पातालपुरी मठ में श्रीराम परिवार गाथा के तीसरे दिन राम के आदर्शों और भयमुक्त समाज की अवधारणा पर हुआ विमर्श

वाराणसी। पातालपुरी मठ में चल रही श्रीराम परिवार गाथा के तीसरे दिन भगवान श्रीराम के जीवन, उनके आदर्शों और भयमुक्त समाज की स्थापना के संकल्प पर विस्तार से चर्चा की गई। विशाल भारत संस्थान एवं पातालपुरी सनातन धर्म रक्षा परिषद के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में धर्माचार्यों, इतिहासकारों और विद्वानों ने श्रीराम के चरित्र को समाज के लिए प्रेरणास्रोत बताते हुए कहा कि रामराज्य का मूल आधार न्याय, सुरक्षा और निर्भय समाज है। कार्यक्रम में रामायण और रामचरितमानस के प्रसंगों के माध्यम से भगवान श्रीराम के आदर्शों को प्रस्तुत किया गया।

कार्यक्रम के मुख्य वक्ता साहित्यकार डॉ. कवीन्द्र नारायण ने कहा  कि वाल्मीकि रामायण के अनुसार भगवान श्रीराम नेअपने बाल्यकाल से ही समाज को भय और अत्याचार से मुक्त करने का संकल्प लिया था। उन्होंने ताड़का, सुबाहु और मारीच के प्रसंगों का उल्लेख करते हुए कहा कि श्रीराम ने यह संदेश दिया कि समाज में आतंक और अन्याय फैलाने वालों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई आवश्यक है। उन्होंने कहा कि श्रीराम ने ताड़का का वध कर और मारीच को परास्त कर यह स्पष्ट किया कि समाज की रक्षा सर्वोपरि है। साथ ही देवी अहिल्या के उद्धार का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि श्रीराम ने सदैव नारी सम्मान और न्याय की स्थापना को महत्व दिया तथा झूठे आरोपों से पीड़ित अहिल्या को सम्मानपूर्वक समाज में प्रतिष्ठा दिलाई।

मुख्य गाथाकार जगद्गुरु बालक देवाचार्य जी महाराज ने कहा कि श्रीरामचरितमानस में वर्णित प्रसंग बताते हैं कि भगवान श्रीराम का उद्देश्य केवल ऋषि-मुनियों की रक्षा तक सीमित नहीं था, बल्कि वे संपूर्ण समाज को भयमुक्त बनाना चाहते थे। उन्होंने कहा कि खर-दूषण और उनकी सेना के आतंक से वनवासी और आदिवासी समाज सबसे अधिक प्रभावित था। श्रीराम ने उनका अंत कर समाज के कमजोर वर्गों को सुरक्षा प्रदान की। उन्होंने सुग्रीव की सहायता, बाली के वध तथा माता सीता को रावण की कैद से मुक्त कराने के प्रसंगों का उल्लेख करते हुए कहा कि श्रीराम ने यह संदेश दिया कि अन्याय, अत्याचार और अपहरण जैसे अपराधों के विरुद्ध दृढ़ता से खड़ा होना ही धर्म है।

महंत अवधेश दास जी ने कहा कि भयमुक्त समाज की स्थापना ही वास्तविक रामराज्य है। उन्होंने कहा कि जिस समाज में नागरिक स्वयं को सुरक्षित महसूस करें, जहां न्याय की स्थापना हो और अत्याचार का स्थान न हो, वही आदर्श समाज कहलाता है। उन्होंने कहा कि श्रीराम का जीवन आज भी समाज को नैतिकता, मर्यादा और न्याय के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है।

पातालपुरी मठ में श्री राम परिवार

बीएचयू के इतिहासकार एवं विशाल भारत संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. राजीव श्रीगुरुजी ने कहा कि नवीन शोधों में श्रीराम के काल की सामाजिक परिस्थितियों, जनजातीय जीवन और उस समय के संघर्षों का उल्लेख मिलता है। उन्होंने कहा कि विश्व आज भी विभिन्न प्रकार के भय, हिंसा और असुरक्षा की चुनौतियों का सामना कर रहा है। ऐसे समय में भगवान श्रीराम के आदर्श, उनकी नीतियां और उनके जीवन से मिलने वाली शिक्षाएं आज भी उतनी ही प्रासंगिक हैं। उन्होंने कहा कि राम का इतिहास केवल धार्मिक आस्था का विषय नहीं, बल्कि विश्व मानवता के लिए प्रेरणा और सांस्कृतिक धरोहर भी है।

कार्यक्रम में महंत प्रभु रामदास जी महाराज, संत अभिराम दास जी, जगदीश्वर दास जी, मनोज भारद्वाज, सुदर्शन दास, उत्कर्ष शंकर पाण्डेय, अनुभव पाण्डेय, आचार्य द्वारिका प्रसाद खरवार, दक्षिता भारतवंशी, खुशी भारतवंशी, इली भारतवंशी सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु एवं गणमान्य लोग उपस्थित रहे। वक्ताओं ने आह्वान किया कि भगवान श्रीराम के आदर्शों को अपनाकर ही न्यायपूर्ण, सुरक्षित और भयमुक्त समाज की स्थापना संभव है।

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