वाराणसी।वर्ष 2027 में आयोजित होने वाले हरिद्वार अर्धकुंभ और नासिक-त्र्यंबकेश्वर सिंहस्थ कुंभ को लेकर काशी के अखाड़ों ने अपनी तैयारियों को अंतिम रूप देना शुरू कर दिया है। देश के सबसे बड़े धार्मिक आयोजनों में शामिल कुंभ मेले की व्यवस्थाओं को समय पर पूरा करने के लिए अखाड़ों में लगातार बैठकों का दौर चल रहा है। संतों के आवास, टेंट निर्माण, भूमि आवंटन, कोठारियों की रवानगी, भोजन, सुरक्षा और परिवहन जैसी व्यवस्थाओं पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इसी क्रम में 12 जुलाई को काशी स्थित जूना अखाड़े के प्रधान कार्यालय में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित होगी, जिसमें देश-विदेश से जुड़े संत-महात्मा और अखाड़े के पदाधिकारी शामिल होकर तैयारियों की विस्तृत समीक्षा करेंगे।
बैठक में जूना अखाड़े के आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद महाराज की उपस्थिति रहेगी। इसके अलावा देशभर में फैली जूना अखाड़े की 500 से अधिक शाखाओं से एक हजार से अधिक महामंडलेश्वर, श्रीमहंत और प्रतिनिधियों के शामिल होने की संभावना है। नेपाल से भी संतों और प्रतिनिधियों के आने की सूचना है, जबकि कुछ संत ऑनलाइन माध्यम से बैठक में जुड़ेंगे। बैठक में कुंभ मेले के दौरान विभिन्न व्यवस्थाओं की जिम्मेदारियां तय की जाएंगी और अलग-अलग समितियों को आवश्यक दायित्व सौंपे जाएंगे।
जूना अखाड़े के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष मोहन भारती ने बताया कि हरिद्वार में अखाड़ों के लिए भूमि आवंटन की प्रक्रिया जारी है। भूमि मिलने के बाद नवंबर तक टेंट, शिविर और अन्य अस्थायी संरचनाओं का निर्माण पूरा कर लिया जाएगा। इसके बाद अखाड़े के संत, नागा साधु और अन्य धार्मिक प्रतिनिधियों के जत्थे हरिद्वार पहुंचने लगेंगे। वहां प्रमुख स्नान पर्वों के साथ धार्मिक अनुष्ठान, साधना, यज्ञ, प्रवचन और श्रद्धालुओं की सेवा का कार्य संचालित किया जाएगा।
उन्होंने बताया कि 12 जुलाई की बैठक में टेंट लगाने की योजना, कोठारियों की रवानगी, संतों के आवास, भोजन व्यवस्था, चिकित्सा सुविधा, सुरक्षा व्यवस्था, परिवहन और प्रशासनिक समन्वय सहित कई महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा होगी। बैठक में हरि गिरि, प्रेम गिरि, उमाशंकर भारती, महेशपुरी, शिवानंद, आनंदपुरी, शिवगिरि सहित करीब 20 महामंडलेश्वर, श्रीमहंत और जूना अखाड़े की 52 सदस्यीय समिति के सदस्य भी मौजूद रहेंगे।
जूना अखाड़े के अलावा काशी के अन्य प्रमुख अखाड़ों ने भी अपनी तैयारियों को तेज कर दिया है। काशी के 13 प्रमुख अखाड़ों में से आठ के प्रधान कार्यालय यहीं स्थित हैं, जबकि अन्य की प्रमुख शाखाएं यहां संचालित होती हैं। निरंजनी, आह्वान, अटल, निर्वाणी, अग्नि, आनंद और वैष्णव अखाड़ों में भी लगातार बैठकों का आयोजन किया जा रहा है। सभी अखाड़े अपने-अपने शिविरों, संतों के प्रवास और धार्मिक आयोजनों की रूपरेखा तैयार करने में जुटे हैं ताकि कुंभ मेले के दौरान किसी प्रकार की अव्यवस्था न हो।
मोहन भारती ने बताया कि नासिक-त्र्यंबकेश्वर सिंहस्थ कुंभ की तैयारियां भी समानांतर रूप से चल रही हैं। नासिक में सिंहस्थ कुंभ सावन-भादो के दौरान आयोजित होता है, इसलिए वहां भारी बारिश सबसे बड़ी चुनौती होती है। ऐसे में जल निकासी, मजबूत टेंट, सुरक्षित आवास और आवश्यक सुविधाओं की व्यवस्था पहले से सुनिश्चित करनी पड़ती है। उन्होंने बताया कि कुछ अखाड़ों के नासिक में स्थायी भवन भी बने हुए हैं, जिनका उपयोग कुंभ के दौरान संतों के ठहरने और धार्मिक गतिविधियों के संचालन में किया जाएगा।

जानकारी के अनुसार हरिद्वार में अर्धकुंभ मेला अगले वर्ष 14 जनवरी (मकर संक्रांति) से 20 अप्रैल (चैत्र पूर्णिमा) तक आयोजित होगा। इस दौरान 10 प्रमुख शाही और पारंपरिक स्नान संपन्न होंगे, जिनमें देश-विदेश से करोड़ों श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है। वहीं नासिक-त्र्यंबकेश्वर सिंहस्थ कुंभ का औपचारिक शुभारंभ इसी वर्ष 31 अक्टूबर को ध्वजारोहण के साथ होगा, जबकि मुख्य आयोजन अगस्त से सितंबर 2027 के बीच संपन्न होगा।

अखाड़ों का कहना है कि बैठक के बाद तैयारियों को और गति दी जाएगी तथा अगले दो महीनों में विभिन्न अखाड़ों के संतों के जत्थे हरिद्वार पहुंचने लगेंगे। वहां शिविर स्थापित कर धार्मिक अनुष्ठान, प्रवचन, साधना और श्रद्धालुओं की सेवा का कार्य शुरू किया जाएगा। संतों का मानना है कि कुंभ केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि भारतीय सनातन संस्कृति, संत परंपरा और आध्यात्मिक चेतना का सबसे बड़ा महापर्व है, जिसकी सफल तैयारी के लिए सभी अखाड़े समन्वित रूप से कार्य कर रहे हैं।
