रिपोर्ट – पवन आजाद 

वाराणसी। धर्मनगरी और इसके आसपास के इलाकों में रसोई गैस (LPG) की किल्लत ने आम जनता की रसोई का बजट और सुकून दोनों बिगाड़ दिया है। उपभोक्ताओं का आरोप है कि गैस सिलेंडर की बुकिंग कराने के 10 से 12 दिन बाद भी डिलीवरी नहीं हो रही है। वहीं, डिजिटल धांधली के नए मामले सामने आने से उपभोक्ताओं में भारी रोष है।
मुख्य समस्याएं: सिस्टम में खेल और फर्जी मैसेज
उपभोक्ताओं ने गैस एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। शिकायतों के अनुसार:
फर्जी डिलीवरी अपडेट: सिलेंडर घर पहुंचे बिना ही उपभोक्ताओं के मोबाइल पर ‘सफलतापूर्वक डिलीवरी’ के मैसेज आ रहे हैं।
कोटे की हेराफेरी: मानक के अनुसार साल में 12 सब्सिडी वाले सिलेंडर मिलने चाहिए, लेकिन कई उपभोक्ताओं का आरोप है कि कम सिलेंडर लेने के बावजूद पोर्टल पर उनका वार्षिक कोटा ‘पूर्ण’ दिखाया जा रहा है।
बुकिंग में बाधा: मिस कॉल और ऑनलाइन पोर्टल के जरिए बुकिंग करने में तकनीकी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
बेनीपुर गैस एजेंसी के उपभोक्ताओं का बुरा हाल
सबसे खराब स्थिति बेनीपुर गैस एजेंसी से जुड़े उपभोक्ताओं की देखी जा रही है। एजेंसी पर उमड़ी भीड़ और आक्रोशित लोगों का कहना है कि हफ्ते भर चक्कर काटने के बाद भी खाली हाथ लौटना पड़ रहा है।
“हमने 10 दिन पहले बुकिंग की थी, लेकिन अभी तक सिलेंडर नहीं आया। मजबूरी में लकड़ी और कोयला खरीदकर खाना बनाना पड़ रहा है। यह न सिर्फ महंगा है बल्कि स्वास्थ्य के लिए भी हानिकारक है।”
सरिता, स्थानीय निवासी
विरोधाभासी दावे: कौन बोल रहा है सच?
आपूर्ति में देरी को लेकर एजेंसी प्रबंधन और ग्राउंड स्टाफ के बयानों में बड़ा अंतर देखने को मिल रहा है:
पक्ष ,दावा
गैस एजेंसी प्रबंधन | गैस की कोई कमी नहीं है, सभी को समय पर सिलेंडर दिया जा रहा है।
डिलीवरी कर्मी गोदाम से ही पर्याप्त आपूर्ति नहीं मिल रही, जिससे समय पर डिलीवरी संभव नहीं है।
प्रशासन से जांच की मांग
गैस संकट और कोटे में हो रही कथित हेराफेरी को देखते हुए उपभोक्ताओं ने जिला प्रशासन और पेट्रोलियम कंपनियों के उच्चाधिकारियों से हस्तक्षेप की मांग की है। लोगों का कहना है कि यदि वितरण व्यवस्था की पारदर्शिता की जांच नहीं की गई, तो कालाबाजारी को बढ़ावा मिलेगा और आम आदमी का चूल्हा जलना मुश्किल हो जाएगा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *