शोध रिपोर्ट

SIR यूपी के 30 जिलों के 8,501 मतदाताओं पर आधारित है अध्ययन, निर्वाचन प्रक्रिया और लोकतांत्रिक संस्थाओं पर जनविश्वास को लेकर होगी चर्चा

वाराणसी। काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) में 29 अक्टूबर को निर्वाचन प्रक्रिया, मतदाता समावेशन और लोकतांत्रिक संस्थाओं के प्रति जनविश्वास जैसे विषयों पर अकादमिक संगोष्ठी आयोजित की जाएगी। एफ्रो-एशियन फिलॉसफी फेडरेशन फाउंडेशन की ओर से दोपहर दो बजे के. एन. उडुप्पा सभागार में होने वाले इस कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर किए गए शोध अध्ययन की रिपोर्ट जारी की जाएगी। इसके साथ ही भारतीय ज्ञान परंपरा और समकालीन बौद्धिक विमर्श से जुड़ी दो पुस्तकों का भी विमोचन होगा।

संगोष्ठी का विषय ‘द एसआईआर क्वेश्चन: इलेक्टोरल इंटेग्रिटी, वोटर इंक्लूजन एंड डेमोक्रेटिक ट्रस्ट’ है। इसमें शिक्षाविद, शोधकर्ता और विद्यार्थी निर्वाचन प्रक्रिया की पारदर्शिता, मतदाता सूची की विश्वसनीयता, नागरिक अधिकारों और लोकतांत्रिक व्यवस्था में लोगों की भागीदारी जैसे मुद्दों पर विचार-विमर्श करेंगे। कार्यक्रम के जरिए शोध के निष्कर्षों को सामाजिक, दार्शनिक और सांस्कृतिक दृष्टिकोण से समझने का प्रयास किया जाएगा।

30 जिलों के 8,501 मतदाताओं से जुटाए गए आंकड़े

कार्यक्रम में ‘इलेक्टोरल रोल्स, सिटिजनशिप एंड डेमोक्रेटिक इंक्लूजन: अ स्टडी ऑफ वोटर अवेयरनेस, वेरिफिकेशन एंड इलेक्टोरल रोल इंटेग्रिटी इन उत्तर प्रदेश’ शीर्षक शोध रिपोर्ट प्रमुख रूप से प्रस्तुत की जाएगी। यह अध्ययन उत्तर प्रदेश के सात शोध क्षेत्रों के 30 जिलों में 8,501 मतदाताओं पर किए गए बहुस्तरीय मिश्रित पद्धति सर्वेक्षण पर आधारित है।

शोध रिपोर्ट

शोध में पश्चिमी उत्तर प्रदेश, ब्रज, कानपुर, बुंदेलखंड, अवध, गोरखपुर और वाराणसी क्षेत्र को शामिल किया गया है। इसके तहत मतदाताओं के बीच विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर जागरूकता, मतदाता सूची की सटीकता के संबंध में उनकी राय और सत्यापन प्रक्रिया के दौरान सामने आने वाले अनुभवों का अध्ययन किया गया है।

शोध रिपोर्ट

रिपोर्ट में मतदाता सूची में दोहरी और काल्पनिक प्रविष्टियों से जुड़ी चिंताओं के साथ पात्र मतदाताओं के नाम शामिल किए जाने, सत्यापन प्रक्रिया और निर्वाचन व्यवस्था के प्रति नागरिकों के भरोसे जैसे पहलुओं को भी जगह दी गई है। इसके अलावा प्रशासनिक पारदर्शिता, प्रक्रियागत निष्पक्षता और संस्थागत जवाबदेही के प्रति लोगों की धारणाओं को समझने का प्रयास किया गया है।

मतदाता सूची की शुद्धता और नागरिक अधिकारों पर चर्चा

शोध का मुख्य उद्देश्य मतदाता सूची के पुनरीक्षण को केवल प्रशासनिक कवायद के रूप में देखने के बजाय नागरिक अधिकारों और लोकतांत्रिक सहभागिता के व्यापक संदर्भ में समझना है। अध्ययन में मतदाताओं के अनुभवों के आधार पर यह जानने की कोशिश की गई है कि वे मतदाता सूची की विश्वसनीयता और लोकतांत्रिक व्यवस्था के बीच किस तरह का संबंध देखते हैं।

उत्तर प्रदेश में भौगोलिक विविधता, प्रवासन, शहरीकरण और सामाजिक परिस्थितियों के कारण मतदाता सूची का रखरखाव और समय-समय पर उसका अद्यतन महत्वपूर्ण विषय है। ऐसे में मतदाता सूची को सटीक बनाने के साथ प्रत्येक पात्र नागरिक के मतदान के अधिकार को सुरक्षित रखने से जुड़े सवालों पर चर्चा की जाएगी।

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शोध रिपोर्ट में विभिन्न जिलों से जुटाए गए आंकड़ों और मतदाताओं के अनुभवों को अकादमिक मंच पर प्रस्तुत किया जाएगा। हालांकि, अध्ययन के विस्तृत निष्कर्ष रिपोर्ट जारी होने के बाद ही स्पष्ट होंगे।

भारतीय ज्ञान परंपरा पर आधारित दो पुस्तकों का विमोचन

संगोष्ठी में शोध रिपोर्ट के साथ दो पुस्तकों का भी विमोचन किया जाएगा। इनमें डॉ. रोमासा शुक्ला और प्रो. राजनीश शुक्ला की संयुक्त पुस्तक ‘इंडियन नॉलेज सिस्टम फॉर 21st सेंचुरी’ तथा प्रो. राजनीश शुक्ला की पुस्तक ‘अहम् अस्मि-रोमासा’ शामिल है।

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‘इंडियन नॉलेज सिस्टम फॉर 21st सेंचुरी’ में भारतीय ज्ञान प्रणाली और इक्कीसवीं सदी में उसकी प्रासंगिकता से जुड़े अकादमिक विषयों पर चर्चा की गई है। वहीं, ‘अहम् अस्मि-रोमासा’ का विमोचन भी कार्यक्रम का हिस्सा होगा। दोनों पुस्तकों के माध्यम से भारतीय बौद्धिक परंपरा, दर्शन और समकालीन समाज के बीच संबंधों पर विचार-विमर्श का अवसर मिलेगा।

आयोजकों के अनुसार, निर्वाचन से जुड़े शोध अध्ययन और भारतीय ज्ञान परंपराओं पर आधारित पुस्तकों को एक ही मंच पर लाने का उद्देश्य विभिन्न अकादमिक दृष्टिकोणों के बीच संवाद को बढ़ावा देना है। कार्यक्रम में नागरिकता, नैतिकता, ज्ञान और सामाजिक उत्तरदायित्व जैसे विषयों पर भी चर्चा होगी।

बीएचयू और संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय का अकादमिक सहयोग

कार्यक्रम में काशी हिंदू विश्वविद्यालय के जनसंचार एवं पत्रकारिता विभाग तथा संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के तुलनात्मक धर्म एवं दर्शनशास्त्र विभाग का अकादमिक सहयोग रहेगा। इस पहल के तहत अनुभवजन्य शोध को सामाजिक, दार्शनिक और सांस्कृतिक अध्ययन से जोड़ने पर जोर दिया जाएगा।

संगोष्ठी में निर्वाचन प्रक्रिया से जुड़े प्रशासनिक पहलुओं के साथ न्याय, समानता, नागरिकता, राजनीतिक वैधता, व्यक्तिगत अधिकार और सामूहिक उत्तरदायित्व जैसे विषयों पर भी विचार रखे जाएंगे। चर्चा का उद्देश्य निर्वाचन को केवल मतदाता सूची तैयार करने और मतदान कराने तक सीमित न मानकर नागरिक अधिकारों तथा लोकतांत्रिक संस्थाओं की विश्वसनीयता के व्यापक संदर्भ में देखना है।

कार्यक्रम के दौरान शैक्षणिक प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को सम्मानित करने के लिए पुरस्कार वितरण समारोह भी आयोजित किया जाएगा। इसके माध्यम से विद्यार्थियों में शोध, आलोचनात्मक चिंतन और अकादमिक संवाद के प्रति रुचि बढ़ाने का प्रयास किया जाएगा।

शोध और लोकतांत्रिक विमर्श को मिलेगा मंच

एफ्रो-एशियन फिलॉसफी फेडरेशन फाउंडेशन की इस पहल में निर्वाचन की अखंडता, समावेशी नागरिकता और लोकतांत्रिक संस्थाओं के प्रति जनविश्वास जैसे मुद्दों को केंद्र में रखा गया है। शोध रिपोर्ट के जरिए उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों से जुटाए गए अनुभवों को अकादमिक समुदाय के सामने रखा जाएगा। वहीं, पुस्तकों के विमोचन से भारतीय ज्ञान प्रणाली और दर्शन परंपरा से जुड़े विमर्श को आगे बढ़ाने का अवसर मिलेगा।

कार्यक्रम का विवरण

* तिथि: 29 अक्टूबर 2026

* समय: दोपहर दो बजे

* स्थान: के. एन. उडुप्पा सभागार, काशी हिंदू विश्वविद्यालय, वाराणसी

* आयोजक: एफ्रो-एशियन फिलॉसफी फेडरेशन फाउंडेशन

* मुख्य आकर्षण: एसआईआर शोध रिपोर्ट का विमोचन, दो पुस्तकों का लो

कार्पण, अकादमिक संगोष्ठी और विद्यार्थी सम्मान समारोह।

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