रिपोर्ट – पवन आजाद
वाराणसी। भगवान विश्वनाथ की नगरी काशी को नशामुक्त घोषित किए जाने की मांग को लेकर शनिवार को शहर में एक विशाल जनजागरण अभियान देखने को मिला। धर्म, राष्ट्र और मानवता की सेवा के लिए कार्यरत भगवती मानव कल्याण संगठन के तत्वावधान में नशामुक्त भारत, खुशहाल काशी के लक्ष्य के तहत 04 अप्रैल 2026 को काशी हिंदू विश्वविद्यालय मैदान से एक विशाल नशामुक्त पदयात्रा का आयोजन किया गया। इस पदयात्रा में हजारों की संख्या में संगठन के कार्यकर्ता, महिलाएं, युवा और नगरवासी शामिल हुए और समाज को नशामुक्त परिवार तथा अपराधमुक्त समाज बनाने का संदेश दिया।

पदयात्रा के दौरान पूरे मार्ग में कार्यकर्ताओं ने नशामुक्ति के नारे लगाए और सरकार से प्रदेश को नशामुक्त बनाने की मांग की। यात्रा का उद्देश्य युवाओं को नशे के दुष्प्रभावों से अवगत कराना तथा समाज में नैतिक और आध्यात्मिक मूल्यों को मजबूत करना बताया गया।
कार्यक्रम का आयोजन भगवती मानव कल्याण संगठन के संस्थापक संचालक धर्मसम्राट युग चेतना पुरुष योगीराज शक्तिपुत्र जी महाराज के निर्देशन और आशीर्वाद से किया गया। इस अवसर पर संगठन की केंद्रीय अध्यक्ष सिद्धाश्रम चेतना आरुणी जी, शक्ति स्वरूप बहन पूजा शुक्ला, केंद्रीय महासचिव अजय अवस्थी सहित पंचज्योति शक्तितीर्थ सिद्धाश्रम से कई पदाधिकारी उपस्थित रहे।
सभा को संबोधित करते हुए केंद्रीय अध्यक्ष पूजा शुक्ला ने कहा कि काशी पवित्रता और दिव्यता की नगरी है, यह संतों और भक्तों की धरती है। ऐसे में यहां नशे का प्रसार चिंताजनक है। उन्होंने कहा कि शहर में जगह-जगह शराब के ठेके खुलने से युवा वर्ग तेजी से नशे की ओर बढ़ रहा है, जिससे परिवार और समाज दोनों प्रभावित हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि नशामुक्त परिवार ही खुशहाल प्रदेश और अपराधमुक्त समाज का आधार बन सकता है, इसलिए यह अभियान निरंतर चलता रहेगा।
उन्होंने विशेष रूप से महिलाओं को संबोधित करते हुए कहा कि नशे के कारण घरेलू हिंसा और महिलाओं पर अत्याचार की घटनाएं बढ़ रही हैं। कई परिवारों में बेटा या भाई नशे की लत के कारण बर्बाद हो रहा है। ऐसे में नारी शक्ति को आगे आकर समाज में जागरूकता फैलाने की आवश्यकता है।
केंद्रीय महासचिव अजय अवस्थी ने अपने संबोधन में कहा कि भगवान शिव पवित्रता के प्रतीक हैं, उन्हें नशे का प्रतीक बनाना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि भोलेनाथ के नाम पर भांग और अन्य नशे का सेवन करना धार्मिक आस्था का गलत अर्थ निकालना है। उन्होंने बुद्धिजीवियों और समाज के प्रबुद्ध वर्ग से नशे के खिलाफ आवाज उठाने का आह्वान किया।
संगठन के पदाधिकारियों ने यह भी आरोप लगाया कि सरकार राजस्व बढ़ाने के उद्देश्य से शराब के ठेके खोलकर समाज में नशे को बढ़ावा दे रही है, जिससे युवा वर्ग संस्कारहीन होकर अपराध की ओर अग्रसर हो रहा है। उन्होंने कहा कि जिस देश का युवा नशे की गिरफ्त में होगा, उस देश का विकास संभव नहीं है। नशा ही दुर्घटनाओं, अपराधों और महिलाओं पर अत्याचार का एक प्रमुख कारण बनता जा रहा है।
कार्यक्रम के दौरान संगठन की ओर से प्रदेश सरकार से काशी को नशामुक्त घोषित करने, गौ हत्या पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने तथा गौ माता को राष्ट्रीय पशु का दर्जा देने की मांग भी की गई। वक्ताओं ने कहा कि दिव्य और भव्य काशी का निर्माण तभी संभव है, जब इसे नशामुक्त बनाया जाए।
पदयात्रा के दौरान शहर के विभिन्न स्थानों पर संत-महात्माओं, समाजसेवी संस्थाओं और स्थानीय नागरिकों ने यात्रा का स्वागत किया। आयोजन को शांतिपूर्ण और सफल बनाने में प्रशासन का भी पूरा सहयोग मिला। कार्यक्रम में देश और प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए कार्यकर्ताओं ने बढ़-चढ़कर भागीदारी निभाई और समाज को नशामुक्त बनाने का संकल्प लिया।
