67.42 मीटर पर पहुंचा जलस्तर, पानी पीछे हटने के बाद सामने आई घाटों की बदहाल स्थिति; पर्व-त्योहारों से पहले सफाई की मांग
वाराणसी। गंगा के जलस्तर में लगातार गिरावट आने से वाराणसी में लोगों ने राहत की सांस ली है। बीते दिनों बढ़े जलस्तर के कारण गंगा के किनारे के कई हिस्सों में पानी पहुंच गया था। अब पानी पीछे हटने लगा है तो घाटों की सीढ़ियां दोबारा दिखाई देने लगी हैं। हालांकि, जलस्तर कम होने के साथ ही घाटों पर सफाई की चुनौती भी सामने आ गई है। अस्सी घाट पर पानी उतरने के बाद सीढ़ियों और आसपास के हिस्सों में बड़ी मात्रा में मिट्टी और गाद जमा है। इससे घाट पर आने वाले श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों को परेशानी हो रही हैम्म
केंद्रीय जल आयोग के आंकड़ों के अनुसार, शुक्रवार 2 अक्टूबर को दोपहर 12 बजे वाराणसी में गंगा का जलस्तर 67.42 मीटर दर्ज किया गया। वाराणसी में गंगा का चेतावनी स्तर 70.262 मीटर है। इस लिहाज से वर्तमान जलç0çस्तर चेतावनी बिंदु से करीब 2.84 मीटर नीचे है। जलस्तर कम होने से घा6zzxटों पर पानी का दबाव घटा है और सीढ़ियां धीरे-धीरे खाली हो रही हैं।
पानी उतरने के बाद सीढ़ियों पर जमी गाद
अस्सी घाट पर गंगा का पानी पीछे हटने के बाद सीढ़ियों पर मिट्टी और गाद की मोटी परत दिखाई दे रही है। कई जगहों पर सीढ़ियों का बड़ा हिस्सा मिट्टी से ढका हुआ है। इससे लोगों को सीढ़ियों से उतरने और चढ़ने में दिक्कत हो रही है। घाट पर आने वाले लोगों के लिए यह स्थिति परेशानी का कारण बन रही है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि गंगा का जलस्तर कम होने के बाद अब घाटों की सफाई को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। पानी के साथ आई मिट्टी और गाद यदि समय रहते नहीं हटाई गई तो यह सूखने के बाद सीढ़ियों पर जम सकती है। वहीं, बारिश या दोबारा पानी बढ़ने की स्थिति में यही गाद और मिट्टी घाट के दूसरे हिस्सों में भी फैल सकती है।
श्रद्धालुओं की बढ़ने वाली है भीड़
काशी के घाट धार्मिक और पर्यटन गतिविधियों के प्रमुख केंद्र हैं। आने वाले दिनों में पर्व और त्योहारों के चलते घाटों पर श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ने वाली है। ऐसे में स्थानीय लोगों को चिंता है कि यदि घाटों की सीढ़ियों की सफाई समय से नहीं हुई तो श्रद्धालुओं को मिट्टी और गाद के बीच से होकर गुजरना पड़ सकता है।
लोगों ने नगर निगम से मांग की है कि अस्सी घाट समेत प्रमुख घाटों पर विशेष सफाई अभियान चलाया जाए। सिर्फ सीढ़ियों की सफाई ही नहीं, बल्कि घाट के किनारे और आसपास जमा मिट्टी को भी हटाया जाए, ताकि आने वाले लोगों को साफ-सुथरा वातावरण मिल सके।
सफाई के साथ सुरक्षा पर भी जोर
घाटों पर जमा मिट्टी के कारण कई जगह सीढ़ियां स्पष्ट नजर नहीं आ रही हैं। ऐसे में लोगों के फिसलने की आशंका बनी रहती है। खासकर बुजुर्गों, बच्चों और दूसरे श्रद्धालुओं को सीढ़ियों से आवागमन के दौरान अतिरिक्त सावधानी बरतनी पड़ सकती है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि नगर निगम को जलस्तर घटने का फायदा उठाते हुए सफाईकर्मियों की संख्या बढ़ानी चाहिए। जिन स्थानों पर गाद अधिक जमा है, वहां प्राथमिकता के आधार पर सफाई कराई जानी चाहिए। इसके साथ ही घाटों की स्थिति की नियमित निगरानी भी जरूरी है, ताकि पानी घटने के बाद पैदा हुई समस्याओं को समय रहते दूर किया जा सके।
चेतावनी स्तर से नीचे पहुंचा गंगा का पानी
केंद्रीय जल आयोग के अनुसार वाराणसी में गंगा का चेतावनी स्तर 70.262 मीटर, खतरे का स्तर 71.262 मीटर और अब तक का उच्चतम बाढ़ स्तर 73.901 मीटर दर्ज किया गया है। शुक्रवार दोपहर 12 बजे जलस्तर 67.42 मीटर रहा।
गंगा के जलस्तर में कमी निश्चित तौर पर घाटों पर सामान्य गतिविधियों के लिए राहत लेकर आई है, लेकिन पानी उतरने के बाद जमा हुई मिट्टी और गाद अब नई समस्या बन गई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि पर्व-त्योहारों से पहले घाटों की सफाई पूरी कर दी जाए, ताकि श्रद्धालुओं को किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।

फिलहाल लोगों की नजर गंगा के जलस्तर के साथ-साथ घाटों की सफाई व्यवस्था पर भी है। जलस्तर कम होने के बाद घाटों को साफ और व्यवस्थित करने की जिम्मेदारी अब नगर निगम की ओर से उठाए जाने वाले कदमों पर निर्भर है।
