रथयात्रा महोत्सव के समापन पर अस्सी स्थित श्री जगन्नाथ मंदिर में उमड़ा आस्था का सैलाब, विशाल भंडारे में हजारों श्रद्धालुओं ने ग्रहण किया महाप्रसाद
आषाढ़ शुक्ल द्वादशी पर निभाई गई सदियों पुरानी परंपरा, सुबह से देर शाम तक चलता रहा महाप्रसाद वितरण, ‘जय जगन्नाथ’ के जयघोष से गूंजा मंदिर परिसर
वाराणसी। धर्म और अध्यात्म की नगरी काशी में रथयात्रा महोत्सव के समापन के बाद रविवार को अस्सी स्थित प्राचीन श्री जगन्नाथ मंदिर में आस्था और श्रद्धा का अद्भुत संगम देखने को मिला। आषाढ़ शुक्ल द्वादशी के पावन अवसर पर ट्रस्ट श्री भगवान जगन्नाथ जी की ओर से आयोजित विशाल भंडारे में हजारों श्रद्धालुओं ने भगवान जगन्नाथ का महाप्रसाद ग्रहण किया। सुबह से ही मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लगनी शुरू हो गई थीं, जो देर शाम तक लगातार जारी रहीं। पूरा परिसर ‘जय जगन्नाथ’ और ‘हरि बोल’ के जयघोष से गुंजायमान रहा।

रथयात्रा महोत्सव के समापन के बाद भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा के मंदिर आगमन पर महाप्रसाद वितरण की परंपरा वर्षों से निभाई जाती रही है। इसी सनातन परंपरा को आगे बढ़ाते हुए इस वर्ष भी भव्य भंडारे का आयोजन किया गया। काशी के विभिन्न क्षेत्रों के अलावा चंदौली, मिर्जापुर, भदोही, जौनपुर और गाजीपुर सहित आसपास के जिलों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर पहुंचे। श्रद्धालुओं ने पहले भगवान के दर्शन किए और उसके बाद महाप्रसाद ग्रहण कर स्वयं को धन्य माना।
भंडारे की शुरुआत भगवान जगन्नाथ के विशेष पूजन, वैदिक मंत्रोच्चार और महाआरती के साथ हुई। मंदिर के पुजारी पंडित राधेश्याम पांडेय ने विधि-विधान से भगवान को पूरी, कोहड़े की पारंपरिक सब्जी और गाय के दूध से बनी खीर का भोग अर्पित किया। भोग लगने के बाद महाप्रसाद वितरण प्रारंभ हुआ, जो देर शाम तक निर्बाध रूप से चलता रहा। श्रद्धालु अनुशासित ढंग से कतारों में खड़े होकर अपनी बारी का इंतजार करते रहे और श्रद्धा भाव से भगवान का प्रसाद ग्रहण किया।

भंडारे के सफल संचालन के लिए ट्रस्ट के पदाधिकारियों और स्वयंसेवकों ने सुबह से ही मोर्चा संभाल लिया था। प्रसाद वितरण, पेयजल, बैठने की व्यवस्था, साफ-सफाई और श्रद्धालुओं के आवागमन की व्यवस्था को सुव्यवस्थित रखा गया। भीड़ अधिक होने के बावजूद कहीं भी अव्यवस्था देखने को नहीं मिली। मंदिर परिसर में स्वयंसेवक लगातार श्रद्धालुओं का मार्गदर्शन करते रहे, जिससे पूरा आयोजन शांतिपूर्ण और व्यवस्थित ढंग से संपन्न हुआ।
मंदिर परिसर को विशेष रूप से सजाया गया था। रंग-बिरंगी झालरों, फूलों और आकर्षक विद्युत सज्जा ने पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया। दर्शन के लिए पहुंचे श्रद्धालु भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा के दर्शन कर भाव-विभोर नजर आए। कई श्रद्धालुओं ने परिवार सहित भगवान के चरणों में सुख, समृद्धि और विश्व कल्याण की कामना की।

इस अवसर पर विधान परिषद सदस्य (एमएलसी) अन्नपूर्णा सिंह, भाजपा नेता अशोक पांडेय, ट्रस्ट के न्यासी उत्कर्ष श्रीवास्तव, ज्ञानेश्वर, विक्रांत सिंह, व्यास, आशु तिवारी, दिलीप मिश्रा सहित ट्रस्ट के अन्य पदाधिकारी और सदस्य मौजूद रहे। कार्यक्रम का संचालन ट्रस्ट के सचिव शैलेश त्रिपाठी ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन रामयश मिश्रा ने प्रस्तुत किया।
ट्रस्ट के सचिव शैलेश त्रिपाठी ने बताया कि रथयात्रा के बाद भंडारे का आयोजन मंदिर की प्राचीन परंपरा का हिस्सा है। उन्होंने कहा कि बीच के कुछ वर्षों में इसका स्वरूप सीमित हो गया था, लेकिन अब ट्रस्ट ने इसे पहले की तरह भव्य रूप में आयोजित करने का संकल्प लिया है। उन्होंने कहा कि भविष्य में भी प्रत्येक वर्ष रथयात्रा महोत्सव के समापन के बाद इसी प्रकार विशाल भंडारे का आयोजन किया जाएगा, ताकि अधिक से अधिक श्रद्धालु भगवान जगन्नाथ का महाप्रसाद ग्रहण कर सकें।

उन्होंने कहा कि भगवान जगन्नाथ का महाप्रसाद केवल भोजन नहीं, बल्कि श्रद्धा, सेवा और समरसता का प्रतीक है। इस आयोजन का उद्देश्य समाज के हर वर्ग को एक साथ जोड़ना और सनातन संस्कृति की प्राचीन परंपराओं को आगे बढ़ाना है। यही कारण है कि हर वर्ष श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ रही है।
भंडारे में शामिल श्रद्धालुओं ने ट्रस्ट की व्यवस्थाओं की सराहना करते हुए कहा कि पूरे आयोजन में अनुशासन, स्वच्छता और सेवा की भावना स्पष्ट रूप से दिखाई दी। श्रद्धालुओं ने भगवान जगन्नाथ से देश में सुख, शांति, समृद्धि और सभी के उत्तम स्वास्थ्य की कामना की।
काशी की धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं का यह आयोजन एक बार फिर इस बात का साक्षी बना कि भगवान जगन्नाथ के प्रति श्रद्धालुओं की आस्था आज भी उतनी ही प्रगाढ़ है। रथयात्रा महोत्सव के समापन के साथ आयोजित इस विशाल भंडारे ने न केवल हजारों श्रद्धालुओं को महाप्रसाद का लाभ कराया, बल्कि सनातन संस्कृति की सेवा, समरसता और लोककल्याण की भावना को भी सशक्त संदेश दिया। पूरे दिन मंदिर परिसर भक्तिमय वातावरण से सराबोर रहा और ‘जय जगन्नाथ’ के जयघोष के बीच आयोजन का समापन हुआ।
