BHU में बेसिक से ब्राइडल मेहंदी डिजाइन का दिया गया प्रशिक्षण, महिला सशक्तीकरण और स्वरोजगार को बढ़ावा देने पर जोर
वाराणसी। काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) के सामाजिक विज्ञान संकाय स्थित समन्वित ग्रामीण विकास केंद्र की ओर से आयोजित ‘मेहंदी प्रशिक्षण – बेसिक से ब्राइडल’ कार्यक्रम का समापन 17 अक्टूबर 2026 को प्रमाण-पत्र वितरण समारोह के साथ हुआ। यह प्रशिक्षण कार्यक्रम 21 सितंबर से 17 अक्टूबर 2026 तक आयोजित किया गया। इसके तहत कुल 50 प्रतिभागियों को मेहंदी कला का प्रशिक्षण दिया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य महिलाओं और छात्राओं को व्यावहारिक कौशल से जोड़ना तथा महिला सशक्तीकरण, आत्मनिर्भरता और स्वरोजगार के अवसरों को प्रोत्साहित करना रहा।
प्रशिक्षण कार्यक्रम में ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं, बीएचयू की छात्राओं और सिलाई केंद्र से जुड़ी प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को मेहंदी लगाने की बुनियादी तकनीकों से लेकर आकर्षक ब्राइडल मेहंदी डिजाइन तैयार करने तक की जानकारी दी गई। इसके माध्यम से प्रतिभागियों को अपनी रचनात्मकता और कलात्मक क्षमता विकसित करने का अवसर मिला। साथ ही मेहंदी कला को रोजगार और आजीविका के साधन के रूप में अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया गया।
कौशल विकास से महिलाएं बन सकती हैं आत्मनिर्भर
समापन समारोह में काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU)के छात्र अधिष्ठाता प्रो. रंजन कुमार सिंह मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। उन्होंने अपने संबोधन में कौशल विकास को महिला सशक्तीकरण का महत्वपूर्ण माध्यम बताया। उन्होंने कहा कि महिलाओं को व्यावहारिक और रोजगारपरक प्रशिक्षण उपलब्ध कराकर उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में प्रयास किए जा सकते हैं।

उन्होंने इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रमों की सराहना करते हुए कहा कि मेहंदी जैसी कलाओं में दक्षता हासिल कर महिलाएं स्वरोजगार के अवसर विकसित कर सकती हैं। इससे वे अपनी आमदनी बढ़ाने के साथ परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने में भी योगदान दे सकती हैं।
ग्रामीण महिलाओं और छात्राओं को मिला प्रशिक्षण का अवसर
कार्यक्रम का स्वागत भाषण देते हुए समन्वित ग्रामीण विकास केंद्र, बीएचयू के समन्वयक डॉ. आलोक कुमार पांडेय ने कौशल विकास को ग्रामीण महिलाओं के सामाजिक और आर्थिक सशक्तीकरण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं और छात्राओं को रोजगारपरक प्रशिक्षण उपलब्ध कराना आवश्यक है, ताकि वे अपनी प्रतिभा और कौशल को आय के साधन में बदल सकें।

उन्होंने बताया कि इस तरह के प्रशिक्षण कार्यक्रम महिलाओं में आत्मविश्वास, रचनात्मकता और उद्यमशीलता की भावना विकसित करने में सहायक होते हैं। केंद्र की ओर से ग्रामीण आजीविका संवर्धन, महिला सशक्तीकरण और कौशल आधारित प्रशिक्षण गतिविधियों को प्रोत्साहित करने पर जोर दिया जा रहा है।

बेसिक से ब्राइडल डिजाइन तक सिखाई गईं तकनीकें
प्रशिक्षण कार्यक्रम में BHU फेलो और प्रशिक्षक चंदन एसआरके (Chandan SRK) ने प्रतिभागियों को मेहंदी कला का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया। उनके मार्गदर्शन में प्रतिभागियों ने अलग-अलग प्रकार के मेहंदी डिजाइन बनाने की तकनीकें सीखीं। प्रशिक्षण के दौरान शुरुआती डिजाइन तैयार करने से लेकर ब्राइडल मेहंदी की बारीकियों तक पर विशेष ध्यान दिया गया।

कार्यक्रम का आयोजन BHU के छात्र परामर्शदाता नित्यानंद तिवारी के समन्वय से किया गया। उनके सहयोग से कार्यक्रम का संचालन किया गया।
50 प्रतिभागियों को वितरित किए गए प्रमाण-पत्र
समारोह के अंत में परियोजना अधिकारी डॉ. भूपेंद्र प्रताप सिंह और सिलाई प्रशिक्षिका आरती विश्वकर्मा ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया। उन्होंने मुख्य अतिथि, विश्वविद्यालय प्रशासन, प्रशिक्षक, आयोजकों और सभी प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया। इसके बाद प्रशिक्षण पूरा करने वाले 50 प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र वितरित किए गए।
कार्यक्रम में केंद्र के कर्मचारी शशि रंजन, अनिल कुमार भूषण, रामजी और सतीश कुमार भी उपस्थित रहे। कार्यक्रम के सफल आयोजन में केंद्र से जुड़े सदस्यों का सहयोग रहा।
समन्वित ग्रामीण विकास केंद्र की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम ने महिला सशक्तीकरण, व्यावसायिक कौशल विकास और स्वरोजगार को प्रोत्साहित करने के प्रयासों को रेखांकित किया।
