वाराणसी। काशी हिंदू विश्वविद्यालय स्थित फैकल्टी ऑफ विजुअल आर्ट्स के हाल में 3 दिवसीय प्रदर्शनी का आयोजन किया गया। जिसमें 26 कलाकारों ने भाग लिया। जिसमें मुख्य अतिथि के तौर पर फैकल्टी की डीन उत्तमा दीक्षित शामिल हुई।

कार्यक्रम का उद्घाटन दीप प्रज्ज्वलन कर किया गया। इस प्रदर्शनी को दो दृष्टिकोणों से देखा जा सकता है, इसमें कलाकार अपने करियर की शुरुआत से पहले फ्रीलांसर के रूप में अपनी कला-कौशल की परीक्षा लेते प्रतीत होते हैं। दूसरा, इन चित्रों में उनकी युवावस्था की ऊर्जा, जो अभिव्यक्ति के लिए व्याकुल है, पूरी तरह झलकती है।

इनकी कला कौशल निस्संदेह उत्कृष्ट, प्रमाणित और किसी भी प्रश्न से परे है। इन विविध राहों ने इस प्रदर्शनी में मिलकर एक सुंदर कलात्मक गाथा बुनी है। इसकी जानकारी गुरुवार दोपहर 3 बजे की गई ।

यह गाथा विभिन्न सांस्कृतिक पृष्ठभूमियों, कला-निर्माण की विधियों, चित्रण सतहों और शैलियों के रंगीन धागों से बनी हुई है। साथ ही, इन कलाकारों का संबंध दुनिया के अलग-अलग हिस्सों से है। फ़रियाज़ इमरान, निहारिका आह्वना बरसात और मेधा परोमिता बांग्लादेश से आते हैं, लिसा फाल्क ऑस्ट्रिया से हैं, जबकि शेष कलाकार भारत का प्रतिनिधित्व करते हैं।

इस प्रदर्शनी में फ़रियाज़ इमरान, दिव्या प्रभा सिंह, प्रभा सिंह और शिवम सरोज ने प्राकृतिक शैली में अपनी अभिव्यक्ति को आकार दिया है। दूसरी ओर, कार्तिकेय पालीवाल, निशिता जैन, साक्षी अग्रवाल, लक्ष्य शर्मा, हिमांशी तोमर और रामनयन ने परंपरागत माध्यमों से हटकर प्रयोग किए हैं।

लिसा फाल्क, इशिता सेन, ज्ञानेंद्र उपाध्याय और सुनील कुमार यादव भारतीय लघुचित्रों की शांति और सौंदर्य से प्रभावित हैं। नेहा कुमारी, अजीत कुमार, शिवम सरोज, राजन पाल, अखिलेश कुमार, मनी कुमार और रोमा ने अपने चित्रों में सांकेतिक भाषा को अपनाया है। प्रतिवा हेम्ब्रम, अपर्णा सिंह और निहारिका आह्वना बरसात लोक परंपराओं से प्रेरित होकर कार्य कर रही हैं।

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