रिपोर्ट – पवन आजाद
वाराणसी। काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) का बिड़ला ‘सी’ छात्रावास, जो अक्सर अपनी उथल-पुथल और विवादों के लिए चर्चा में रहता है, इस बार एक सकारात्मक और आध्यात्मिक बदलाव का केंद्र बना। छात्रावास के इतिहास में पहली बार छात्रों ने सामूहिक रूप से सुंदरकांड का संगीतमय पाठ आयोजित किया।
भक्तिमय हुआ परिसर
कार्यक्रम की शुरुआत हनुमान जी के विधिवत पूजन-अर्चन के साथ हुई। इसके बाद छात्रों ने सुर और ताल के साथ सुंदरकांड के दोहों और श्लोकों का पाठ किया। बजरंगबली की स्तुति और भजनों से पूरा छात्रावास परिसर भक्तिमय हो गया। कार्यक्रम के समापन पर सभी छात्रों के बीच प्रसाद का वितरण किया गया।

नकारात्मक धारणा बदलने की कोशिश
इस अवसर पर छात्रावास के वार्डन प्रो. सत्यप्रकाश पाल ने कहा कि बिड़ला ‘सी’ को अक्सर परिसर में अशांति या उपद्रव से जोड़कर देखा जाता रहा है। उन्होंने जोर देकर कहा:
“अब इस पुरानी धारणा को बदलने का समय आ गया है। हमारे छात्र न केवल मेधावी हैं, बल्कि वे सांस्कृतिक, अनुशासित और सामाजिक मूल्यों के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध भी हैं।”
मानसिक एकाग्रता और एकता पर जोर
कार्यक्रम के आयोजक छात्र शैलेश विश्वकर्मा, अभिषेक, उत्कर्ष पाठक, जुगेश , सुजीत पासवान, रवि, उदित नारायण सिंह, दीपक, लोकेश ने बताया कि ऐसे धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजनों का उद्देश्य छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाना है। उनके अनुसार, सुंदरकांड के पाठ से छात्रों में एकाग्रता बढ़ेगी और सामूहिक एकता की भावना को मजबूती मिलेगी।
