वाराणसी: चैत्र नवरात्र के चौथे दिन मां कुष्मांडा के दर्शन-पूजन के लिए धर्मनगरी काशी में श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा। आस्था के प्रमुख केंद्र दुर्गाकुंड मंदिर में तड़के भोर की आरती के बाद माता के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए। इसके साथ ही ‘जय माता दी’ और ‘हर-हर महादेव’ के जयघोष से पूरा मंदिर परिसर गूंज उठा और वातावरण पूरी तरह भक्तिमय हो गया।
सुबह से लेकर देर शाम तक लाखों की संख्या में महिला, पुरुष और बच्चों ने मां कुष्मांडा के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया। श्रद्धालु हाथों में पूजन सामग्री लिए कतारबद्ध होकर धूप, अगरबत्ती, नारियल, कपूर, चुनरी और अड़हुल के फूल अर्पित कर माता का पूजन करते नजर आए।
पंचगव्य स्नान के बाद हुआ भव्य स्वर्ण श्रृंगार
नवरात्र के चौथे दिन मां कुष्मांडा का विशेष विधि-विधान से पंचगव्य से स्नान कराया गया। इसके बाद माता का भव्य स्वर्ण श्रृंगार किया गया, जिसे देखने के लिए श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखा गया।
माता का श्रृंगार कौशलपती द्विवेदी और संजय दुबे द्वारा किया गया, जबकि संपूर्ण धार्मिक अनुष्ठान पशुपतिनाथ के नेतृत्व में संपन्न हुए। मंदिर के संरक्षक सोनू झा भी व्यवस्थाओं की निगरानी करते नजर आए। माता के दिव्य स्वरूप और तेजस्वी मुखमंडल को देखकर श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे।
एक किलोमीटर दूर तक लगी श्रद्धालुओं की कतार
भारी भीड़ को देखते हुए मंदिर परिसर से बाहर तक लंबी कतार लग गई, जो लगभग एक किलोमीटर तक फैली रही। भक्त धैर्यपूर्वक अपनी बारी का इंतजार करते हुए माता के दर्शन के लिए उत्साहित दिखाई दिए।
मंदिर को रंग-बिरंगे फूलों और विशेष सजावट से भव्य रूप दिया गया है, जिससे पूरा क्षेत्र भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर नजर आ रहा है।
सुरक्षा के कड़े इंतजाम, अधिकारी कर रहे निगरानी
श्रद्धालुओं की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए व्यापक इंतजाम किए गए हैं। मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्रों में भारी पुलिस बल तैनात किया गया है। भेलूपुर इंस्पेक्टर, दुर्गाकुंड चौकी इंचार्ज और एसीपी भेलूपुर लगातार क्षेत्र में भ्रमण कर सुरक्षा व्यवस्था का जायजा ले रहे हैं।
मोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक सामान पर पाबंदी
मंदिर प्रशासन द्वारा व्यवस्था बनाए रखने के लिए मंदिर परिसर में मोबाइल फोन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक सामान ले जाने पर प्रतिबंध लगाया गया है। श्रद्धालुओं से नियमों का पालन करने और प्रशासन का सहयोग करने की अपील की गई है।
नवरात्र के शेष दिनों में श्रद्धालुओं की संख्या और बढ़ने की संभावना को देखते हुए प्रशासन और मंदिर प्रबंधन पूरी तरह सतर्क और सक्रिय बना हुआ है।
