रिपोर्ट – पवन आजाद
वाराणसी। 7 अप्रैल, काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) के लंका गेट पर शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन की अनुमति और पुलिस दुर्व्यवहार के मामले को लेकर आज छात्रों और नागरिक समाज ने कड़ा रुख अपनाया। बीएचयू छात्रों, क्वीर समुदाय और नागरिक समाज के एक प्रतिनिधिमंडल ने सहायक पुलिस आयुक्त (ACP), भेलूपुर से मुलाकात कर उन्हें ज्ञापन सौंपा।

लोकतांत्रिक अधिकारों की बहाली की मांग
प्रतिनिधिमंडल ने एसीपी के समक्ष यह मुद्दा उठाया कि लंका गेट ऐतिहासिक रूप से शांतिपूर्ण प्रतिरोध और अभिव्यक्ति का केंद्र रहा है। हाल के दिनों में पुलिस प्रशासन द्वारा यहाँ प्रदर्शनों पर लगाई गई रोक को हटाने की मांग की गई। ज्ञापन में कहा गया कि भारतीय संविधान द्वारा प्रदत्त शांतिपूर्ण प्रदर्शन के मौलिक अधिकार की रक्षा करना पुलिस प्रशासन की जिम्मेदारी है।
पुलिस चौकी प्रभारी पर अभद्रता का आरोप
ज्ञापन में बीते 5 अप्रैल की घटना का विशेष उल्लेख किया गया। उस दिन ‘ट्रांसजेंडर व्यक्ति (अधिकारों का संरक्षण) संशोधन अधिनियम, 2026’ के विरोध में आयोजित प्रदर्शन के दौरान सीर गोवर्धन पुलिस चौकी प्रभारी सौरभ तिवारी पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं।
आरोप: प्रदर्शनकारियों के प्लेकार्ड छीनना, क्वीर समुदाय के सदस्यों को धमकाना और अभद्र भाषा का प्रयोग करना।
प्रतिनिधिमंडल की प्रतिक्रिया
प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों—मिहिर, सुमन और नीति—ने स्पष्ट किया कि पुलिस प्रशासन को लोकतांत्रिक मूल्यों का सम्मान करना चाहिए। उन्होंने उम्मीद जताई कि जांच निष्पक्ष होगी और लंका गेट पर छात्रों व नागरिकों को अपनी बात रखने का संवैधानिक स्थान पुनः प्राप्त होगा।
मुख्य जानकारी:
घटना स्थल: लंका गेट, बीएचयू (वाराणसी)।
मुद्दा: शांतिपूर्ण प्रदर्शन का अधिकार एवं पुलिस दुर्व्यवहार।
प्रशासनिक कार्यवाही: चौकी इंचार्ज के विरुद्ध विभागीय जांच शुरू।
