रिपोर्ट – पवन आजाद

वाराणसी। काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के केंद्रीय कार्यालय पर मंगलवार को उस समय स्थिति तनावपूर्ण हो गई जब छात्रों के एक बड़े दल ने सेंट्रल हिंदू स्कूल (CHS) की प्रवेश प्रक्रिया में किए गए बदलावों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। छात्र नेता विपुल सिंह के नेतृत्व में हुए इस विरोध प्रदर्शन के दौरान छात्रों और विश्वविद्यालय के प्रॉक्टोरियल बोर्ड के बीच तीखी नोकझोंक और धक्का-मुक्की भी देखने को मिली।

सुरक्षाकर्मियों से भिड़े छात्र, पुलिस बल तैनात

प्रदर्शन के दौरान माहौल तब बिगड़ गया जब प्रॉक्टोरियल बोर्ड की टीम ने छात्रों को मुख्य द्वार से हटाने की कोशिश की। देखते ही देखते बहस धक्का-मुक्की में बदल गई और सुरक्षाकर्मियों ने छात्रों को करीब 100 मीटर पीछे धकेल दिया। परिसर में बढ़ते तनाव को देखते हुए भारी पुलिस बल और प्रॉक्टोरियल बोर्ड के जवान मुस्तैद रहे।

प्रमुख मांगें और छात्रों के आरोप

प्रदर्शनकारी छात्रों ने विश्वविद्यालय प्रशासन पर मेधावी छात्र-छात्राओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने का आरोप लगाया है। उनकी मुख्य मांगें निम्नलिखित हैं:

कक्षा-9 की सीटें बहाल हों: छात्रों का कहना है कि कक्षा-9 में प्रवेश के लिए सीटों की संख्या शून्य करना विश्वविद्यालय की गरिमा के विरुद्ध है। मांग है कि या तो अतिरिक्त सेक्शन बनाए जाएं या सीटों में वृद्धि की जाए।

प्रवेश परीक्षा (SET) की वापसी: कोरोना काल से स्थगित कक्षा-6 की प्रवेश परीक्षा को तत्काल बहाल करने की मांग की गई है। छात्रों के अनुसार, पारदर्शी चयन का एकमात्र रास्ता प्रतिस्पर्धात्मक परीक्षा ही है।

हॉस्टल आवंटन की स्पष्टता: वर्ष 2026 के लिए सभी कक्षाओं के हॉस्टल आवंटन और सीटों की विस्तृत जानकारी बुलेटिन में सार्वजनिक करने की मांग उठाई गई है।

“मेधावी विद्यार्थियों को उनकी प्रतिभा दिखाने का अवसर न देना अन्यायपूर्ण है। हम CHS की सभी सीटों पर पारदर्शी प्रवेश परीक्षा की मांग करते हैं।” — विपुल सिंह, छात्र नेता

प्रशासन का रुख

मौके पर पहुंचे विश्वविद्यालय के अधिकारियों ने छात्रों को शांत कराने का प्रयास किया। हालांकि, प्रशासन की ओर से कोई ठोस लिखित आश्वासन तो नहीं मिला, लेकिन छात्रों से कुलपति के नाम संबोधित ज्ञापन लिया गया है। अधिकारियों ने आश्वासन दिया है कि इन मांगों पर उचित विचार-विमर्श किया जाएगा।

चेतावनी: छात्रों ने स्पष्ट किया है कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र निर्णय नहीं लिया गया, तो वे अपने आंदोलन को और अधिक उग्र बनाने के लिए बाध्य होंगे।

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