएं भी बनी हुई हैं।
स्थानीय निवासियों के अनुसार, प्रतिदिन तीन से चार दोपहिया वाहनों को उक्त परिसर में लाया जाता है और कुछ ही समय बाद उन्हें काट दिया जाता है। लोगों ने आरोपी लगाते हुए कहा ई कि कई बार ऐसे वाहन भी परिसर में पहुंचते दिखाई देते हैं जो देखने में पूरी तरह ठीक हालत में होते हैं। इसी वजह से क्षेत्र के लोगों के मन में यह सवाल उठ रहा है कि आखिर इन वाहनों को कबाड़ में किस आधार पर काटा जा रहा है। हालांकि, इस संबंध में कोई आधिकारिक जानकारी या पुष्टि सामने नहीं आई है और न ही यह स्पष्ट हो सका है कि इन वाहनों के सभी दस्तावेज और स्वामित्व संबंधी औपचारिकताएं पूरी हैं या नहीं।
क्षेत्रवासियों का कहना है कि यदि संबंधित विभाग नियमित रूप से ऐसे परिसरों का निरीक्षण करें और वहां मौजूद वाहनों के पंजीकरण, स्वामित्व तथा अन्य आवश्यक दस्तावेजों का सत्यापन करें तो स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सकती है। उनका मानना है कि यदि सब कुछ नियमानुसार हो रहा है तो जांच के बाद लोगों की शंकाएं स्वतः समाप्त हो जाएंगी, लेकिन यदि किसी प्रकार की अनियमितता सामने आती है तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।
स्थानीय लोगों ने यह भी आरोप लगाया कि वाहन काटने के बाद उनके अनुपयोगी हिस्सों, प्लास्टिक और रबर जैसी सामग्री को खुले में जलाया जाता है। इससे निकलने वाला धुआं आसपास के वातावरण को प्रभावित करता है और क्षेत्र में रहने वाले लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। लोगों का कहना है कि गर्मी और उमस के मौसम में धुएं के कारण सांस लेने में दिक्कत होती है तथा आसपास का वातावरण भी प्रदूषित हो जाता है। उनका कहना है कि यदि वास्तव में खुले में इस प्रकार का कचरा जलाया जा रहा है तो यह पर्यावरणीय नियमों का भी उल्लंघन है और इस पर संबंधित विभाग को ध्यान देना चाहिए।
क्षेत्रवासियों का कहना है कि यह मामला केवल कबाड़ के कारोबार तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे कानून व्यवस्था और वाहन चोरी जैसी आशंकाएं भी जुड़ जाती हैं। लोगों का कहना है कि यदि किसी भी स्थान पर बड़ी संख्या में वाहनों की कटाई हो रही है तो यह आवश्यक है कि पुलिस और परिवहन विभाग समय-समय पर जांच करें, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि वहां पहुंचने वाले सभी वाहन वैध प्रक्रिया के तहत ही कबाड़ में शामिल किए गए हैं। हालांकि, स्थानीय लोगों की ओर से लगाए गए इन आरोपों की अभी तक किसी सरकारी एजेंसी ने पुष्टि नहीं की है।
लोगों का कहना है कि कई बार उन्होंने इस विषय को जिम्मेदार अधिकारियों के संज्ञान में लाने का प्रयास किया, लेकिन अब तक कोई प्रभावी कार्रवाई दिखाई नहीं दी। उनका मानना है कि यदि प्रशासन नियमित निरीक्षण की व्यवस्था करे और ऐसे परिसरों का रिकॉर्ड समय-समय पर जांचे तो किसी भी प्रकार की अवैध गतिविधि की संभावना को काफी हद तक रोका जा सकता है।
क्षेत्रवासियों ने जिला प्रशासन, स्थानीय पुलिस, परिवहन विभाग (आरटीओ) तथा प्रदूषण नियंत्रण से जुड़े अधिकारियों से मांग की है कि उक्त कबाड़ परिसर की संयुक्त रूप से जांच कराई जाए। साथ ही वहां मौजूद वाहनों के रजिस्ट्रेशन, इंजन और चेसिस नंबर का सत्यापन कराया जाए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि सभी वाहन वैध तरीके से कबाड़ में पहुंचे हैं या नहीं। लोगों ने यह भी मांग की है कि यदि जांच में किसी प्रकार की अनियमितता, नियमों का उल्लंघन या कोई अवैध गतिविधि सामने आती है तो संबंधित लोगों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए।
स्थानीय लोगों द्वारा लगाए गए आरोपों और उनके बयानों पर आधारित है। समाचार प्रकाशित किए जाने तक पुलिस, परिवहन विभाग अथवा अन्य संबंधित अधिकारियों की ओर से इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि या पक्ष प्राप्त नहीं हो सका है। यदि संबंधित विभाग या पक्ष का बयान प्राप्त होता है तो उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।)
