वाराणसी। आईपीएल में सट्टा लगाने के नाम पर सोशल मीडिया और टेलीग्राम चैनलों के जरिए करीब 700 करोड़ रुपये की कथित साइबर ठगी के मामले में जांच तेज हो गई है। साइबर क्राइम थाना अब पूरे नेटवर्क की पड़ताल कर रहा है। शुरुआती जांच में 2000 से अधिक बैंक खातों, क्रिप्टोकरेंसी और हवाला नेटवर्क के जरिए करोड़ों रुपये के लेनदेन के संकेत मिले हैं।700 करोड़ की साइबर ठगी मामले की जांच में नए खुलासे

वाराणसी में सामने आए आईपीएल सट्टेबाजी से जुड़े कथित साइबर ठगी मामले की जांच अब नए चरण में पहुंच गई है। क्राइम ब्रांच से केस स्थानांतरित होने के बाद साइबर क्राइम थाना विशेषज्ञों की टीम के साथ पूरे नेटवर्क की गहन जांच कर रहा है।

जांच एजेंसियों के अनुसार, सोशल मीडिया और टेलीग्राम चैनलों के माध्यम से लोगों को आईपीएल सट्टे में अधिक मुनाफे का लालच देकर निवेश कराया जाता था। इसके बाद रकम को अलग-अलग बैंक खातों में भेजकर क्रिप्टोकरेंसी में बदला जाता था, जिससे पैसों की ट्रैकिंग मुश्किल हो सके।

प्रारंभिक जांच में पता चला है कि मुंबई से संचालित कथित ‘मलिक फर्म’ के माध्यम से 2000 से अधिक बैंक खातों का इस्तेमाल किया गया। जांच एजेंसियों को संदेह है कि इन्हीं खातों के जरिए ठगी की रकम को विभिन्न राज्यों और विदेशों तक पहुंचाया गया।

पुलिस के अनुसार, क्रिप्टोकरेंसी और हवाला नेटवर्क के जरिए धन को खाड़ी देशों तक भेजे जाने के संकेत भी मिले हैं। इसके अलावा उत्तर प्रदेश, दिल्ली, हरियाणा और मुंबई में भी रकम भेजे जाने की जानकारी सामने आई है।साइबर क्राइम पुलिस की जांच में सामने आया कि गिरोह के कथित सरगना रितेश दिवाकर शुक्ला और अन्य आरोपियों के खातों में केवल 30 दिनों के भीतर करीब 25 करोड़ रुपये का लेनदेन हुआ। मई महीने में ही 300 से अधिक बैंक खातों में 25 करोड़ रुपये ट्रांसफर किए जाने की जानकारी मिली है।

जांच अधिकारी अब इन सभी बैंक खातों, लेनदेन और उनसे जुड़े लोगों की भूमिका की पड़ताल कर रहे हैं।

वाराणसी से संचालित हो रहा था पूरा नेट

गौरतलब है कि 1 जून को कैंट पुलिस और क्राइम ब्रांच की संयुक्त टीम ने टकटकपुर स्थित एक अपार्टमेंट में छापेमारी कर 13 आरोपियों को गिरफ्तार किया था। कार्रवाई के दौरान आरोपियों के कब्जे से करीब एक करोड़ रुपये मूल्य की क्रिप्टोकरेंसी भी बरामद की गई थी।

पूछताछ में सामने आया कि पूरा गिरोह संगठित तरीके से काम कर रहा था और इसके तार मुंबई से जुड़े हुए थे।

मुंबई में मिला प्रशिक्षण, फिर तैयार किया गया गिरोह

पुलिस जांच के अनुसार, रितेश दिवाकर शुक्ला लंबे समय से मुंबई में रह रहा था, जहां उसकी मुलाकात साइबर जालसाजों से हुई। इसके बाद कथित मलिक फर्म ने उसे और उसके साथियों को लगभग 10 दिनों का विशेष प्रशिक्षण दिया।

प्रशिक्षण पूरा होने के बाद उसने वाराणसी और आसपास के जिलों के युवकों को इस नेटवर्क से जोड़ा। सोशल मीडिया विज्ञापनों और टेलीग्राम चैनलों के जरिए लोगों को आईपीएल सट्टे में भारी मुनाफे का झांसा देकर निवेश कराया जाता था।

रियल एस्टेट और हवाला में निवेश के संकेत

साइबर विशेषज्ञों की जांच में यह भी सामने आया है कि ठगी से अर्जित धन का एक हिस्सा हवाला नेटवर्क के माध्यम से विभिन्न राज्यों में भेजा गया। वहीं लखनऊ, वाराणसी और कानपुर सहित कई शहरों में रियल एस्टेट परियोजनाओं में निवेश किए जाने के भी संकेत मिले हैं।

अब पुलिस इन संपत्तियों और निवेश से जुड़े दस्तावेजों की भी जांच कर रही है।एसीपी साइबर विदुष सक्सेना ने बताया कि साइबर क्राइम थाना पूरे मामले की गंभीरता से जांच कर रहा है। विशेषज्ञ टीम बैंक खातों, क्रिप्टो वॉलेट, डिजिटल ट्रांजैक्शन और कथित मलिक फर्म से जुड़े लोगों की पहचान में जुटी है।

उन्होंने बताया कि जेल में बंद आरोपियों को पुलिस रिमांड पर लेकर पूछताछ की जाएगी, ताकि पूरे नेटवर्क, विदेशी कनेक्शन और ठगी की रकम के वास्तविक प्रवाह का पता लगाया जा सके।

जांच एजेंसियों का मानना है कि आने वाले दिनों में इस अंतरराज्यीय साइबर ठगी गिरोह से जुड़े कई और नाम सामने आ सकते हैं।

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