रिपोर्ट – पवन आजाद
वाराणसी। काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) स्थित समन्वित ग्रामीण विकास केंद्र में शनिवार को यूरोप की उच्च शिक्षा प्रणाली और सांस्कृतिक पहलुओं पर केंद्रित एक विशेष विचार-विमर्श सत्र का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में स्वीडन के यूनिवर्सिटी ऑफ गोथेनबर्ग से आए प्रतिष्ठित शिक्षाविद् प्रो. एके सैंडर (एमेरिटस प्रोफेसर, सोशियोलॉजी एवं साइकोलॉजी ऑफ रिलिजन) और प्रो. सैली बॉयड सैंडर (एमेरिटस प्रोफेसर, जनरल लिंग्विस्टिक्स) ने संकाय सदस्यों और विद्यार्थियों के साथ अपने शैक्षणिक एवं अंतरराष्ट्रीय अनुभव साझा किए।
कार्यक्रम का मुख्य विषय “यूरोप में उच्च शिक्षा के अवसर” रहा। इस दौरान यूरोप की शिक्षा प्रणाली, वहां उपलब्ध छात्रवृत्तियों, अकादमिक मोबिलिटी, शोध के अवसरों और सांस्कृतिक विविधताओं पर विस्तार से चर्चा की गई। साथ ही वैश्विक परिप्रेक्ष्य में भारत–यूरोप और अमेरिका–भारत के व्यापारिक संबंधों तथा हालिया टैरिफ मुद्दों पर भी सारगर्भित विचार रखे गए।

विचार-विमर्श सत्र के दौरान विद्यार्थियों ने यूरोपीय विश्वविद्यालयों में प्रवेश प्रक्रिया, फंडिंग, शोध सहयोग और अंतरराष्ट्रीय शैक्षणिक आदान-प्रदान से जुड़े कई प्रश्न पूछे, जिनका दोनों प्रोफेसरों ने गहराई से उत्तर दिया। प्रोफेसरों ने विद्यार्थियों को वैश्विक सोच अपनाने और अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का प्रतिनिधित्व करने के लिए प्रेरित किया।
कार्यक्रम का शुभारंभ पारंपरिक दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। अतिथियों का स्वागत करते हुए डॉ. आलोक कुमार पांडेय, समन्वयक, समन्वित ग्रामीण विकास केंद्र ने बताया कि यह केंद्र ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा को कौशल-आधारित प्रशिक्षण से जोड़ने के लिए निरंतर प्रयासरत है। उन्होंने कहा कि ऐसे अंतरराष्ट्रीय संवाद विद्यार्थियों और ग्रामीण विकास दोनों के लिए अत्यंत उपयोगी हैं।
डॉ. सुशील चतुर्वेदी ने अतिथियों का परिचय देते हुए उनके अकादमिक योगदान और अंतरराष्ट्रीय शोध कार्यों पर प्रकाश डाला। सत्र के अंत में डॉ. भूपेन्द्र प्रताप सिंह ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत करते हुए केंद्र की विभिन्न गतिविधियों और उपलब्धियों की जानकारी दी। कार्यक्रम का सफल संचालन आकाश पात्रा ने किया। इस अवसर पर अतिथियों को अंगवस्त्र और स्मृति-चिह्न (मोमेंटो) प्रदान कर सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम के उपरांत दोनों स्वीडिश प्रोफेसरों ने समन्वित ग्रामीण विकास केंद्र द्वारा संचालित सिलाई प्रशिक्षण केंद्र का भी भ्रमण किया। यहां उन्होंने प्रशिक्षिका आरती विश्वकर्मा और ग्रामीण महिलाओं द्वारा किए जा रहे कौशल-विकास एवं आजीविका-सशक्तिकरण के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने केंद्र की इस पहल को ग्रामीण आत्मनिर्भरता का उत्कृष्ट मॉडल बताते हुए इसकी मुक्त कंठ से प्रशंसा की।
समन्वित ग्रामीण विकास केंद्र ऐसे आयोजनों के माध्यम से न केवल अंतरराष्ट्रीय शैक्षणिक सहयोग को बढ़ावा दे रहा है, बल्कि ग्रामीण विकास और कौशल प्रशिक्षण के क्षेत्र में भी अपनी सशक्त भूमिका निभा रहा है।
