वाराणसी। बॉलीवुड के जाने-माने अभिनेता बोमन ईरानी अपने दो दिवसीय वाराणसी प्रवास के दौरान श्री काशी विश्वनाथ धाम पहुंचे, जहां उन्होंने पूरे विधि-विधान और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच बाबा विश्वनाथ का दर्शन-पूजन किया। वर्षों से काशी आने की इच्छा रखने वाले अभिनेता ने बाबा के दरबार में मत्था टेकने के बाद इसे अपने जीवन का सौभाग्यपूर्ण क्षण बताया। उन्होंने कहा कि “इस बार उन्हें काशी को केवल एक धार्मिक नगरी के रूप में नहीं, बल्कि उसकी संस्कृति, परंपराओं, इतिहास और आध्यात्मिक विरासत को करीब से जानने का अवसर मिला, जो उनकी कल्पना से कहीं अधिक अद्भुत और प्रेरणादायक है। “
शनिवार सुबह श्री काशी विश्वनाथ धाम पहुंचने पर मंदिर प्रशासन और पुरोहितों ने वैदिक रीति-रिवाज के अनुसार उनका स्वागत किया। मंदिर परिसर में पूरे विधि-विधान से रुद्राभिषेक और पूजन-अर्चन कराया गया। पूजा के दौरान बोमन ईरानी ने श्रद्धापूर्वक मंत्रों का शुद्ध उच्चारण किया और पूरे अनुष्ठान में पूरी आस्था एवं एकाग्रता के साथ शामिल रहे। मंदिर परिसर में मौजूद श्रद्धालुओं ने भी अभिनेता के सहज और धार्मिक भाव की सराहना की।

पूजन संपन्न कराने वाले काशी के विद्वान आचार्य ने कहा कि अभिनेता ने पूरे समय अत्यंत श्रद्धा के साथ सभी धार्मिक परंपराओं का पालन किया। दर्शन के बाद उन्होंने बाबा विश्वनाथ से देश की सुख-समृद्धि, शांति और सभी लोगों के मंगल की कामना की।
दर्शन के बाद मीडिया से बातचीत करते हुए बोमन ईरानी ने कहा कि उन्होंने काशी के बारे में वर्षों से बहुत कुछ सुना था। पहले उनकी जानकारी केवल इतनी थी कि यहां बाबा विश्वनाथ का भव्य मंदिर, काल भैरव मंदिर और बनारस की प्रसिद्ध चाट है, लेकिन इस यात्रा ने उनकी सोच पूरी तरह बदल दी। उन्होंने कहा, “जो काशी हमने इस बार देखी, वह हमारी कल्पना से कहीं अधिक अद्भुत है। यहां की आध्यात्मिक ऊर्जा, हजारों वर्षों पुरानी संस्कृति, धार्मिक परंपराएं और लोगों का अपनापन मन को गहराई से छू जाता है। यह शहर केवल एक तीर्थ स्थल ही नहीं, बल्कि भारतीय सभ्यता और संस्कृति की जीवंत पहचान है।”
वाराणसी प्रवास के दौरान अभिनेता ने गंगा नदी में क्रूज यात्रा का भी आनंद लिया। इस दौरान उन्होंने काशी के प्रसिद्ध 84 घाटों की भव्यता को करीब से देखा। गंगा तट पर होने वाली धार्मिक गतिविधियों, प्राचीन मंदिरों और ऐतिहासिक घाटों ने उन्हें विशेष रूप से आकर्षित किया। उन्होंने कहा कि गंगा किनारे का वातावरण बेहद शांतमय, आध्यात्मिक और सकारात्मक ऊर्जा से भरपूर है।
क्रूज यात्रा के दौरान अभिनेता ने आदि दिर में भी दर्शन-पूजन किया। यहां उन्हें काशी की धार्मिक परंपराओं, पौराणिक मान्यताओं और ऐतिहासिक महत्व की विस्तृत जानकारी दी गई। उन्होंने रुचि के साथ इन जानकारियों को सुना और काशी की प्राचीन विरासत की सराहना की।
धार्मिक स्थलों के भ्रमण के अलावा बोमन ईरानी ने बनारस के प्रसिद्ध व्यंजनों का भी स्वाद लिया। उन्होंने विशेष रूप से बनारसी टमाटर चाट की जमकर प्रशंसा की। इसके साथ ही उन्होंने स्थानीय लोगों से शहर की संस्कृति, खान-पान और जीवनशैली के बारे में बातचीत की। अभिनेता ने कहा कि बनारस की पहचान केवल उसके मंदिरों तक सीमित नहीं है, बल्कि यहां की संस्कृति, खान-पान और लोगों का आत्मीय व्यवहार भी इसे दुनिया के सबसे अलग शहरों में शामिल करता है।अपने वाराणसी प्रवास के दौरान बोमन ईरानी अपनी पत्नी के साथ यमुना पीलीकोठी रोड स्थित एम बाजार के पास एक नए हैंडलूम शोरूम भी पहुंचे। यहां उन्होंने बनारसी हैंडलूम उद्योग और बुनकरों की पारंपरिक कला को करीब से देखा। शोरूम में उन्हें बनारसी साड़ियों की बुनाई की प्रक्रिया दिखाई गई, जिसे देखकर वह काफी प्रभावित हुए।

शोरूम संचालक आशिफ मतीन ने बताया कि अभिनेता ने शुद्ध रेशम से तैयार कतान कढ़ुआ बूटी, कतान चेक कढ़ुआ बूटा और तंचोई जामावार जैसी पारंपरिक बनारसी साड़ियों की खरीदारी की। इस दौरान उन्होंने बनारसी बुनकरों के कौशल और वर्षों पुरानी शिल्प परंपरा की खुलकर सराहना की। उन्होंने कहा कि बनारसी हैंडलूम भारतीय कला और संस्कृति की अनमोल धरोहर है, जिसे पूरी दुनिया तक पहुंचाने की जरूरत है।
गौरतलब है कि बोमन ईरानी इससे पहले भी दो बार वाराणसी आ चुके हैं, लेकिन उन यात्राओं के दौरान उन्हें श्री काशी विश्वनाथ मंदिर में दर्शन का अवसर नहीं मिल पाया था। तीसरी यात्रा में बाबा विश्वनाथ के दर्शन कर उन्होंने इसे अपने जीवन का अत्यंत भावुक, आध्यात्मिक और अविस्मरणीय अनुभव बताया।
बोमन ईरानी हिंदी सिनेमा के उन चुनिंदा अभिनेताओं में शामिल हैं जिन्होंने अपनी दमदार अभिनय क्षमता से हर तरह के किरदारों को यादगार बनाया है। उन्होंने अब तक 100 से अधिक फिल्मों में अभिनय किया है। ‘मुन्ना भाई एमबीबीएस’, ‘लगे रहो मुन्ना भाई’, ‘3 इडियट्स’, ‘पीके’, ‘डॉन’, ‘जॉली एलएलबी’, ‘ऊंचाई’ और ‘डंकी’ जैसी कई सुपरहिट फिल्मों में उनके निभाए गए किरदार दर्शकों के बीच आज भी बेहद लोकप्रिय हैं। वाराणसी यात्रा के दौरान उनका धार्मिक और सांस्कृतिक जुड़ाव लोगों के बीच चर्चा का विषय बना रहा।
