रिपोर्ट – पवन आजाद
वाराणसी। सीर गोवर्धनपुर स्थित संत शिरोमणि गुरु रविदास की जन्मस्थली पर उनके जन्मोत्सव की भव्य तैयारियाँ अब अंतिम चरण में हैं। पूरा क्षेत्र देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं और सेवादारों की चहल-पहल से गुलजार हो उठा है। इसी कड़ी में, पिछले 23 वर्षों से निरंतर चल रही विशेष ट्रेन “बेगमपुरा एक्सप्रेस” एक बार फिर श्रद्धालुओं के जत्थे को लेकर काशी के लिए रवाना हो चुकी है।
23 वर्षों की अटूट परंपरा और ‘बेगमपुरा’ का संकल्प
मंदिर प्रबंधन के अनुसार, इस विशेष ट्रेन की शुरुआत वर्ष 2002 में श्रद्धालुओं के आपसी सहयोग और दान से की गई थी। संत रविदास द्वारा कल्पित समतामूलक समाज “बेगमपुरा” के नाम पर इस ट्रेन का नाम रखा गया है। कोरोना काल के एक वर्ष को छोड़कर यह परंपरा पिछले दो दशकों से अनवरत जारी है।
ट्रेन संचालन के मुख्य बिंदु:
लागत इस ट्रेन के संचालन पर प्रतिवर्ष लगभग 60 लाख रुपये से अधिक का खर्च आता है।
सुविधाएं: यात्रियों के आने-जाने के साथ-साथ उनके भोजन और नाश्ते की पूर्ण व्यवस्था इसमें शामिल रहती है।
विशेष दर्जा: यह ट्रेन छह दिनों तक पूर्णतः रैदासिया समाज के प्रबंधन में रहती है। जालंधर से वाराणसी पहुँचने के बाद, श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए यह दो दिनों तक स्टेशन पर ही खड़ी रहती है।
निशुल्क ट्रेन की मांग और राजनीतिक संदर्भ
मंदिर ट्रस्टी निरंजन चीमा और प्रबंधन ने सरकार से मांग की है कि जयंती समारोह के लिए प्रतिवर्ष एक निशुल्क विशेष ट्रेन चलाई जाए, ताकि निर्धन श्रद्धालु भी सुगमता से दर्शन कर सकें। उल्लेखनीय है कि वर्ष 2022 के चुनावी वर्ष में भाजपा सरकार द्वारा पंजाब से वाराणसी के लिए निशुल्क ट्रेन की सुविधा दी गई थी।
संत निरंजन दास का भव्य आगमन
रैदासिया धर्म संगठन के प्रमुख संत निरंजन दास अपने एनआरआइ भक्तों और संतों के साथ गुरुवार को जालंधर से रवाना हुए। फूलों से सजी यह विशेष ट्रेन 30 जनवरी को काशी पहुँचेगी और 2 फरवरी को पुनः पंजाब के लिए प्रस्थान करेगी। वाराणसी पहुँचने पर बैंड-बाजे, पुष्प वर्षा और धार्मिक जयघोष के साथ उनका भव्य स्वागत किया जाएगा।
सीर गोवर्धनपुर में उत्सव का माहौल
जन्मोत्सव को लेकर सीर गोवर्धनपुर में दीपावली जैसा माहौल है।
सजावट मंदिर परिसर को रंगीन लाइटों, फव्वारों और आकर्षक सजावट से भव्य रूप दिया गया है।
व्यवस्था श्रद्धालुओं के लिए लंगर और रिहायशी पंडालों की व्यवस्था की गई है।

बाजार क्षेत्र में अस्थायी दुकानें, झूले और बाजार सज गए हैं, जो उत्सव की रौनक बढ़ा रहे हैं।
सुरक्षा एवं यातायात: लाखों की संभावित भीड़ को देखते हुए प्रशासन और मंदिर प्रबंधन ने सुरक्षा और यातायात के कड़े इंतजाम किए हैं, ताकि श्रद्धालु शांतिपूर्वक दर्शन-पूजन कर सकें।
