रिपोर्ट – पवन आजाद
वाराणसी। काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) के छात्र अधिष्ठाता कार्यालय (DSW) पर आज उस समय भारी गहमागहमी देखने को मिली, जब दर्जनों की संख्या में छात्र विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के नए नियमों के विरोध में उतर आए। हाथों में तख्तियां और बैनर लिए छात्रों ने इसे “काला कानून” करार देते हुए जमकर नारेबाजी की।
प्रमुख बिंदु: छात्रों की चिंताएं और मांगें
विभाजनकारी नीति का आरोप: प्रदर्शनकारी छात्रों का तर्क है कि यूजीसी द्वारा लाया गया यह नया प्रावधान शिक्षा के ढांचे को मजबूत करने के बजाय समाज को जाति और वर्ग के आधार पर बांटने का काम करेगा।
समान अवसर पर प्रहार: छात्रों ने आरोप लगाया कि इस कानून से ‘सामाजिक समरसता’ की भावना खत्म होगी और हाशिए पर मौजूद वर्गों के लिए समान अवसरों के द्वार बंद हो सकते हैं।
राष्ट्रव्यापी आंदोलन की चेतावनी: प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट किया कि यदि यूजीसी ने इस फैसले को वापस नहीं लिया, तो बीएचयू से शुरू हुई यह चिंगारी देश भर के विश्वविद्यालयों में आंदोलन का रूप ले लेगी।
प्रशासनिक हस्तक्षेप और शांतिपूर्ण प्रदर्शन
विरोध की तीव्रता को देखते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन और सुरक्षा बल तत्काल मौके पर पहुंचे। हालांकि माहौल में तनाव था, लेकिन छात्रों ने शांतिपूर्ण तरीके से अपना पक्ष रखा। प्रशासन ने छात्रों का ज्ञापन स्वीकार करते हुए आश्वासन दिया है कि उनकी मांगों को यूजीसी और संबंधित मंत्रालय के उच्च अधिकारियों तक पहुंचाया जाएगा।
“शिक्षा का उद्देश्य समाज को जोड़ना और सबको साथ लेकर चलना है। यूजीसी का यह फैसला सीधे तौर पर छात्रों के भविष्य और सामाजिक एकता पर आघात है।” — प्रदर्शनकारी छात्र
वर्तमान स्थिति: फिलहाल परिसर में शांति है, लेकिन छात्रों ने चेतावनी दी है कि मांगें पूरी न होने पर आंदोलन को चरणबद्ध तरीके से तेज किया जाएगा।
