वाराणसी। तकनीकी शिक्षा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए PM SHRI राजकीय क्वींस इंटर कॉलेज, वाराणसी में अत्याधुनिक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) एवं रोबोटिक्स लैब का उद्घाटन किया गया। खास बात यह है कि यह उत्तर प्रदेश के किसी भी राजकीय विद्यालय में बिना सरकारी आर्थिक सहायता के स्थापित होने वाली अपनी तरह की पहली एआई-रोबोटिक्स लैब है। इस परियोजना को क्वींस कॉलेज पुरातन छात्रसभा के मार्गदर्शन में भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईआईटी) बड़ोदरा के निदेशक प्रो. धर्मेंद्र सिंह की पहल तथा पीएचएन टेक्नोलॉजी के सहयोग से साकार किया गया है।
नई शिक्षा नीति (एनईपी) के अनुरूप तैयार की गई यह आधुनिक प्रयोगशाला विद्यार्थियों को केवल सैद्धांतिक ज्ञान तक सीमित नहीं रखेगी, बल्कि उन्हें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रोबोटिक्स, ऑटोमेशन और उभरती तकनीकों का व्यावहारिक प्रशिक्षण भी उपलब्ध कराएगी। इससे विद्यार्थियों में वैज्ञानिक सोच, नवाचार और तकनीकी कौशल का विकास होगा तथा वे भविष्य की चुनौतियों के लिए बेहतर तरीके से तैयार हो सकेंगे।
उद्घाटन समारोह में मुख्य अतिथि एवं आईआईआईटी बड़ोदरा के निदेशक प्रो. धर्मेंद्र सिंह ने कहा कि अपने विद्यालय के लिए योगदान देना उनके लिए गर्व और संतोष का विषय है। उन्होंने कहा कि आज का दौर तकनीक का है और आने वाले वर्षों में एआई एवं रोबोटिक्स का महत्व लगातार बढ़ेगा। ऐसे में विद्यालय स्तर पर विद्यार्थियों को आधुनिक तकनीकों से जोड़ना समय की आवश्यकता है। उन्होंने विश्वास जताया कि इस लैब के माध्यम से छात्र-छात्राएं केवल नई तकनीक सीखेंगे ही नहीं, बल्कि भविष्य में सफल उद्यमी बनकर रोजगार सृजन की दिशा में भी आगे बढ़ेंगे।
प्रो. धर्मेंद्र सिंह ने यह भी घोषणा की कि जल्द ही आईआईआईटी बड़ोदरा और क्वींस कॉलेज के बीच एक एमओयू (समझौता ज्ञापन) किया जाएगा। इसके माध्यम से विद्यार्थियों को विशेषज्ञों का मार्गदर्शन, विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम, कार्यशालाओं और उन्नत तकनीकी गतिविधियों में भाग लेने का अवसर मिलेगा।
कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि प्रदीप एच. नारायणकर ने कहा कि उनकी संस्था लंबे समय से शिक्षा और कौशल विकास के क्षेत्र में कार्य कर रही है। उन्होंने बताया कि इस लैब में उपलब्ध उपकरण और संसाधन किसी आईआईटी स्तर की प्रयोगशाला से कम नहीं हैं। उनका उद्देश्य विद्यार्थियों को केवल नौकरी पाने योग्य बनाना नहीं, बल्कि उन्हें ऐसा सक्षम बनाना है कि वे भविष्य में स्वयं रोजगार सृजित कर सकें और दूसरों को भी रोजगार देने वाले बनें।
क्वींस कॉलेज पुरातन छात्रसभा के अध्यक्ष प्रो. प्रदीप कुमार मिश्रा ने इस उपलब्धि को कॉलेज के इतिहास का स्वर्णिम अध्याय बताया। उन्होंने कहा कि पुरातन छात्रों का हमेशा प्रयास रहा है कि संस्थान आधुनिक शिक्षा और तकनीक के क्षेत्र में नई पहचान बनाए। उन्होंने प्रो. धर्मेंद्र सिंह और प्रदीप एच. नारायणकर का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह लैब आने वाले वर्षों में हजारों विद्यार्थियों के भविष्य को नई दिशा देने का काम करेगी। उन्होंने यह भी घोषणा की कि लैब के सुचारु संचालन के लिए प्रशिक्षित इंस्ट्रक्टर की व्यवस्था भी पुरातन छात्रसभा द्वारा की जाएगी।
विद्यालय के प्रधानाचार्य डॉ. विश्वेश्वर सिंह ने कहा कि यह प्रयोगशाला विद्यार्थियों को आधुनिक तकनीकी एवं व्यावसायिक शिक्षा से जोड़ने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगी। उन्होंने कहा कि इस पहल से छात्रों में अनुसंधान, नवाचार और वैज्ञानिक सोच विचार को बढ़ावा मिलेगा तथा वे भविष्य की तकनीकी आवश्यकताओं के अनुरूप स्वयं को तैयार कर सकेंगे। उन्होंने इस ऐतिहासिक पहल के लिए पुरातन छात्रसभा और सभी सहयोगी संस्थाओं का आभार व्यक्त किया।
कार्यक्रम के समापन में छात्रसभा के सचिव प्रो. मनोज कुमार श्रीवास्तव ने सभी अतिथियों, शिक्षकों, मीडिया प्रतिनिधियों, विद्यार्थियों और सहयोगी संस्थाओं का धन्यवाद ज्ञापित किया। इस अवसर पर पुरातन छात्रसभा के पदाधिकारी, शिक्षा सेवा चयन आयोग के सदस्य हरेन्द्र राय, उपप्रधानाचार्य डॉ. आशुतोष राय, विद्यालय के शिक्षक एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।

विशेषज्ञों का मानना है कि क्वींस इंटर कॉलेज में स्थापित यह एआई-रोबोटिक्स लैब केवल एक आधुनिक प्रयोगशाला नहीं, बल्कि सरकारी विद्यालयों में तकनीकी शिक्षा को नई दिशा देने वाला मॉडल बन सकती है। इससे विद्यार्थियों को भविष्य की तकनीकों का व्यावहारिक अनुभव मिलेगा और वे नवाचार, स्टार्टअप संस्कृति तथा अनुसंधान के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित होंगे।
