वाराणसी। जौनपुर में दो पत्रकारों की हत्या के मामलों में न्याय की मांग को लेकर पीड़ित परिवारों ने वाराणसी पहुंचकर पुलिस महानिरीक्षक (IG) वैभव कृष्ण से मुलाकात की। इस दौरान परिजनों ने विवेचना में अनियमितताओं और साजिश के आरोप लगाते हुए दोनों मामलों की सीबीआई जांच की मांग की। आईजी ने पूरे प्रकरण की समीक्षा कर आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।

अमिताभ नारायण मिश्र हत्याकांड : बयान बदलने और साक्ष्य गायब करने का आरोप

मृतक पत्रकार अमिताभ नारायण मिश्र की पत्नी रूबी मिश्रा ने आरोप लगाया कि उनके पति की हत्या परिवार के ही एक सदस्य ने साजिश के तहत कराई है। उन्होंने कहा कि जांच के दौरान उनके बयान बदले गए और तत्कालीन जांच अधिकारियों की मिलीभगत से चार्जशीट से आरोपियों के नाम हटवाए गए। रूबी मिश्रा ने सरकारी अधिवक्ता की भूमिका पर भी सवाल खड़े करते हुए कहा कि न तो हत्या में प्रयुक्त हथियार बरामद हुआ और न ही वाहन, इसके बावजूद एकतरफा कार्रवाई कर मामला कमजोर किया गया।

बताया गया कि 18 जनवरी 2024 को अमिताभ नारायण मिश्र को गोली मारी गई थी और 20 जनवरी 2024 को वाराणसी के बीएचयू ट्रॉमा सेंटर में इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।

आशुतोष श्रीवास्तव हत्याकांड : भूमाफिया और अपराधियों पर हत्या का आरोप

जौनपुर के शाहगंज क्षेत्र के सबरहत गांव निवासी संतोष कुमार श्रीवास्तव ने अपने भाई, पत्रकार आशुतोष श्रीवास्तव की हत्या को लेकर न्याय की गुहार लगाई। उन्होंने बताया कि 13 मई 2024 को बीच चौराहे पर आशुतोष की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। आशुतोष सुदर्शन न्यूज़ चैनल से जुड़े थे और सामाजिक कार्यों में सक्रिय थे।

संतोष कुमार ने आरोप लगाया कि उनके भाई ग्राम समाज और सरकारी जमीनों को अवैध कब्जे से मुक्त कराने के लिए लगातार संघर्ष कर रहे थे, जिससे नाराज़ भूमाफिया और अपराधी तत्व उन्हें धमकियां दे रहे थे। हत्या से पहले भी कई बार जान से मारने की धमकियां मिली थीं, लेकिन पुलिस ने गंभीरता नहीं दिखाई।

मुख्य आरोपी को बचाने की साजिश का आरोप

पीड़ित परिवार ने आरोप लगाया कि इस मामले में मुख्य आरोपी नसल जमाल का नाम विवेचना से हटाने की साजिश की जा रही है और 2003 के पुराने विवाद का हवाला देकर केस को कमजोर किया जा रहा है।

CBI जांच की उठी मांग

दोनों पीड़ित परिवारों ने आईजी वैभव कृष्ण से मुलाकात कर निष्पक्ष जांच और सीबीआई जांच की मांग दोहराई। परिजनों का कहना है कि स्थानीय स्तर पर जांच प्रभावित हो रही है, इसलिए केंद्रीय एजेंसी से जांच ही उन्हें न्याय दिला सकती है।

आईजी वैभव कृष्ण ने परिजनों को आश्वासन दिया कि पूरे मामले की गंभीरता से समीक्षा कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।

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