तीन दिवसीय वार्षिक श्रृंगार व संगीत महोत्सव का हुआ भव्य समापन, 12 घंटे चला अखंड भंडारा; पूर्वांचल के 21 कलाकारों ने देवी गीतों से बांधा समां

वाराणसी। दुर्गाकुंड स्थित भगवती मां कूष्मांडा मंदिर में चल रहे तीन दिवसीय वार्षिक श्रृंगार एवं संगीत महोत्सव का गुरुवार को भव्य समापन हुआ। महोत्सव की अंतिम रात भक्ति, संगीत और सेवा के अद्भुत संगम की साक्षी बनी। मां कूष्मांडा का स्वर्ण-जवाहर और रत्नाभूषणों से भव्य श्रृंगार किया गया। स्वर्णाभूषणों से सजी मां की दिव्य छवि के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। मां के जयकारों, घंटा-घड़ियाल की गूंज और देवी गीतों की स्वर लहरियों से पूरा मंदिर परिसर भक्तिमय बना रहा।

महोत्सव के अंतिम दिन पूर्वांचल के 21 कलाकारों ने देवी गीतों और लोकगीतों की प्रस्तुति देकर मां के चरणों में स्वरांजलि अर्पित की। वहीं, मंदिर परिसर में आयोजित अखंड भंडारे में 15 हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। दोपहर 12 बजे शुरू हुआ भंडारा रात 12 बजे तक लगातार 12 घंटे चला। देर रात तक श्रद्धालुओं के पहुंचने और प्रसाद ग्रहण करने का सिलसिला जारी रहा।

पंचामृत स्नान के बाद मां का हुआ भव्य श्रृंगार

मंदिर में शाम से ही मां के भव्य श्रृंगार और संगीत कार्यक्रम की तैयारियां शुरू हो गई थीं। मंदिर महंत पं. कौशलपति द्विवेदी और पं. संजय दुबे के सानिध्य में विधि-विधान से मां कूष्मांडा का पंचामृत स्नान कराया गया। इसके बाद मां को बनारसी लाल साड़ी और लाल चुनरी धारण कराई गई। कोलकाता से मंगाए गए गुलाब और रजनीगंधा के सुगंधित फूलों से मां का दरबार सजाया गया।

 

फूलों की आकर्षक सजावट और दीपों की रोशनी से मंदिर परिसर की छटा देखते ही बन रही थी। मां के श्रृंगार के दौरान मंदिर में विशेष धार्मिक वातावरण बना रहा। श्रृंगार पूरा होने के बाद मां को विभिन्न प्रकार के नैवेद्य, फल, मिष्ठान और पकवान अर्पित किए गए। विधिवत भोग और आरती के बाद श्रद्धालुओं के लिए मंदिर के कपाट खोले गए।

स्वर्ण मुकुट और मोतियों की लड़ियों से सजीं मां कूष्मांडा

मां कूष्मांडा को मांगटीका, नथिया, स्वर्ण मुकुट और विशेष फाटा हार धारण कराया गया। इसके साथ ही स्वर्ण-रजत युक्त मोतियों की लड़ियों से मां का विशेष श्रृंगार किया गया। स्वर्णाभूषणों से सजी मां की दिव्य छवि श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बनी रही।

कपाट खुलते ही मां के जयकारों से मंदिर परिसर गूंज उठा। श्रद्धालुओं ने कतारबद्ध होकर मां के दर्शन किए और परिवार की सुख-समृद्धि एवं शांति की कामना की। मां की एक झलक पाने के लिए श्रद्धालु देर रात तक मंदिर पहुंचते रहे। मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की आवाजाही लगातार बनी रही।

देवी गीतों से भक्तिमय हुआ मां का दरबार

दुर्गाकुंड

महोत्सव के अंतिम दिन आयोजित संगीत समारोह में पूर्वांचल के 21 कलाकारों ने अपनी कला साधना के माध्यम से मां की आराधना की। प्रख्यात भजन गायक गोपाल राय, विजय कपूर, जौनपुर की भावना सिंह, कल्पना सिंह, विदुषी वर्मा, करिश्मा पांडेय, पीयूष मिश्र, ज्योति माही, पवन परदेशी, ममता शर्मा, नियति वर्मा, प्रियंका पांडेय और अंजली ऊर्वशी सहित कलाकारों ने देवी गीत और पचरा प्रस्तुत किए।

कलाकारों ने ‘जय दुर्गे दुर्गति परिहारिणी…’, ‘अम्बे चरण कमल है तेरे…’, ‘कैसे नाही इठलाऊं मेरी मईया है आयी…’ और ‘लहरे लाहरदरवा कोहरवा…’ सहित विभिन्न देवी गीतों की प्रस्तुति दी। गीतों की मधुर स्वर लहरियों से मंदिर परिसर का वातावरण भक्तिरस में डूब गया। कलाकारों की प्रस्तुतियों के दौरान श्रद्धालु मां के जयकारे लगाते रहे। देर रात तक चले संगीत कार्यक्रम में कलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियों के जरिए मां के चरणों में स्वरांजलि अर्पित की।

दुर्गाकुंड

संगीत प्रस्तुतियों में वाद्य संगत ने भी चार चांद लगाए। तबले पर मोतीलाल शर्मा, ढोलक पर सोनू, कीबोर्ड पर नीरज, रामाश्रय और शिवांश, पैड पर राहुल तथा बैंजो पर जियाराम ने संगत की। कलाकारों की प्रस्तुतियों के दौरान श्रद्धालु भक्ति भाव में नजर आए।

12 घंटे चला अखंड भंडारा, 15 हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने ग्रहण किया प्रसाद

श्रृंगार महोत्सव के अंतिम दिन मंदिर परिसर में अखंड भंडारे का आयोजन भी किया गया। दोपहर 12 बजे मां की भोग आरती के बाद भंडारा शुरू हुआ, जो रात 12 बजे तक लगातार 12 घंटे चलता रहा। भंडारे में प्रसाद ग्रहण करने के लिए दोपहर से ही श्रद्धालुओं की कतार लगनी शुरू हो गई थी।

शाम होते-होते श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ती गई। मंदिर परिसर में प्रसाद ग्रहण करने के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंचते रहे। देर रात तक प्रसाद वितरण का क्रम अनवरत जारी रहा। श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण करने के साथ मां के दरबार में मत्था टेका और परिवार की सुख-शांति, समृद्धि और मंगल की कामना की।

दुर्गाकुंड

पं. विशेश्वर झा ‘सोनू’ ने बताया कि अखंड भंडारे में 15 हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने मां का भोग प्रसाद ग्रहण किया। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने के बावजूद प्रसाद वितरण का क्रम रात 12 बजे तक जारी रहा। भंडारे के दौरान मंदिर परिसर में सेवा और भक्ति का वातावरण बना रहा।

तीन दिनों तक भक्ति और संगीत में डूबा रहा दुर्गाकुंड

दुर्गाकुंड मां कूष्मांडा

तीन दिवसीय वार्षिक श्रृंगार एवं संगीत महोत्सव के दौरान दुर्गाकुंड स्थित मां कूष्मांडा का मंदिर भक्ति और सांस्कृतिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र बना रहा। महोत्सव के तीनों दिनों में मां के विभिन्न स्वरूपों का श्रृंगार, पूजन और आरती की गई। इसके साथ ही भजन, देवी गीत और लोकगीतों की प्रस्तुतियों ने श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक वातावरण से जोड़े रखा।

मां कूष्मांडा

अंतिम दिन स्वर्णाभूषणों से सजी मां की मनोहारी छवि, देवी गीतों की स्वर लहरियां और अखंड भंडारे में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़ ने महोत्सव की अंतिम रात को विशेष बना दिया। मंदिर परिसर में देर रात तक मां के दर्शन, भजन और प्रसाद वितरण का क्रम चलता रहा।

कलाकारों का हुआ स्वागत, संयोजन एवं संचालन

महोत्सव के आयोजन में कलाकारों का स्वागत कौशलपति द्विवेदी, बिंदु दुबे और सोनू झा ने किया। कार्यक्रम का संयोजन एवं संचालन प्रभुनाथ राय ‘दाढ़ी’ ने किया। आयोजन के दौरान कलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियों से श्रद्धालुओं को भाव-विभोर किया।

मां कूष्मांडा

भव्य श्रृंगार के दर्शन, देवी गीतों की प्रस्तुति और अखंड भंडारे में श्रद्धालुओं की भागीदारी के साथ तीन दिवसीय वार्षिक श्रृंगार एवं संगीत महोत्सव का विधिवत समापन हुआ। अंतिम दिन मंदिर परिसर में देर रात तक भक्ति का माहौल बना रहा और मां कूष्मांडा के जयकारों से पूरा दुर्गाकुंड गूंजता रहा।

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