रिपोर्ट : पवन मिश्रा

गाजीपुर। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर हम आपको एक ऐसी महिला की कहानी से रूबरू करा रहे हैं, जिन्होंने संघर्ष, मेहनत और शिक्षा के बल पर सफलता की नई मिसाल कायम की है। जनपद गाजीपुर के सैदपुर तहसील में तैनात लेखपाल चित्रा चौरसिया आज कई बेटियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन चुकी हैं।

मूल रूप से जनपद अमेठी के कौरीगंज क्षेत्र की निवासी चित्रा चौरसिया के पिता हरदत्त चौरसिया और माता रामदुलारी चौरसिया हैं। सीमित संसाधनों के बावजूद परिवार ने उनकी शिक्षा में पूरा सहयोग दिया, जिसका परिणाम आज उनकी सफलता के रूप में सामने है।

चित्रा चौरसिया ने वर्ष 2000 में महाराष्ट्र बोर्ड से हाईस्कूल और 2002 में इंटरमीडिएट की परीक्षा उत्तीर्ण की। इसके बाद उन्होंने मुंबई विश्वविद्यालय से वर्ष 2005 में डबल बीए की डिग्री प्राप्त की। पढ़ाई के दौरान ही उन्होंने प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी शुरू कर दी और लगातार मेहनत करती रहीं।

उनकी मेहनत रंग लाई और वर्ष 2016 की लेखपाल भर्ती परीक्षा में उन्होंने पहले ही प्रयास में सफलता हासिल की। इसके बाद उनकी पहली नियुक्ति गाजीपुर के सैदपुर तहसील में लेखपाल के पद पर हुई। वर्तमान में वह पूरी निष्ठा और जिम्मेदारी के साथ अपने कर्तव्यों का निर्वहन कर रही हैं। उनके उत्कृष्ट कार्य को देखते हुए गाजीपुर के पुलिस अधीक्षक डॉ. इरज राजा द्वारा भी उन्हें सम्मानित किया जा चुका है।

परिवार में चित्रा चौरसिया दो बहनों और एक भाई में से एक हैं। उनकी बड़ी बहन वर्षा चौरसिया मुंबई में आईसीआईसीआई बैंक के फ्रॉड मैनेजमेंट विभाग में कार्यरत हैं, जबकि उनके भाई गुजरात में नौकरी करते हैं।

चित्रा चौरसिया की यह सफलता न केवल उनके परिवार बल्कि पूरे समाज के लिए गर्व का विषय है। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के मौके पर उनकी कहानी यह संदेश देती है कि अगर बेटियों में लगन, मेहनत और आत्मविश्वास हो तो वे हर क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बना सकती हैं और समाज के लिए प्रेरणा बन सकती हैं।

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