रिपोर्ट – पवन आजाद
वाराणसी। काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) में तृतीय एवं चतुर्थ श्रेणी के दैनिक वेतनभोगी और संविदा कर्मचारियों ने मंगलवार को अपने हक की आवाज बुलंद की। नियमितीकरण की लंबित मांग को लेकर सैकड़ों कर्मचारियों ने एमपी थिएटर ग्राउंड से विश्वविद्यालय के सेंट्रल ऑफिस तक शांतिपूर्ण विरोध जुलूस निकाला। कर्मचारियों की स्पष्ट मांग है कि जब तक उनके स्थायीकरण पर समिति का अंतिम निर्णय नहीं आ जाता, तब तक नई भर्ती परीक्षाओं को स्थगित रखा जाए।

समिति के गठन का स्वागत, पर भर्ती प्रक्रिया पर आपत्ति
प्रदर्शन के दौरान कर्मचारी नेताओं ने बताया कि विश्वविद्यालय प्रशासन ने उनकी मांगों पर संज्ञान लेते हुए 14/16 मार्च 2026 को नियमितीकरण के लिए एक विशेष समिति का गठन किया है। कर्मचारियों ने इस कदम के लिए प्रशासन का आभार तो व्यक्त किया, लेकिन साथ ही एक गंभीर चिंता भी जताई। उनका कहना है कि एक तरफ नियमितीकरण की प्रक्रिया चल रही है, वहीं दूसरी तरफ नए पदों पर भर्ती के लिए परीक्षा आयोजित करना विरोधाभासी है।
अप्रैल के अंत में प्रस्तावित है परीक्षा
विश्वविद्यालय प्रशासन ने विज्ञापन संख्या 07/2024-2025 के तहत कनिष्ठ लिपिक (पोस्ट कोड-50003) के 199 पदों के लिए लिखित परीक्षा की तिथि अप्रैल 2026 के अंतिम सप्ताह में तय की है। कर्मचारियों का तर्क है कि यदि ये 199 पद नई भर्ती से भर दिए गए, तो वर्षों से सेवा दे रहे संविदा कर्मियों के नियमितीकरण के लिए रिक्तियां ही नहीं बचेंगी, जिससे समिति का गठन बेमानी हो जाएगा।
’30-40 वर्षों की सेवा का मिले सम्मान‘
प्रदर्शन में शामिल कर्मचारियों ने अपनी व्यथा साझा करते हुए कहा कि कई साथी पिछले 30 से 40 वर्षों से विश्वविद्यालय को अपनी सेवाएं दे रहे हैं।
“हममें से अधिकांश कर्मचारी कम से कम 14 वर्षों से कार्यरत हैं। अब हम पारिवारिक और कार्यालयी जिम्मेदारियों के बीच उस स्थिति में नहीं हैं कि नई प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं से सीधा मुकाबला कर सकें। प्रशासन को हमारे अनुभव और योगदान को प्राथमिकता देनी चाहिए।”
प्रमुख मांगें: परीक्षा स्थगन: कनिष्ठ लिपिक के 199 पदों पर होने वाली आगामी लिखित परीक्षा को तत्काल स्थगित किया जाए।
प्राथमिकता:पहले दशकों से कार्यरत दैनिक वेतनभोगी और संविदा कर्मियों को स्थायी किया जाए।
पारदर्शिता: नियमितीकरण समिति की रिपोर्ट सार्वजनिक होने तक कोई भी नई नियुक्ति न की जाए।
कर्मचारियों ने अंत में स्पष्ट किया कि उनका यह प्रदर्शन पूर्णतः लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण है। वे केवल अपने भविष्य और अधिकारों की सुरक्षा के लिए प्रशासन से विनम्र निवेदन कर रहे हैं। अब सबकी निगाहें विश्वविद्यालय प्रशासन के अगले कदम पर टिकी हैं।
