रिपोर्ट – पवन आजाद 

वाराणसी। मध्यम वर्गीय परिवारों की जेब पर बोझ बन चुकी स्कूलों की महंगी किताबों के खिलाफ एक जागरूक पत्रकार ने आवाज उठाई है।स्थानीय पत्रकार निशांत चतुर्वेदी ने जिलाधिकारी सत्येंद्र कुमार से मुलाकात कर इस गंभीर समस्या पर ज्ञापन सौंपा।

निशांत चतुर्वेदी,जो पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी मेहनत और ईमानदारी के लिए जाने जाते हैं,ने कहा कि आजकल स्कूल किताबों को व्यापार का जरिया बना चुके हैं।किताबों के दाम सोने के आभूषणों जितने हो गए हैं,जिससे मध्यम वर्गीय परिवार कर्ज के बोझ तले दब रहे हैं।फिर भी बच्चों के भविष्य को देखते हुए अभिभावक मजबूरन महंगे दाम देकर किताबें खरीद रहे हैं।

तस्वीर में कैद दर्द

तस्वीर में निशांत चतुर्वेदी जिलाधिकारी सत्येंद्र कुमार के साथ खड़े नजर आ रहे हैं।यह कोई सेल्फी नहीं,बल्कि मध्यम वर्ग के उस दर्द का प्रतीक है जो आज हर घर में महसूस किया जा रहा है।निशांत ने इस तस्वीर के माध्यम से स्पष्ट किया कि वे अपनी व्यक्तिगत समस्या नहीं,बल्कि पूरे समाज की समस्या जिलाधिकारी के समक्ष रख रहे हैं।

निशांत चतुर्वेदी ने पत्रकारिता के अपने धर्म को निभाते हुए जिलाधिकारी से अपील की कि स्कूल प्रबंधनों द्वारा किताबों के नाम पर हो रही इस लूट पर तुरंत लगाम लगाई जाए।उन्होंने मांग की कि किताबों की कीमतों पर नियंत्रण लगाया जाए और अभिभावकों को राहत दी जाए।

जिलाधिकारी सत्येंद्र कुमार ने ज्ञापन प्राप्त कर मामले पर संज्ञान लेने का आश्वासन दिया।

यह घटना एक बार फिर साबित करती है कि सच्चा पत्रकार सिर्फ खबर नहीं दिखाता,बल्कि समाज के दर्द को सत्ता तक पहुंचाकर समाधान की राह भी बनाता है।निशांत चतुर्वेदी की इस पहल को समाज के विभिन्न वर्गों से सराहना मिल रही है।

अब देखना यह है कि प्रशासन इस मुद्दे पर कितनी तेजी से कार्रवाई करता है और मध्यम वर्ग के परिवारों को इस महंगाई के बोझ से कितनी राहत मिल पाती है।

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