नशे की लत ने ली दोस्त की जान, दोस्त ही निकला हत्यारा, मर्करी नहर हत्याकांड का पुलिस ने किया खुलासा
सोनभद्र। रॉबर्ट्सगंज थाना क्षेत्र अंतर्गत मर्करी नहर में मिले अज्ञात शव के सनसनीखेज मामले का पुलिस ने खुलासा कर दिया है। यह मामला हादसा नहीं, बल्कि नशे की लत के चलते की गई एक सुनियोजित हत्या निकला। पुलिस ने इस हत्याकांड के मुख्य आरोपी को गिरफ्तार कर उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया है।
बीते 02 जनवरी 2026 को अमोली गांव के सामने मर्करी नहर में एक युवक का शव मिलने से इलाके में हड़कंप मच गया था। सूचना पर पहुंची पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर शिनाख्त का प्रयास शुरू किया। मृतक की पहचान अखिलेश यादव उर्फ कन्हैया (उम्र करीब 25 वर्ष), निवासी नौडीहा, थाना पन्नूगंज के रूप में हुई।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मृतक के शरीर पर गंभीर चोटों के निशान पाए गए, जिससे हत्या की पुष्टि हुई। इसके बाद थाना रॉबर्ट्सगंज में बीएनएस की सुसंगत धाराओं में मुकदमा दर्ज कर विवेचना शुरू की गई।
पुलिस अधीक्षक सोनभद्र अभिषेक वर्मा के निर्देश पर चार विशेष टीमों का गठन किया गया। अपर पुलिस अधीक्षक अनिल कुमार के पर्यवेक्षण और क्षेत्राधिकारी नगर रणधीर मिश्र के नेतृत्व में टीमों ने सीसीटीवी फुटेज, डिजिटल साक्ष्यों और तकनीकी जांच के आधार पर आरोपी तक पहुंच बनाई।
पुलिस ने मुख्य आरोपी सुदीप देव पांडेय उर्फ सूरज (उम्र करीब 26 वर्ष), निवासी सोरमपुर, थाना पन्नूगंज को गिरफ्तार किया। पूछताछ में आरोपी ने हत्या की पूरी कहानी कबूल की।
आरोपी ने बताया कि वह नशे का आदी है और मृतक अखिलेश उसका करीबी दोस्त था। 23 दिसंबर 2025 की शाम वह अखिलेश को अपनी बोलेरो गाड़ी से बहला-फुसलाकर अपने साथ ले गया। रास्ते में एक मेडिकल स्टोर से नशे की दवा और इंजेक्शन खरीदा गया। अपने आवास पर दोनों ने नशे का इंजेक्शन लगाया, जिससे अखिलेश की हालत बिगड़ने लगी।
घबराहट में आकर आरोपी ने अखिलेश का गला दबाकर उसकी हत्या कर दी। इसके बाद लगभग 24 घंटे से अधिक समय तक शव को घर में ही रखा, और फिर 24 व 25 दिसंबर की रात के बीच शव को बोलेरो वाहन से ले जाकर मर्करी नहर में फेंक दिया।
पुलिस ने आरोपी की निशानदेही पर हत्या में प्रयुक्त सामान और अन्य महत्वपूर्ण साक्ष्य बरामद किए हैं। आरोपी को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। पुलिस का कहना है कि मामले से जुड़े अन्य पहलुओं की भी जांच की जा रही है।
पुलिस का बयान
एएसपी अनिल कुमार ने बताया कि पुलिस अधीक्षक द्वारा मामले का 36 घंटे के भीतर खुलासा करने के निर्देश दिए गए थे, जिसे टीमों ने सीसीटीवी और डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर सफलतापूर्वक पूरा किया।
