रिपोर्ट – पवन आजाद 

वाराणसी। बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के शिक्षक आज केंद्रीय कार्यालय (सेंट्रल ऑफिस) पहुंचे और अपनी लंबित समस्याओं का समाधान करने की मांग की। शिक्षकों ने आरोप लगाया कि पिछले कई वर्षों से उनकी महत्वपूर्ण मांगों को अनदेखा किया जा रहा है, जिससे उनके कैरियर और जीवन पर प्रतिकूल असर पड़ा है।

मुख्य मांगें:

बीएचयू के शिक्षकों ने केंद्रीय अधिकारियों से निम्नलिखित मांगों पर त्वरित कार्रवाई की अपील की:

नोशनल इंक्रीमेंट को लागू किया जाए।

पूर्व सेवा की गणना (Past Service Count) की जाए।

पीडीएफ (Post Doctoral Fellowship) एवं डीएसीपी (Dynamic Assured Career Progression) के तहत प्रमोशन और कैरियर विकास संबंधी सभी अड़चनें तत्काल दूर की जाएं।

शिक्षकों का कहना है कि यूजीसी द्वारा निर्धारित मानकों के अनुसार अन्य विश्वविद्यालयों में इन सुविधाओं का पालन हो रहा है, लेकिन बीएचयू में इनका पालन नहीं किया जा रहा है, जिससे शिक्षक वर्ग में असंतोष का माहौल है।

प्रशासन पर गंभीर आरोप:

शिक्षकों ने बीएचयू के डिप्टी रजिस्ट्रार (एडमिन) श्री वाई. वेलु और डिप्टी रजिस्ट्रार श्री अजय पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि इन अधिकारियों द्वारा विश्वविद्यालय के नियमों को तोड़ा-मरोड़ा जा रहा है और शिक्षकों की समस्याओं का सही समाधान नहीं किया जा रहा है। इसके अलावा, कार्यकारी परिषद द्वारा गठित ग्रेवांस कमेटी की सिफारिशों की गोपनीयता का उल्लंघन किया जा रहा है, और रिपोर्ट को जानबूझकर देर से भेजा जा रहा है।

न्याय न मिलने पर आंदोलन की चेतावनी:

शिक्षकों ने यह भी चेतावनी दी है कि यदि उनकी समस्याओं का शीघ्र समाधान नहीं किया गया, तो वे प्रधानमंत्री कार्यालय को प्रेस विज्ञप्ति भेजने के साथ ही लोकतांत्रिक तरीके से चरणबद्ध विरोध प्रदर्शन करेंगे। शिक्षकों का कहना है कि वे अपने अधिकारों के लिए शांतिपूर्ण तरीके से संघर्ष करेंगे।

चार वर्षों से लंबित हैं प्रमोशन और कैरियर विकास के मामले:

बीएचयू के शिक्षक यह भी बताते हैं कि पिछले चार वर्षों से उनके नोशनल इंक्रीमेंट और डीएसीपी के तहत प्रमोशन को रोका जा रहा है। इससे न केवल उनके कैरियर को क्षति हुई है, बल्कि उनके परिवारों पर भी आर्थिक और मानसिक संकट का सामना करना पड़ रहा है।

देर शाम तक शिक्षक केंद्रीय कार्यालय में डटे रहे और प्रशासन से जल्द न्याय की उम्मीद जताई। यदि शीघ्र समाधान नहीं होता है, तो यह मामला और भी गंभीर रूप ले सकता है।

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