Varanasi News: साइबर क्राइम एवं डिजिटल फ्राड का मामला लगातार तेजी से बढ़ रहा है, वाराणसी में एक ऐसा मामला सामने आया है जिसमें एक रिटायर्ड प्रधानाचार्य से डिजिटल अरेस्ट कर 50 लाख रुपए की मांग की गई। व्यक्ति के पास पैसा ना होने पर लोन कर कर मांगा गया। बैंक से लोन करा कर आरटीजीएस करने जा रहे थे कि बुजुर्ग का डिजिटल अरेस्ट फ्रॉड से बैंक कर्मचारियों की सूझबूझ से बचाया गया। मामले की जानकारी होने पर पीड़ित एवं बैंक कर्मचारी साइबर सेल पर मुकदमा पंजीकृत करने पहुंचे। साइबर फ्रॉड अपराधी 3 लाख रुपया फर्जी अधिकारी बन पहले ही लें चुके है.

लंका क्षेत्र के बालाजी नगर कॉलोनी निवासी रिटायर्ड प्रधानाचार्य शंकर सिंह यादव ने बताया कि 9 मार्च को उनके मोबाइल पर महाराष्ट्र एक व्यक्ति द्वारा फोन किया गया जो पुलिस हैडक्वाटर महाराष्ट्र से बताया. फोन करने वाले व्यक्ति ने बताया कि आपके आधार एवं पैन कार्ड से एक मोबाइल लिया गया. एक बैंक अकाउंट खोला गया है जिसका एटीएम कार्ड भी जारी हुआ है. मोबाइल से सूचनाएं विदेश में भेजी गई है. आपके ऊपर गंभीर धारा में केस लगा है. साइबर अपराधियों ने झांसे में लेने के व्हाट्सएप पर एटीएम भी भेजा था.

शंकर सिंह यादव ने बताया कि वह मूल निवासी गाजीपुर के रहने वाले हैं. 9 मार्च को फिर साइबर अपराधियों का फोन आया. जिस पर पुलिस कमिश्नर से बात करने की बात कही गई वीडियो कॉलिंग के माध्यम से एक व्यक्ति से बात हुई जो वह पुलिस के ड्रेस में बैठा हुआ था पुलिस कमिश्नर जैसा लग रहा था. बात करते समय व्यक्ति ने कहा कि खिड़की एवं गेट बंद कर लीजिए और पूरे मामले को समझने के लिए पुणे आ जाइए और 2 घंटे का समय दिया गया.

पीड़ित शंकर सिंह यादव ने बताया कि मेरे द्वारा दूसरा रास्ता पूछे जाने पर उन्होंने मेरे पूरे बैंक अकाउंट का डिटेल एवं फिक्स्ड डिपॉजिट के बारे में जानकारी ली. उसके बाद उन्होंने मुझे बनारस आने के लिए कहा क्योंकि सारा डिटेल मेरे पास बनारस में ही था. इसके बाद उन्होंने अगले दिन सुबह 10 तारीख को 10:00 बजे तैयार रहने के लिए कहा, अगले दिन सुबह मेरे दो बैंक अकाउंट 42000 और 48000 एवं एक इनकम टैक्स के तहत एक लाख पैतालीस हजार फिक्स डिपॉजिट था उसको तोड़वा कर पैसा भेजने के लिए कहा गया. यह पैसा रिजर्व बैंक के खाते में भेजना है, जहाँ आपका पैसा वेरिफाई होगा कि आपके खाते से फ्राड हुआ है कि नहीं. इसमें 10 तारीख को पैसा भेज दिया गया .

इसके बाद साइबर अपराधियों ने 50 लाख रुपए की मांग की साइबर अपराधियों का कहना था कि वह अपने दोस्त रिश्तेदारों से पैसा लेकर भेजें जिससे इस केस से आपको बरी करा दिया जाएगा. लोगों ने विश्वास दिलाया कि पैसा देने के बाद यह कैसे खत्म हो जाएगा इसके बाद लोन करने के लिए लंका के पंजाब नेशनल बैंक पहुंचा तो वहां पर बैंक मैनेजर से मिलने आए थे. 60 प्रतिशत कम करने की बात कहीं, 20 लाख रुपए की डिमांड की थी लेकिन मेरे पास कोई ऐसा सुविधा नहीं था जिसके कारण मुझे 20 लाख रुपए लोन मिल सके.

साइबर अपराधियों ने बताया कि 10 लख रुपए पर्सनल लोन आपको मिल सकते हैं लेकिन यह बात तुम अपने बेटे को मत बताना कि तुम्हें पैसे किस लिए चाहिए. उन्होंने बताया कि आप बताइएगा की दोस्त की बेटी की शादी है देना अर्जेंट है नहीं तो बैंक कर्मचारी देरी करते हैं. शंकर सिंह यादव ने बताया कि 13 मार्च शाम मेरा लोन अप्रूव हो गया. जिसके कारण चला गया. शनिवार रविवार को ज्यादा बात नहीं हुई थी.

मैनेजर में निभाई बड़ी भूमिका

शंकर सिंह यादव ने बताया कि मेरा लोन पास हो गया था, आरटीजीएस करने के लिए पैसा जमा कर दिया था. बैंक मैनेजर आनंद प्रकाश ने मुझे देखते हुए मेरे पास आए और उससे पूछा कि इतने पैसे की क्यों जरूरत पड़ गई है, जब यह आंख में आँख डालकर मुझसे बात करने लगे तो मेरे अंदर कॉन्फिडेंस जागा. इसके बाद अपने छोटे बेटे से बात किया तो उसने बताया कि यह सब सारी बातें झूठी है, यह सारी बातें पहले आपको शेयर करनी चाहिए थी. लेकिन बैंक मैनेजर साहब ने अच्छा किया कि जो आपको अच्छा काम किया. इस सारी बातों को लेकर लंका थाने साइबर सेल पर कंप्लेंट किया हूं.

पंजाब नेशनल बैंक लंका ब्रांच के डीवाई मैनेजर आनंद प्रकाश सिंह ने बताया कि शंकर सिंह यादव हमारे ब्रांच के अच्छे ग्राहक हैं इनके केवाईसी से इनका आए अच्छा लगा था लेकिन या जब लोन लेने आए तो यह घबरा रहे थे और बातें पूरी तरह नहीं बता रहे थे. इसके पहले यह बैंक में कुछ पैसे ट्रांजैक्शन कर दिए थे जल्दी-जल्दी में जिसके कारण हम लोगों पर उनके ऊपर शक हो गया था. इस बात का यकीन आज तब हुआ जब यह लोन का पैसा अपने खाते से दूसरे खाते में पूरा ट्रांजैक्शन करने लगे थे. इसलिए कर जब इनसे बात की गई तो किसी प्रकार की समस्या है तो आप शेयर कर सकते हैं तब भी यह बातें अपनी नहीं बताएं. लोन के समय परिजनों का भी नाम नंबर लिया जाता है जब उनके पुत्र से बात करने की कोशिश की गई तो संपर्क नहीं हो सका. 10 लाख रुपया आरटीजीएस ट्रांजैक्शन करने के लिए पैसे आ चुके थे यह जल्दी बाजी कर रहे थे कि जल्दी से ट्रांजैक्शन हो जाए. शक होने पर हम लोगों ने ट्रांजैक्शन न करके उनसे काउंसलिंग करने में जुट गए.

आनंद प्रकाश सिंह ने बताया कि हमारे सीनियर अधिकारी संध्या सिंह ने हम लोगों को बताया कि या डिजिटल अरेस्ट का मामला हो सकता है. फिर हम सभी शाखा के सदस्य इस दिशा में हम लोग देखने लगे और उनकी काउंसलिंग में जुड़ गए. कुछ देर बात करने के बाद जब यह हम लोगों पर विश्वास किया तब जा कर सारी बातें धीरे-धीरे हम लोगों से शेयर किया. फिर इनके आरटीजीएस को रोका गया. इनके अंदर इतना हिम्मत नहीं था कि इस पूरे मामले को लेकर पुलिस थाना में रिपोर्ट लिखा सकें. हम लोग इनको लेकर लंका थाने आए हैं जहां पर साइबर अपराध के मामले में रिपोर्ट लिखाया जा रहा है.

लंका थाना प्रभारी राजकुमार शर्मा ने बताया कि पीड़ित का तहरीर ले लिया गया है, मुकदमा पंजीकृत की जा रही है.

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