घाटों पर आवाजाही प्रभावित, गंगा आरती का स्थान बदला; नाविकों, दुकानदारों और तीर्थ पुरोहितों के सामने रोजी-रोटी का संकट

वाराणसी। काशी में गंगा का जलस्तर लगातार बढ़ने के साथ अब बाढ़ का असर घाटों से निकलकर आसपास की गलियों और सड़क मार्ग तक पहुंचने लगा है। गंगा का पानी धीरे-धीरे घाटों की सीढ़ियों को पार करते हुए अस्सी घाट की गलियों में प्रवेश कर गया है। पानी बढ़ने से घाट का निचला हिस्सा पूरी तरह जलमग्न हो गया है, जबकि घाट की पहचान बन चुका ‘सुबह-ए-बनारस’ का मंच भी करीब आधा पानी में डूब गया है। बढ़ते जलस्तर के कारण घाटों पर होने वाली गतिविधियां प्रभावित हुई हैं और कई दुकानदारों को अपना कारोबार सड़क की ओर शिफ्ट करना पड़ा है।

केंद्रीय जल आयोग के राजघाट गेज स्थल के अनुसार 31 अगस्त की सुबह आठ बजे गंगा का जलस्तर 69.90 मीटर दर्ज किया गया। उस समय नदी का पानी करीब दो सेंटीमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से बढ़ रहा था। वाराणसी में गंगा का चेतावनी स्तर 70.262 मीटर और खतरे का निशान 71.262 मीटर निर्धारित है। इस लिहाज से सुबह की रीडिंग में गंगा का जलस्तर चेतावनी बिंदु से करीब 36 सेंटीमीटर नीचे था।

इससे पहले रविवार रात आठ बजे राजघाट पर गंगा का जलस्तर 69.52 मीटर दर्ज किया गया था और उस समय पानी बढ़ने की गति करीब चार सेंटीमीटर प्रति घंटे बताई गई थी। जलस्तर में लगातार हो रहे उतार-चढ़ाव और वृद्धि ने प्रशासन के साथ ही घाट किनारे रहने वाले लोगों की चिंता बढ़ा दी है।

अस्सी की गलियों में पहुंचा गंगा का पानी

जलस्तर बढ़ने का सबसे स्पष्ट असर अस्सी घाट पर देखने को मिल रहा है। घाट की निचली सीढ़ियां और आसपास का क्षेत्र पानी में समाने के बाद अब पानी गलियों की ओर बढ़ रहा है। घाट पर रोजाना दुकान लगाने वाले छोटे दुकानदारों को अपना सामान समेटकर पीछे सड़क की ओर ले जाना पड़ा है।

चाय-पान, खानपान, पूजा सामग्री, फूल-माला और अन्य छोटे कारोबार से जुड़े लोगों का कहना है कि बाढ़ के कारण घाट पर आने वाले ग्राहकों की संख्या घट गई है। सामान्य दिनों में जहां सुबह से देर रात तक अस्सी घाट पर पर्यटकों और स्थानीय लोगों की भीड़ रहती है, वहीं गंगा का पानी बढ़ने के बाद लोगों की आवाजाही सीमित हो गई है। इससे घाट आधारित छोटे कारोबारियों की रोजाना की आमदनी पर सीधा असर पड़ा है।

गंगा

पानी में डूबा ‘सुबह-ए-बनारस’ का मंच

अस्सी घाट पर होने वाले सांस्कृतिक कार्यक्रमों की पहचान ‘सुबह-ए-बनारस’ का मंच भी बढ़ते जलस्तर की चपेट में आ गया है। मंच का करीब आधा हिस्सा पानी में डूब चुका है। घाट के निचले हिस्से में पानी भरने के कारण यहां होने वाली सामान्य गतिविधियां भी प्रभावित हुई हैं।

सुबह के समय घाट पर टहलने, गंगा दर्शन और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आनंद लेने पहुंचने वाले लोगों को भी अब परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। पानी बढ़ने से घाट की सीढ़ियों पर आवाजाही जोखिम भरी हो गई है।

गंगा आरती का स्थान बदला

बढ़ते जलस्तर का असर धार्मिक आयोजनों पर भी पड़ा है। घाट के निचले हिस्से में पानी पहुंचने के बाद गंगा आरती का स्थान बदलकर ऊंचे हिस्से में किया जा रहा है। श्रद्धालुओं और पर्यटकों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए आयोजकों की ओर से वैकल्पिक व्यवस्था की जा रही है।

 वाराणसी गंगा अस्सी जलस्तर

घाटों पर सुरक्षा को लेकर भी सतर्कता बढ़ा दी गई है। लोगों को नदी के बढ़े हुए पानी के करीब जाने से बचने और नाव संचालन के दौरान सावधानी बरतने की सलाह दी जा रही है।

नाविकों की बढ़ी चिंता, कारोबार पर असर

गंगा का जलस्तर बढ़ने से नाविकों की रोजी-रोटी भी प्रभावित हुई है। नाविकों का कहना है कि पानी लगातार इसी तरह बढ़ता रहा तो आने वाले समय में इसका असर घाट से आगे सड़क मार्ग तक दिखाई दे सकता है। जलस्तर बढ़ने के साथ नाव संचालन, यात्रियों की आवाजाही और दैनिक कमाई पर असर पड़ा है।

नाविकों के लिए गंगा केवल आस्था का केंद्र नहीं, बल्कि उनकी आजीविका का प्रमुख साधन भी है। ऐसे में बढ़ता जलस्तर उनके सामने आर्थिक संकट भी खड़ा कर रहा है।

सड़क पर पहुंचे पंडे, वहीं से करा रहे पूजा

घाट के निचले हिस्से में पानी भरने के बाद तीर्थ पुरोहित और पंडा समाज के लोगों को भी अपना स्थान बदलना पड़ा है। कई पंडे अपनी चौकी और आसन लेकर सड़क मार्ग की ओर पहुंच गए हैं। अब वहीं से श्रद्धालुओं के पूजन और धार्मिक अनुष्ठान कराने की व्यवस्था की जा रही है।

 

घाट से जुड़े लोगों के लिए समस्या केवल आवागमन तक सीमित नहीं है। लगातार बढ़ता पानी उनके कारोबार और रोजमर्रा की आय को भी प्रभावित कर रहा है। दुकानदार, नाविक, तीर्थ पुरोहित और अन्य घाट आधारित कारोबारी अब जलस्तर कम होने की उम्मीद लगाए बैठे हैं।

मणिकर्णिका और हरिश्चंद्र घाट पर भी बढ़ी परेशानी

गंगा के बढ़ते जलस्तर का असर काशी के प्रमुख घाटों पर भी दिखाई दे रहा है। मणिकर्णिका और हरिश्चंद्र घाट की ओर जाने वाले निचले रास्तों और गलियों में पानी पहुंचने से अंतिम संस्कार की व्यवस्था प्रभावित हुई है। मणिकर्णिका क्षेत्र में गलियों तक पानी पहुंचने के बाद शवयात्रियों को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

अंतिम संस्कार के लिए आने वाले लोगों को जलभराव वाले रास्तों से होकर गुजरना पड़ रहा है। इससे घाटों पर सामान्य व्यवस्था बनाए रखना प्रशासन के लिए चुनौती बन गया है।

वरुणा तट के इलाकों में भी बाढ़ का असर

गंगा के जलस्तर में वृद्धि के साथ वरुणा नदी के तटवर्ती क्षेत्रों में भी परेशानी बढ़ने लगी है। सरैया, सलारपुर और नख्खीघाट समेत वरुणा किनारे के कुछ इलाकों में बाढ़ का असर पहुंचने की जानकारी सामने आई है। निचले इलाकों में रहने वाले परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की कवायद की जा रही है।

गंगा अस्सी घाट

प्रभावित लोगों के लिए राहत शिविरों की व्यवस्था की गई है। प्रशासन और आपदा प्रबंधन टीम की ओर से प्रभावित क्षेत्रों में राहत एवं बचाव कार्यों को सक्रिय रखा गया है। जरूरत के अनुसार नावों और एनडीआरएफ की टीम की मदद ली जा रही है। राहत शिविरों में भोजन, फल, दूध, ओआरएस और क्लोरीन टैबलेट जैसी आवश्यक सामग्री उपलब्ध कराए जाने की व्यवस्था की गई है।

प्रशासन की बढ़ी निगरानी

बाढ़ की स्थिति को देखते हुए जिला प्रशासन और आपदा प्रबंधन तंत्र लगातार गंगा के जलस्तर पर नजर बनाए हुए है। तटवर्ती और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने तथा आवश्यकता पड़ने पर सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी जा रही है।

अधिकारियों की ओर से घाटों और प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण कर स्थिति का जायजा लिया जा रहा है। जलस्तर में वृद्धि को देखते हुए लोगों से नदी के किनारे जाने से बचने और प्रशासन की ओर से जारी दिशा-निर्देशों का पालन करने की अपील की जा रही है।

चेतावनी बिंदु के करीब गंगा, अगले कुछ घंटे अहम

गंगा का जलस्तर चेतावनी बिंदु के करीब पहुंचने के कारण आने वाले घंटे काशी के लिए महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। रविवार को कुछ समय के दौरान पानी बढ़ने की गति पांच सेंटीमीटर प्रति घंटे तक पहुंची थी। करीब 30 घंटे के भीतर जलस्तर में 1.26 मीटर से अधिक की वृद्धि दर्ज किए जाने से स्थिति की गंभीरता का अंदाजा लगाया जा सकता है।

गंगा अस्सी घाट

फिलहाल प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती घाटों, तटवर्ती बस्तियों और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। अस्सी से लेकर मणिकर्णिका तक बढ़ता गंगा का पानी जनजीवन, धार्मिक गतिविधियों, पर्यटन और घाट आधारित रोजगार को प्रभावित कर रहा है।

गंगा के जलस्तर में यदि इसी तरह वृद्धि जारी रही तो पानी का दायरा घाटों से आगे सड़क और आसपास के निचले इलाकों तक बढ़ सकता है। ऐसे में प्रशासन के साथ स्थानीय लोगों की निगाहें अब गंगा के अगले जलस्तर अपडेट पर टिकी हैं।

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