भगतसिंह छात्र मोर्चा वाराणसी

BHU के VT से MMV तिराहे तक निकला मार्च, बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं हुए शामिल; भगतसिंह छात्र मोर्चा की वाराणसी इकाई ने किया समर्थन

वाराणसी। काशी हिंदू विश्वविद्यालय में महिला सुरक्षा, पितृसत्ता, छात्र-छात्राओं के अधिकार और विश्वविद्यालय परिसर में सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों को लेकर गुरुवार, 1 अक्टूबर को छात्र-छात्राओं ने आक्रोश मार्च निकाला। यह मार्च विश्वविद्यालय के वीटी से शुरू होकर MMV तिराहे तक निकाला गया। मार्च में बड़ी संख्या में बीएचयू के छात्र-छात्राओं ने हिस्सा लिया। भगतसिंह छात्र मोर्चा की वाराणसी इकाई ने भी मार्च में शामिल होकर प्रदर्शन का समर्थन किया। मार्च में महिला छात्राओं की भागीदारी विशेष रूप से देखने को मिली।

मार्च के दौरान छात्र-छात्राओं ने महिला सुरक्षा, छात्राओं के साथ कथित भेदभाव, नैतिक निगरानी और विश्वविद्यालय परिसर की सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाया। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि महिलाओं के खिलाफ होने वाली हिंसा और भेदभाव को केवल कानून-व्यवस्था के नजरिए से नहीं देखा जा सकता। इसके पीछे समाज में मौजूद पितृसत्तात्मक सोच और असमानता की भूमिका भी है। छात्र-छात्राओं ने महिला अधिकारों, सम्मान और समानता को लेकर अपनी आवाज बुलंद की।

महिला सुरक्षा को लेकर उठाए सवाल

प्रदर्शन के दौरान छात्राओं की सुरक्षा को लेकर विश्वविद्यालय प्रशासन की व्यवस्था पर भी सवाल उठाए गए। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि विश्वविद्यालय में पढ़ने वाली छात्राओं को सुरक्षित और समान माहौल मिलना जरूरी है। छात्राओं से जुड़े मामलों में शिकायतों को गंभीरता से लेने और उनकी निष्पक्ष जांच किए जाने की मांग भी उठाई गई।

महिला सुरक्षा आक्रोश मार्च BHU

भगतसिंह छात्र मोर्चा की वाराणसी इकाई की ओर से जारी बयान में देश में महिलाओं के खिलाफ अपराधों को लेकर केंद्र और राज्य सरकारों तथा राजनीतिक दलों की भूमिका पर सवाल उठाए गए। संगठन का आरोप है कि चुनावी दौर में महिला सुरक्षा का मुद्दा प्रमुखता से उठाया जाता है, लेकिन महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराधों के मामलों में प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित नहीं की जाती।

प्रदर्शनकारियों ने विभिन्न चर्चित मामलों का हवाला देते हुए राजनीतिक और धार्मिक रूप से प्रभावशाली लोगों के खिलाफ भी कार्रवाई की मांग उठाई। उनका कहना था कि महिलाओं के खिलाफ अपराध के मामलों में किसी भी तरह के प्रभाव या दबाव से अलग हटकर कार्रवाई होनी चाहिए।

छात्राओं को मार्च में रोकने का आरोप

भगतसिंह छात्र मोर्चा ने आरोप लगाया कि मार्च में छात्राओं की भागीदारी को रोकने के लिए पहले से प्रयास किए गए थे। संगठन का कहना है कि इसके बावजूद बड़ी संख्या में महिला छात्राएं मार्च में शामिल हुईं और उन्होंने महिला सुरक्षा, सम्मान और अधिकारों से जुड़े मुद्दों पर अपनी आवाज उठाई।

महिला सुरक्षा आक्रोश मार्च BHU

प्रदर्शनकारियों ने कहा कि छात्राओं की भागीदारी यह दिखाती है कि वे अपने अधिकारों और सुरक्षा से जुड़े सवालों को लेकर स्वयं सामने आ रही हैं। मार्च में शामिल छात्राओं ने विश्वविद्यालय परिसर में अपने लिए सुरक्षित वातावरण, समान अधिकार और शिकायतों पर उचित कार्रवाई की मांग रखी।

सुरक्षा कर्मचारियों के व्यवहार पर भी सवाल

मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों ने बीएचयू परिसर में महिला छात्रों के साथ सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े व्यवहार पर भी सवाल उठाए। संगठन का आरोप है कि अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन करने वाली महिला छात्राओं के साथ पुरुष सुरक्षा कर्मचारियों द्वारा दुर्व्यवहार और बल प्रयोग जैसी घटनाएं होती रही हैं। साथ ही छात्राओं पर नैतिक निगरानी किए जाने का भी आरोप लगाया गया।

महिला सुरक्षा आक्रोश मार्च BHU

प्रदर्शनकारियों का कहना था कि इस तरह की शिकायतों के सामने आने पर विश्वविद्यालय प्रशासन को निष्पक्ष तरीके से मामले की जांच करनी चाहिए। शिकायत करने वाली छात्राओं की बात सुनी जाए और जांच के बाद जो भी व्यक्ति दोषी पाया जाए, उसके खिलाफ कार्रवाई की जाए।

विश्वविद्यालय प्रशासन पर लगाए आरोप

भगतसिंह छात्र मोर्चा की ओर से विश्वविद्यालय प्रशासन पर भी गंभीर आरोप लगाए गए। संगठन का आरोप है कि छात्र आंदोलनों से जुड़े मामलों में छात्रों की मांगों पर बातचीत करने के बजाय उनके खिलाफ समितियां गठित कर मानसिक दबाव बनाने का प्रयास किया जाता है।

महिला सुरक्षा आक्रोश मार्च BHU

प्रदर्शनकारियों ने कहा कि विश्वविद्यालय केवल शिक्षा प्राप्त करने की जगह नहीं है, बल्कि यहां छात्र-छात्राओं को अपनी बात रखने और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी मांगों को सामने रखने का अधिकार भी होना चाहिए। उन्होंने विश्वविद्यालय परिसर में शिकायत व्यवस्था को पारदर्शी बनाने, शिकायतों की निष्पक्ष जांच करने और दोषी पाए जाने वाले लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।

पितृसत्ता और आर्थिक असमानता का मुद्दा

आक्रोश मार्च के दौरान वक्ताओं ने पितृसत्ता को सामाजिक और आर्थिक असमानता से भी जोड़कर देखा। उनका कहना था कि महिलाओं की वास्तविक मुक्ति के लिए केवल कानून बनाना पर्याप्त नहीं है। समाज में महिलाओं और पुरुषों के बीच समानता की सोच को मजबूत करने की जरूरत है।

महिला सुरक्षा आक्रोश मार्च BHU

वक्ताओं ने कहा कि महिलाओं के खिलाफ भेदभाव और हिंसा को खत्म करने के लिए सामाजिक सोच में बदलाव जरूरी है। महिलाओं को शिक्षा, रोजगार, सुरक्षा और निर्णय लेने के समान अधिकार मिलने चाहिए। प्रदर्शनकारियों ने महिला अधिकारों के सवाल को व्यापक सामाजिक और आर्थिक समानता से जोड़ते हुए अपनी बात रखी।

छात्रों और समाज से एकजुट होने की अपील

भगतसिंह छात्र मोर्चा ने अपने बयान में छात्रों, मजदूरों, शिक्षकों और बुद्धिजीवियों से महिला अधिकारों तथा सामाजिक समानता के मुद्दों पर एकजुट होने की अपील की। संगठन ने कहा कि महिलाओं की मुक्ति और सामाजिक परिवर्तन के संघर्ष को अलग-अलग करके नहीं देखा जा सकता।

भगतसिंह छात्र मोर्चा वाराणसी

 

प्रदर्शनकारियों ने कहा कि महिला सुरक्षा केवल छात्राओं का मुद्दा नहीं है, बल्कि यह पूरे समाज से जुड़ा सवाल है। विश्वविद्यालयों में छात्राओं को ऐसा वातावरण मिलना चाहिए, जहां वे बिना डर के अपनी पढ़ाई कर सकें और अपनी बात रख सकें।

मार्च के दौरान महिला सुरक्षा, समानता, छात्र अधिकार और सुरक्षित शैक्षणिक वातावरण की मांग लगातार प्रमुखता से उठाई गई। प्रदर्शन के समापन पर छात्र-छात्राओं से इन मुद्दों पर अपनी आवाज उठाते रहने और संगठित होकर संघर्ष करने का आह्वान किया गया।

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