एम्स नई दिल्ली में दोपहर 1:15 बजे ली अंतिम सांस, परिवार और करीबियों में शोक की लहर

वाराणसी। भाजपा सांसद और भोजपुरी अभिनेता-गायक मनोज तिवारी के बड़े भाई साधु शरण तिवारी का शनिवार को निधन हो गया। उन्होंने नई दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में दोपहर करीब 1:15 बजे अंतिम सांस ली। उनके निधन की खबर मिलते ही परिवार, रिश्तेदारों और करीबियों में शोक की लहर दौड़ गई। परिवार के लिए साधु शरण तिवारी का निधन एक बड़ी क्षति है। उनका अंतिम संस्कार सोमवार को काशी के मणिकर्णिका घाट पर किया जाएगा। परिवार की ओर से अंतिम संस्कार की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं।

साधु शरण तिवारी के निधन की जानकारी उनके छोटे भाई और भाजपा सांसद मनोज तिवारी ने सोशल मीडिया के माध्यम से साझा की। परिवार में साधु शरण तिवारी को स्नेह से ‘साधु भैया’ कहकर पुकारा जाता था। मनोज तिवारी ने अपने बड़े भाई के निधन पर भावुक संदेश साझा करते हुए उन्हें परिवार का अभिभावक और अपना मार्गदर्शक बताया। उनके निधन से परिवार ने अपना एक महत्वपूर्ण सहारा खो दिया है।

साधु शरण तिवारी चार भाइयों और एक बहन में सबसे बड़े थे। परिवार में सबसे बड़े होने के कारण उन्होंने लंबे समय तक परिवार की जिम्मेदारियां संभालीं। छोटे भाई-बहनों के प्रति उनका व्यवहार हमेशा मार्गदर्शक और अभिभावक जैसा रहा। मनोज तिवारी के जीवन में भी उनका विशेष स्थान था।

मनोज तिवारी के अनुसार, साधु शरण तिवारी केवल उनके बड़े भाई ही नहीं थे, बल्कि जीवन के महत्वपूर्ण फैसलों में मार्गदर्शन देने वाले व्यक्ति भी थे। परिवार में किसी भी कठिन परिस्थिति के दौरान उनका सहयोग और सलाह महत्वपूर्ण मानी जाती थी। यही वजह है कि उनके निधन ने परिवार को गहरे शोक में डाल दिया है।साधु शरण तिवारी

साधु शरण तिवारी पढ़ाई में मेधावी थे। उन्होंने आईआईटी बीएचयू से इंजीनियरिंग की शिक्षा हासिल की। शिक्षा पूरी करने के बाद उन्होंने पेशेवर जीवन में कदम रखा और देश के प्रमुख सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम तेल एवं प्राकृतिक गैस निगम लिमिटेड यानी ओएनजीसी में सेवाएं दीं।

ओएनजीसी में अपने लंबे सेवाकाल के दौरान उन्होंने देश के अलग-अलग हिस्सों में जिम्मेदारियां संभालीं। उनकी तैनाती कोलकाता, असम के नाजीरा-शिवसागर और मुंबई सहित कई स्थानों पर रही। अपने अनुभव और कार्यकुशलता के चलते उन्होंने संस्थान में विभिन्न महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं और महाप्रबंधक यानी जीएम के पद तक पहुंचे। इसी पद से वह सेवानिवृत्त हुए।

ओएनजीसी से सेवानिवृत्त होने के बाद साधु शरण तिवारी ने वाराणसी को अपना स्थायी निवास बनाया। वह चितईपुर स्थित अपने आवास पर रह रहे थे। काशी से उनका विशेष लगाव था। परिवार के अनुसार, सेवानिवृत्ति के बाद उनका काफी समय वाराणसी में ही बीतता था।

उनके निधन की सूचना मिलते ही चितईपुर स्थित आवास पर परिवार के सदस्यों, रिश्तेदारों और परिचितों के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया। लोग परिवार के सदस्यों से मिलकर शोक संवेदना व्यक्त करते रहे। घर का माहौल गमगीन रहा।

साधु शरण तिवारी का मनोज तिवारी के जीवन और करियर में भी महत्वपूर्ण योगदान बताया जाता है। मनोज तिवारी के संगीत सफर के शुरुआती दौर में बड़े भाई का मार्गदर्शन और प्रोत्साहन उन्हें मिलता रहा। साधु शरण तिवारी ने उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया और जीवन में अनुशासन व मेहनत के महत्व को समझाया।

मनोज तिवारी ने अपने भावुक संदेश में बड़े भाई को अपना मार्गदर्शक बताते हुए उनके साथ बिताए पलों को याद किया। उन्होंने बताया कि साधु शरण तिवारी परिवार के लिए हमेशा एक मजबूत सहारे की तरह रहे। उनकी सलाह और अनुभव का लाभ परिवार के सभी सदस्यों को मिलता रहा।

बड़े भाई के निधन के बाद मनोज तिवारी ने उनके साथ हुई अंतिम मुलाकात को भी याद किया। उन्होंने बताया कि साधु शरण तिवारी का स्वभाव ऐसा था कि मुलाकात के दौरान वह जीवन से जुड़ी बातें जरूर समझाते थे। उनकी बातचीत में अनुभव और सीख होती थी।

मनोज तिवारी ने सोशल मीडिया पर साझा किए गए अपने भावुक संदेश में बताया कि अंतिम मुलाकात के दौरान उनके बड़े भाई ने उन्हें एक कविता भी सुनाई थी। उस समय दोनों भाइयों को यह अंदाजा नहीं था कि यह मुलाकात आखिरी होगी। यही याद अब मनोज तिवारी और परिवार के लिए भावुक कर देने वाली स्मृति बन गई है।

साधु शरण तिवारी मनोज तिवारी के बड़े भाई

साधु शरण तिवारी का अंतिम संस्कार सोमवार को काशी के प्रसिद्ध मणिकर्णिका घाट पर किया जाएगा। परिवार की ओर से अंतिम संस्कार से जुड़ी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। अंतिम यात्रा में परिवार के सदस्यों, रिश्तेदारों और करीबियों के शामिल होने की संभावना है।

काशी में अंतिम संस्कार की जानकारी सामने आने के बाद चितईपुर स्थित आवास पर भी लोगों की आवाजाही बढ़ गई। परिवार के परिचित और शुभचिंतक पहुंचकर शोक संवेदना व्यक्त कर रहे हैं।

साधु शरण तिवारी के निधन से परिवार ने ऐसे सदस्य को खो दिया है, जिसने अपने पेशेवर जीवन में जिम्मेदारियों को पूरी निष्ठा से निभाने के साथ परिवार के लिए भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इंजीनियरिंग की पढ़ाई से लेकर ओएनजीसी में महाप्रबंधक के पद तक का उनका सफर उपलब्धियों से भरा रहा।

सेवानिवृत्ति के बाद उन्होंने काशी में रहकर अपना जीवन बिताया। परिवार के बीच उनका स्थान हमेशा एक बड़े और अनुभवी सदस्य का रहा। उनके निधन से परिवार के साथ उनसे जुड़े लोगों में भी शोक का माहौल है।

मनोज तिवारी के लिए यह दुख केवल बड़े भाई को खोने का नहीं, बल्कि उस व्यक्ति के बिछड़ने का है, जो उनके जीवन के अलग-अलग पड़ावों पर मार्गदर्शक और अभिभावक की भूमिका निभाता रहा। साधु शरण तिवारी की अंतिम यात्रा सोमवार को काशी में होगी और मणिकर्णिका घाट पर उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा।

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