शिव महापुराण कथा के समापन पर अस्सी स्थित मारवाड़ी सेवा संघ में हुआ विशेष धार्मिक अनुष्ठान, दंडी स्वामियों और बटुक ब्राह्मणों का हुआ सम्मान
रिपोर्टर : गोपी गुप्ता
वाराणसी। 5 दिवसीय शिव महापुराण कथा के समापन के बाद रविवार को अस्सी स्थित मारवाड़ी सेवा संघ में लोक कल्याण की कामना से विशेष धार्मिक अनुष्ठान का आयोजन किया गया। धार्मिक अनुष्ठान के दौरान दंडी स्वामियों और बटुक
ब्राह्मणों ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच भगवान लक्ष्मी नारायण का विधि-विधान से सामूहिक पूजन और वंदना की। इस दौरान देश, समाज और समस्त जनमानस के सुख, शांति, समृद्धि और कल्याण की कामना की गई।
शिव महापुराण कथा के समापन के बाद आयोजित इस विशेष पूजन कार्यक्रम में सुबह से ही धार्मिक वातावरण बना रहा। बटुक ब्राह्मणों ने एक साथ वैदिक मंत्रों का उच्चारण करते हुए भगवान लक्ष्मी नारायण की पूजा-अर्चना की। पूजन के दौरान श्रद्धालुओं ने भी सहभागिता की और भगवान के समक्ष लोक कल्याण एवं विश्व शांति की प्रार्थना की। वैदिक मंत्रोच्चार और धार्मिक अनुष्ठान से मारवाड़ी सेवा संघ का पूरा परिसर भक्तिमय नजर आया।
लोक कल्याण की भावना से हुआ पूजन
कार्यक्रम की आयोजक आरती विनोद सुनेजा ने कहा कि काशी की धार्मिक और आध्यात्मिक परंपराओं का अपना विशेष महत्व है। काशी को भगवान शिव और बाबा विश्वनाथ की नगरी के रूप में जाना जाता है। यहां धार्मिक और शुभ कार्यों को बाबा विश्वनाथ के आशीर्वाद से जोड़कर देखा जाता है। इसी भावना के साथ लोक कल्याण के उद्देश्य से भगवान लक्ष्मी नारायण का सामूहिक पूजन कराया गया।
उन्होंने कहा कि धार्मिक आयोजन केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं हैं। इनके माध्यम से समाज में लोगों को अपनी संस्कृति, परंपरा और धार्मिक मूल्यों से जुड़ने का अवसर मिलता है। वर्तमान समय में ऐसे आयोजनों के माध्यम से समाज में आपसी प्रेम, सद्भाव, सेवा और सहयोग की भावना को मजबूत किया जा सकता है।

आरती विनोद सुनेजा ने कहा कि भगवान लक्ष्मी नारायण के समक्ष सभी के सुख, शांति और समृद्धि की कामना की गई। आयोजन का उद्देश्य समाज और जनमानस के कल्याण के लिए प्रार्थना करना रहा।
दंडी स्वामियों और बटुक ब्राह्मणों का सम्मान
शिव महापुराण कथा के समापन के अवसर पर आयोजित धार्मिक अनुष्ठान में दंडी स्वामियों और बटुक ब्राह्मणों का सम्मान भी किया गया। आयोजकों की ओर से उन्हें प्रसाद और उपहार प्रदान किए गए। श्रद्धालुओं ने भी दंडी स्वामियों और बटुक ब्राह्मणों के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त की।
कार्यक्रम के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे। लोगों ने धार्मिक अनुष्ठान में हिस्सा लेकर भगवान लक्ष्मी नारायण का आशीर्वाद प्राप्त किया। वैदिक मंत्रोच्चार के बीच श्रद्धालुओं ने देश और समाज में सुख-शांति की कामना की।
धार्मिक आयोजनों से जुड़ती है नई पीढ़ी


आयोजक आरती विनोद सुनेजा ने कहा कि धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजनों के माध्यम से नई पीढ़ी को भी अपनी परंपराओं के बारे में जानकारी मिलती है। ऐसे आयोजनों में बटुक ब्राह्मणों की सहभागिता से वैदिक परंपराओं और धार्मिक अनुष्ठानों को समझने का अवसर मिलता है। उन्होंने कहा कि धार्मिक कार्यक्रमों के साथ सेवा, सहयोग और लोक कल्याण की भावना को भी आगे बढ़ाने की जरूरत है।
उन्होंने कहा कि काशी की पहचान उसकी धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं से है। यहां समय-समय पर होने वाले धार्मिक आयोजन लोगों को एक साथ जोड़ने का कार्य करते हैं। सामूहिक पूजन और धार्मिक अनुष्ठान में अलग-अलग वर्गों के लोग एक साथ शामिल होकर लोक कल्याण की प्रार्थना करते हैं।
भक्तिमय वातावरण में हुआ प्रसाद वितरण
पूजन और धार्मिक अनुष्ठान के समापन के बाद श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद का वितरण किया गया। लोगों ने श्रद्धापूर्वक प्रसाद ग्रहण किया। कार्यक्रम में कौशल्या देवी, वंश कुमार, सतपाल, राकेश कालरा और राजीव कटारिया सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु एवं गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
कार्यक्रम में मौजूद श्रद्धालुओं ने भगवान लक्ष्मी नारायण के समक्ष सुख, शांति, समृद्धि और लोक कल्याण की कामना की। इस दौरान पूरा परिसर धार्मिक माहौल में नजर आया। शिव महापुराण कथा के पांच दिवसीय आयोजन के समापन के बाद हुए इस विशेष अनुष्ठान ने धार्मिक कार्यक्रम को एक और आध्यात्मिक स्वरूप दिया।
आयोजकों ने कहा कि काशी की धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं को आगे बढ़ाने के साथ समाज में आध्यात्मिक चेतना को मजबूत करने के लिए भविष्य में भी इस प्रकार के धार्मिक और सामाजिक आयोजन किए जाते रहेंगे। आयोजकों का कहना है कि धार्मिक आयोजनों के माध्यम से समाज में सद्भाव, सेवा और सहयोग की भावना को बढ़ावा देने का प्रयास जारी रहेगा।
