वाराणसी बूंदी परकोटा-गायघाट और शिवाला-तुलसी-जानकी घाट का संपर्क टूटा, दशाश्वमेध पर आरती स्थल तक पहुंचा पानी
वाराणसी। पहाड़ी क्षेत्रों में हो रही बारिश और लगातार दो दिनों से वाराणसी में जारी वर्षा का असर अब गंगा के जलस्तर पर साफ दिखाई देने लगा है। गंगा का पानी तेजी से बढ़ रहा है। शुक्रवार को महज 12 घंटे में जलस्तर में 48 सेंटीमीटर की वृद्धि दर्ज की गई। जलस्तर बढ़ने के कारण शहर के कई प्रमुख घाटों के संपर्क मार्ग पानी में डूब गए हैं। वहीं दशाश्वमेध घाट पर गंगा का पानी आरती स्थल तक पहुंच गया है। मणिकर्णिका घाट पर भी बढ़ते जलस्तर को देखते हुए शवदाह स्थल को निचले हिस्से से हटाकर ऊंचाई वाले स्थान पर स्थानांतरित किया गया है।

गुरुवार को गंगा का जलस्तर 62.66 मीटर दर्ज किया गया था। शुक्रवार को इसमें 48 सेंटीमीटर की बढ़ोतरी के बाद जलस्तर 63.14 मीटर तक पहुंच गया। जलस्तर में लगातार हो रही वृद्धि के कारण घाटों पर प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों की निगरानी बढ़ा दी गई है। घाटों की सीढ़ियां तेजी से पानी में समा रही हैं और निचले हिस्सों में आवागमन प्रभावित होने लगा है।
गंगा के बढ़ते पानी का असर सबसे पहले निचले घाटों और उनके संपर्क मार्गों पर दिखाई दे रहा है। बूंदी परकोटा से गायघाट तथा शिवाला से तुलसी और जानकी घाट के बीच संपर्क मार्ग पानी में डूब गया है। इसके चलते इन मार्गों से होने वाला आवागमन प्रभावित हुआ है।
घाटों पर पहुंचने वाले स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। जलस्तर बढ़ने के साथ घाटों के निचले हिस्से लगातार जलमग्न होते जा रहे हैं। प्रशासन की ओर से लोगों से सावधानी बरतने और नदी के पानी के नजदीक जाने से बचने की अपील की गई है।
गंगा का बढ़ता जलस्तर अब दशाश्वमेध घाट पर होने वाली विश्व प्रसिद्ध गंगा आरती के स्थल तक पहुंच गया है। शुक्रवार को पानी आरती स्थल के आसपास पहुंचने के बाद व्यवस्था में बदलाव की तैयारी शुरू कर दी गई। जलस्तर में वृद्धि जारी रहने पर आरती स्थल को ऊंचाई वाले स्थान पर स्थानांतरित किया जा सकता है।
गंगा आरती से जुड़े लोगों और प्रशासन की ओर से घाट की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। श्रद्धालुओं की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए आवश्यकता के अनुसार वैकल्पिक व्यवस्था किए जाने की तैयारी है।
मणिकर्णिका घाट पर शवदाह स्थल बदला
गंगा का पानी बढ़ने से मणिकर्णिका घाट पर अंतिम संस्कार की व्यवस्था भी प्रभावित होने लगी है। शुक्रवार शाम तक निचले हिस्से में स्थित शवदाह स्थल को ऊंचाई वाले स्थान पर स्थानांतरित कर दिया गया। यदि गंगा का जलस्तर इसी गति से बढ़ता रहा तो शवदाह स्थल को आवश्यकता के अनुसार और ऊंचाई पर ले जाया जा सकता है।
अंतिम संस्कार की व्यवस्था प्रभावित न हो, इसके लिए घाट पर लगातार निगरानी की जा रही है। बढ़ते जलस्तर को देखते हुए घाट से जुड़े लोगों को भी सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं।
घाटों पर सुरक्षा बढ़ाई गई
गंगा के जलस्तर में तेजी से हो रही वृद्धि को देखते हुए प्रमुख घाटों पर सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई है। जल पुलिस और एनडीआरएफ की टीमें स्थिति पर नजर रख रही हैं। घाटों पर आने वाले लोगों को नदी में उतरने से रोकने के साथ ही निचले हिस्सों में विशेष निगरानी की जा रही है।
प्रशासन का कहना है कि जलस्तर की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। पानी बढ़ने की स्थिति में निचले घाटों पर आवाजाही को नियंत्रित करने और जरूरत के अनुसार अन्य व्यवस्थाएं लागू की जाएंगी।
पहाड़ी क्षेत्रों की बारिश से बढ़ी गंगा की आवक
गंगा के जलस्तर में तेजी से बढ़ोतरी के पीछे पहाड़ी क्षेत्रों में हो रही बारिश को प्रमुख कारण माना जा रहा है। पहाड़ी इलाकों से गंगा में पानी की आवक बढ़ने के साथ स्थानीय स्तर पर हो रही बारिश ने भी स्थिति को प्रभावित किया है।
जलस्तर में लगातार वृद्धि से गंगा किनारे रहने वाले लोगों की चिंता बढ़ गई है। प्रशासन की ओर से तटवर्ती क्षेत्रों और घाटों की स्थिति पर नजर रखी जा रही है। आने वाले घंटों में यदि जलस्तर में वृद्धि जारी रहती है तो अन्य निचले घाट भी प्रभावित हो सकते हैं। 
फिलहाल प्रशासन की प्राथमिकता घाटों पर श्रद्धालुओं, पर्यटकों और स्थानीय लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। साथ ही गंगा आरती और अंतिम संस्कार जैसी धार्मिक गतिविधियों के लिए सुरक्षित और वैकल्पिक व्यवस्था बनाए रखने की तैयारी की जा रही है।
