रिपोर्ट – गोपी गुप्ता
वाराणसी। सरयू पारीण ब्राह्मण परिषद के तत्वावधान में इस वर्ष भी अक्षय तृतीया एवं भगवान परशुराम जयंती के पावन अवसर पर रविवार, 19 अप्रैल 2026 को गोयनका संस्कृत महाविद्यालय, अस्सी स्थित सभागार एवं सिद्धेश्वर महादेव प्रांगण में भव्य धार्मिक आयोजन संपन्न हुआ। कार्यक्रम में वाराणसी सहित प्रदेश के विभिन्न जिलों एवं अन्य प्रांतों से आए 100 से अधिक बटुकों का विधि-विधान से यज्ञोपवीत (उपनयन) संस्कार कराया गया।

कार्यक्रम का शुभारंभ काशी के प्रख्यात वैदिक एवं कर्मकांडी विद्वानों द्वारा पंचांग पूजन से हुआ। मुख्य आचार्य पंडित पारस नाथ पांडेय के नेतृत्व में 15 विद्वानों की टीम ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच उपनयन संस्कार की सभी धार्मिक विधियां संपन्न कराईं। कार्यक्रम में मुख्य यजमान की भूमिका डॉ. नागेंद्र द्विवेदी ने निभाई।
गायत्री दीक्षा के उपरांत आयोजित समावर्तन संस्कार में परिषद अध्यक्ष पंडित पारस नाथ उपाध्याय ने बटुकों को द्विजत्व धर्म के पालन, सदाचार और सनातन परंपराओं से जुड़े रहने का संदेश दिया। उन्होंने सभी को भगवान परशुराम जयंती की शुभकामनाएं देते हुए उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
इस अवसर पर परिषद के संरक्षक सतीश चंद्र मिश्रा ने अतिथियों का स्वागत करते हुए बटुकों से अपनी संस्कृति और परंपराओं को जीवन में अपनाने का आह्वान किया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में पूर्व सांसद डॉ. राजेश मिश्रा एवं महापौर अशोक तिवारी उपस्थित रहे, जिन्होंने परिषद के प्रयासों की सराहना करते हुए ऐसे आयोजनों को समाज के लिए प्रेरणादायक बताया।
समावर्तन संस्कार के दौरान संरक्षक डॉ. गिरीश चंद्र तिवारी, कुल पीठाधीश्वर सचिन तथा महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. हर्षवर्धन मिश्र सहित अन्य गणमान्य लोगों ने बटुकों को आशीर्वाद प्रदान किया।
कार्यक्रम का संचालन परिषद के मंत्री मिलन चतुर्वेदी ने किया। आयोजन में नरेंद्र त्रिपाठी, शिवदत्त द्विवेदी, रितेश तिवारी, रमाकांत त्रिपाठी, सिद्धार्थ पांडेय, वाचस्पति मिश्रा, पंकज पांडेय, प्रकाश दूबे, कलाधर दुबे, प्रकाश पांडेय, मुनि जी तिवारी, वेद मिश्रा, हरिकेश यादव, मुक्तेश्वर द्विवेदी, माया पांडेय (अध्यक्ष महिला प्रकोष्ठ), शीतला प्रसाद पांडेय, केदार तिवारी सहित अनेक पदाधिकारी, सदस्य एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के समापन पर परिषद की ओर से लगभग 600 श्रद्धालुओं के लिए महाप्रसाद एवं भंडारे की सुव्यवस्थित व्यवस्था की गई, जिसमें सभी ने श्रद्धापूर्वक प्रसाद ग्रहण किया।
