रिपोर्ट: ओकारनाथ
वाराणसी। काशी की प्राचीन धार्मिक परंपराओं में शामिल विश्वप्रसिद्ध भगवान जगन्नाथ रथयात्रा महोत्सव का शुभारंभ बुधवार को पारंपरिक रुप से डोली यात्रा के साथ होगा। भगवान जगन्नाथ, बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा की दिव्य डोली आज अस्सी स्थित प्राचीन श्री जगन्नाथ मंदिर से विधिवत पूजन-अर्चन के बाद रथयात्रा स्थित बेनीराम बाग के लिए प्रस्थान करेगी। डोली यात्रा को लेकर मंदिर परिसर में सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ने लगी है। मंदिर को आकर्षक फूलों और विद्युत सज्जा से सजाया गया है, जबकि भगवान की डोली को पारंपरिक शैली में अंतिम रूप दिया जा रहा है।
भगवान जगन्नाथ डोली यात्रा के दौरान मंदिर में स्थित वैदिकआचार्यों के सान्निध्य में विशेष पूजन, मंत्रोच्चार और महाआरती के बाद भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और माता सुभद्रा को सुसज्जित डोली में विराजमान कराया जाएगा। इसके बाद श्रद्धालुओं के जयघोष के बीच शोभायात्रा अस्सी से रवाना होगी और पारंपरिक मार्गों से गुजरते हुए शाम तक बेनीराम बाग पहुंचेगी। वहां भगवान के रथ का विधिवत पूजन किया जाएगा तथा तीनों विग्रहों को रात्रि विश्राम के लिए विराजमान कराया जाएगा।

काशी की यह डोली यात्रा केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सदियों पुरानी जीवंत सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है। मान्यता है कि भगवान जगन्नाथ अपनी बहन सुभद्रा और भाई बलभद्र के साथ मौसी घर की यात्रा पर निकलते हैं। यही कारण है कि इस यात्रा को देखने और इसमें शामिल होने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु दूर-दूर से वाराणसी पहुंचते हैं। डोली यात्रा के दौरान भक्त स्वयं भगवान की पालकी को अपने कंधों पर उठाकर सेवा का सौभाग्य प्राप्त करते हैं, जिसे अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है।
यात्रा के दौरान पूरे मार्ग में भक्ति का अद्भुत वातावरण देखने को मिलेगा। ढोल-नगाड़ों की गूंज, शहनाई की मधुर धुन, भजन-कीर्तन और “जय जगन्नाथ” के उद्घोष से पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठेगा। विभिन्न सामाजिक एवं धार्मिक संस्थाएं जगह-जगह भगवान की आरती करेंगी, फूलों की वर्षा करेंगी और श्रद्धालुओं के लिए जलपान की व्यवस्था भी करेंगी। काशी की गलियां एक बार फिर आस्था, श्रद्धा और सनातन संस्कृति के रंग में रंगी नजर आएंगी।
डोली यात्रा के पश्चात गुरुवार को भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा भव्य रथ पर आरूढ़ होकर ऐतिहासिक रथयात्रा निकालेंगे। इस रथयात्रा में लाखों श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है। ऐसी मान्यता है कि भगवान के रथ की रस्सी खींचने वाले श्रद्धालुओं की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। यही कारण है कि रथ को खींचने के लिए हर वर्ष श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह और भारी भीड़ देखने को मिलता है।
रथयात्रा महोत्सव को शांतिपूर्ण और व्यवस्थित ढंग से संपन्न कराने के लिए जिला प्रशासन ने व्यापक सुरक्षा व्यवस्था के इंतजाम किए है। यात्रा मार्ग पर अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती, सीसीटीवी कैमरों से निगरानी, बैरिकेडिंग, यातायात डायवर्जन तथा भीड़ नियंत्रण के विशेष इंतजाम किए गए हैं। स्वास्थ्य विभाग, नगर निगम और अन्य संबंधित विभागों को भी आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
धर्मनगरी काशी की यह ऐतिहासिक परंपरा केवल एक धार्मिक उत्सव ही नहीं, बल्कि आस्था, संस्कृति और सामाजिक समरसता का विराट प्रतीक है। डोली यात्रा के साथ ही पूरे शहर में भगवान जगन्नाथ के आगमन का उल्लास चरम पर पहुंच जाएगा और काशी एक बार फिर भक्ति के रंग में पूरी तरह सराबोर दिखाई देगी।
