श्रीरामानन्द विश्वहित कारिणी परिषद गुरुकुल में वेद मंत्रों के उच्चारण के साथ शिक्षकों को चंदन लगाकर एवं वस्त्र प्रदान कर किया गया सम्मान

वाराणसी। श्रीरामानन्द विश्वहित कारिणी परिषद की ओर से प्राचीन श्रीराम मंदिर, गुरुधाम स्थित स्वामी वेदांती वेद विद्यापीठ गुरुकुलम् परिसर में शिक्षक दिवस समारोह का आयोजन हर्षोल्लास और गरिमापूर्ण वातावरण में किया गया। कार्यक्रम का आयोजन संस्था के संस्थापक श्रीमद् जगद्गुरु रामानन्दाचार्य स्वामी डॉ. रामकमलाचार्य वेदांती जी महाराज की प्रेरणा से किया गया।

समारोह की अध्यक्षता काशी हिन्दू विश्वविद्यालय, वाराणसी के पूर्व वेद विभागाध्यक्ष प्रो. हृदयरंजन शर्मा ने की। कार्यक्रम में संस्था के सचिव पं. रामभरत शास्त्री, विद्यालय के प्रधानाचार्य श्री अर्पित जायसवाल, मंच संचालक दिव्यांशु, गुरुकुल के अध्यापक ज्ञानेंद्र, अविनाश एवं उदित, वार्डन रामबन्धु सहित गुरुकुल के समस्त विद्यार्थी उपस्थित रहे।

शिक्षक दिवस

कार्यक्रम के दौरान गुरुकुल के सभी अध्यापकों को विशेष रूप से सम्मानित किया गया। वैदिक परंपरा के अनुरूप शिक्षकों को चंदन लगाकर, वस्त्र प्रदान किए गए और वेद मंत्रों के उच्चारण के साथ उनका अभिनंदन किया गया। इस दौरान गुरुकुल परिसर में श्रद्धा और सम्मान का वातावरण देखने को मिला।

संस्था की ओर से सभी विद्यार्थियों को छोटी दुपट्टा प्रदान कर उनका उत्साहवर्धन किया गया। विद्यार्थियों ने भी अपने गुरुजनों के प्रति श्रद्धा और सम्मान व्यक्त किया।

श्रीरामानन्द विश्वहित कारिणी परिषद

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे प्रो. हृदयरंजन शर्मा ने शिक्षक दिवस के महत्व पर विद्यार्थियों को प्रेरणादायक संबोधन दिया। उन्होंने विद्यार्थियों को शिक्षा के साथ संस्कार और अनुशासन के मार्ग पर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि शिक्षा केवल पुस्तकीय ज्ञान तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके माध्यम से विद्यार्थियों के व्यक्तित्व और चरित्र का निर्माण भी होता है।

 

संस्था के सचिव पं. रामभरत शास्त्री ने भारतीय संस्कृति में गुरु-शिष्य परंपरा के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि भारतीय परंपरा में गुरु को केवल शिक्षक नहीं, बल्कि ज्ञान, संस्कार और जीवन-दर्शन का मार्गदर्शक माना गया है। गुरु अपने शिष्यों को शिक्षा देने के साथ उन्हें जीवन के सही मूल्यों से भी परिचित कराते हैं।

श्रीरामानन्द विश्वहित कारिणी परिषद

उन्होंने विद्यार्थियों से गुरुजनों के प्रति श्रद्धा, विनम्रता और सम्मान की भावना बनाए रखने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि गुरुकुल परंपरा भारतीय संस्कृति की महत्वपूर्ण धरोहर है और इसे आगे बढ़ाने में विद्यार्थियों की भूमिका महत्वपूर्ण है।

कार्यक्रम के अंत में विद्यालय के प्रधानाचार्य श्री अर्पित जायसवाल ने उपस्थित अतिथियों, संस्था के पदाधिकारियों, सभी अध्यापकों और विद्यार्थियों के प्रति आभार एवं धन्यवाद व्यक्त किया।

कार्यक्रम का समापन गुरुजनों और विद्यार्थियों के बीच आत्मीय एवं प्रेरणादायक वातावरण में हुआ। समारोह के माध्यम से विद्यार्थियों ने अपने शिक्षकों के प्रति सम्मान और कृतज्ञता व्यक्त की। गुरुकुल परिसर में आयोजित इस कार्यक्रम ने भारतीय गुरु-शिष्य परंपरा और शिक्षा के साथ संस्कारों के महत्व को भी रेखांकित किया।

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