रिपोर्ट – पवन आजाद 

वाराणसी। धार्मिक नगरी काशी एक बार फिर भारतीय संस्कृति और सनातन परंपरा की वैश्विक स्वीकार्यता की साक्षी बनी, जब रूस (रसिया) के रहने वाले एक विदेशी जोड़े ने दशाश्वमेध घाट स्थित नलवा वीर बाबा मंदिर में पूरे वैदिक विधि-विधान और हिंदू रीति-रिवाज के अनुसार विवाह रचाया।

 

रूस निवासी मरीन (उम्र लगभग 38 वर्ष) और कॉन्स्टेंटिन मरीना (उम्र लगभग 48 वर्ष) ने मंत्रोच्चार, वैदिक मंगलाचरण और भगवान को साक्षी मानकर सात फेरे लिए। विवाह की सभी पारंपरिक रस्में जैसे जयमाला, सिंदूरदान, फेरे और आशीर्वाद विधिवत रूप से संपन्न कराए गए। इस दौरान मंदिर परिसर में मौजूद महिलाओं ने मंगल गीत गाए और काशीवासियों ने कन्यादान कर इस पावन अवसर को और भी विशेष बना दिया।

विदेशी दूल्हा-दुल्हन भारतीय परिधानों में पूरी तरह पारंपरिक अंदाज में नजर आए। दुल्हन मरीन ने लाल साड़ी पहन रखी थी, जबकि दूल्हा कॉन्स्टेंटिन धोती-कुर्ता में दिखाई दिए। उन्हें देखकर ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो वर्षों से भारतीय संस्कृति से जुड़े हों।

बातचीत के दौरान दंपति ने बताया कि उन्हें भारतीय सभ्यता, संस्कृति और यहां की विविधता अत्यंत पसंद है। उन्होंने कहा कि काशी की आध्यात्मिक ऊर्जा और परंपराओं ने उन्हें इतना प्रभावित किया कि उन्होंने यहीं आकर हिंदू रीति-रिवाज से विवाह करने का निर्णय लिया।

उन्होंने बताया कि दोनों की मुलाकात करीब 11 वर्ष पूर्व हुई थी और 5 वर्ष पहले उन्होंने आपसी सहमति से विवाह भी कर लिया था, लेकिन भगवान शिव और माता पार्वती के दिव्य विवाह से प्रेरित होकर उन्होंने यह निश्चय किया कि वे काशी आकर विधिवत सनातन परंपरा के अनुसार पुनः विवाह संस्कार करेंगे।

इसी संकल्प के साथ वे दशाश्वमेध घाट स्थित नलवा वीर बाबा मंदिर पहुंचे, जहां विद्वान पंडितों द्वारा वैदिक मंत्रोच्चार के बीच विवाह संपन्न कराया गया। विवाह के बाद मंदिर परिसर “हर-हर महादेव” और “जय मां पार्वती” के जयघोष से गूंज उठा।

इस ऐतिहासिक और भावनात्मक क्षण के साक्षी बनने के लिए बड़ी संख्या में स्थानीय लोग, श्रद्धालु और पर्यटक मौजूद रहे। कई लोगों ने इस अनूठे विवाह को अपने कैमरों में कैद किया और विदेशी जोड़े को आशीर्वाद दिया।

यह विवाह न केवल दो दिलों का मिलन बना, बल्कि भारतीय संस्कृति और परंपराओं की वैश्विक स्वीकार्यता का भी सुंदर उदाहरण प्रस्तुत कर गया। काशी एक बार फिर साबित हुई कि वह केवल आस्था की नहीं, बल्कि विश्व को जोड़ने वाली संस्कृति की भी राजधानी है।

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