मूसलाधार वर्षा से बीएचयू अस्पताल परिसर में जलभराव, मरीजों और तीमारदारों को उठानी पड़ी भारी परेशान
सिंहद्वार से सर सुंदरलाल चिकित्सालय तक भरा घुटने तक पानी, कई दोपहिया वाहन हुए बंद; हर मानसून में दोहराई जाती है समस्या
वाराणसी। बुधवार को काशी में हुई मूसलाधार वर्षा ने जहां लोगों को उमस और गर्मी से राहत दी, वहीं शहर के कई इलाकों में जलभराव की समस्या भी सामने आ गई। काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) परिसर भी इससे अछूता नहीं रहा। बीएचयू के सिंहद्वार से लेकर सर सुंदरलाल चिकित्सालय तक कई स्थानों पर पानी भर गया, जिससे अस्पताल आने वाले मरीजों, उनके तीमारदारों और राहगीरों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। अस्पताल परिसर के बाहर और मुख्य मार्ग पर घुटनों तक पानी जमा होने से लोगों को पानी के बीच से होकर अस्पताल पहुंचना पड़ा।
बारिश के बाद अस्पताल की ओर जाने वाले मार्ग पर जलभराव इतना अधिक हो गया कि पैदल चलना भी मुश्किल हो गया। इलाज के लिए दूर-दराज से आए मरीजों और उनके परिजनों को काफी परेशानी झेलनी पड़ी। कई बुजुर्ग मरीजों को सहारा देकर पानी के बीच से अस्पताल तक ले जाया गया, जबकि व्हीलचेयर और स्ट्रेचर पर मरीजों को ले जाने में भी तीमारदारों को काफी मशक्कत करनी पड़ी। अस्पताल के बाहर मौजूद लोगों का कहना था कि इलाज की चिंता अलग रहती है और ऐसे में जलभराव उनकी परेशानी को और बढ़ा देता है।

बारिश का असर वाहनों की आवाजाही पर भी देखने को मिला। अस्पताल मार्ग पर कई दोपहिया वाहन पानी में बंद हो गए। वाहन चालकों को अपने वाहन धक्का लगाकर बाहर निकालने पड़े। कुछ चारपहिया वाहन भी पानी भरे रास्ते पर धीरे-धीरे चलते नजर आए। सड़क पर पानी जमा होने के कारण कई लोगों ने वैकल्पिक रास्तों का सहारा लिया। हालांकि बारिश थमने के बाद यातायात धीरे-धीरे सामान्य हुआ, लेकिन कई घंटों तक लोगों को परेशानी उठानी पड़ी।

स्थानीय लोगों का कहना है कि बीएचयू के सर सुंदरलाल चिकित्सालय के आसपास जलभराव की समस्या कोई नई बात नहीं है। हर वर्ष मानसून के दौरान थोड़ी देर की बारिश के बाद भी यहां पानी भर जाता है। कई बार शिकायतें करने के बावजूद अब तक इस समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सका है। बारिश रुकने के बाद कुछ समय में पानी निकल जाता है, लेकिन अगली बारिश के साथ फिर वही हालात बन जाते हैं। लोगों का कहना है कि यदि जलनिकासी की व्यवस्था समय रहते दुरुस्त कर दी जाए तो इस समस्या से काफी हद तक राहत मिल सकती है।
सर सुंदरलाल चिकित्सालय पूर्वांचल का सबसे बड़ा सरकारी अस्पताल माना जाता है। यहां वाराणसी ही नहीं बल्कि गाजीपुर, जौनपुर, चंदौली, भदोही, मिर्जापुर, सोनभद्र, बलिया, आजमगढ़ सहित कई जिलों और पड़ोसी राज्यों से भी बड़ी संख्या में मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं। प्रतिदिन हजारों मरीज और उनके तीमारदार अस्पताल परिसर में आते-जाते हैं। ऐसे में अस्पताल के मुख्य मार्ग पर जलभराव की स्थिति मरीजों की परेशानी को और बढ़ा देती है। विशेष रूप से गंभीर मरीजों को अस्पताल तक पहुंचाने में काफी कठिनाई होती है।
मरीजों के परिजनों ने बताया कि अस्पताल जैसे महत्वपूर्ण संस्थान में जलभराव होना चिंता का विषय है। उनका कहना है कि बारिश के दिनों में सबसे अधिक परेशानी बुजुर्गों, दिव्यांगों और गंभीर मरीजों को होती है। कई लोगों को अपने कपड़े और जरूरी दस्तावेज बचाते हुए पानी के बीच से गुजरना पड़ा। वहीं अस्पताल पहुंचने वाले कई लोगों ने प्रशासन से बेहतर जलनिकासी व्यवस्था की मांग की।

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि नालों की नियमित सफाई और जलनिकासी की प्रभावी व्यवस्था सुनिश्चित की जाए तो हर वर्ष होने वाली इस समस्या से छुटकारा मिल सकता है। उनका कहना है कि अस्पताल परिसर में आने वाले मरीजों की सुविधा को प्राथमिकता देते हुए स्थायी समाधान किया जाना चाहिए। लोगों ने बीएचयू प्रशासन और संबंधित विभागों से मांग की है कि सिंहद्वार और सर सुंदरलाल चिकित्सालय के आसपास जलनिकासी व्यवस्था को मजबूत बनाया जाए, ताकि बारिश के दौरान मरीजों और उनके तीमारदारों को अनावश्यक परेशानियों का सामना न करना पड़े।
