वाराणसी: बजरडीहा-जोल्हा वार्ड नंबर 27 में लंबे समय से जमा गंदे पानी से लोग परेशान, बच्चों-बुजुर्गों और महिलाओं की बढ़ी मुश्किलें; स्थानीय लोगों ने स्थायी जलनिकासी की मांग उठाई
वाराणसी। स्मार्ट सिटी के रूप में विकसित हो रहे वाराणसी में जलनिकासी व्यवस्था को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो रहे हैं। 390 कैंट विधानसभा क्षेत्र के बजरडीहा-जोल्हा दक्षिणी, वार्ड नंबर 27 में स्थानीय नागरिकों के अनुसार करीब छह महीने से जलभराव की समस्या बनी हुई है। क्षेत्र की कई गलियों में लंबे समय से गंदा पानी जमा है, जिससे लोगों का सामान्य आवागमन तक मुश्किल हो गया है। हालात यह हैं कि कई गलियां तालाब का रूप ले चुकी हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि क्षेत्र में जलनिकासी की समुचित व्यवस्था नहीं होने के कारण बारिश और गंदा पानी गलियों में जमा रहता है। पानी की निकासी का रास्ता नहीं होने के चलते लोगों को रोजमर्रा के जरूरी कामों के लिए भी इसी जलभराव के बीच से गुजरना पड़ रहा है। सबसे ज्यादा परेशानी बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं को हो रही है।
छह महीने से बनी हुई है समस्या
स्थानीय नागरिकों के मुताबिक जलभराव कोई नई या कुछ दिनों की समस्या नहीं है। करीब छह महीने से क्षेत्र में पानी जमा होने की स्थिति बनी हुई है। लगातार पानी खड़ा रहने से गलियों में कीचड़ और गंदगी बढ़ गई है। कई जगहों पर लोगों को अपने घरों तक पहुंचने में भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

लोगों का कहना है कि बारिश होने के बाद स्थिति और खराब हो जाती है। पहले से जमा पानी में बारिश का पानी मिल जाने से गलियों में जलस्तर बढ़ जाता है। इसके बावजूद स्थायी जलनिकासी को लेकर प्रभावी कदम नहीं उठाए जाने से लोगों में नाराजगी है।
गंदे पानी से संक्रमण का खतरा
कई महीनों से जमा पानी के कारण क्षेत्र में दुर्गंध की समस्या भी बढ़ गई है। स्थानीय लोगों के अनुसार जलभराव के कारण मच्छरों का प्रकोप बढ़ रहा है। इससे डेंगू, मलेरिया समेत अन्य संक्रामक बीमारियों का खतरा बना हुआ है।

नागरिकों का कहना है कि यदि लंबे समय तक गंदा पानी इसी तरह जमा रहा तो इसका असर बच्चों और बुजुर्गों के स्वास्थ्य पर भी पड़ सकता है। लोगों ने मांग की है कि तत्काल जलभराव वाले स्थानों से पानी निकाला जाए और नालियों की सफाई कराई जाए।
स्मार्ट सिटी के दावों पर सवाल
जलभराव की इस स्थिति ने वाराणसी में स्मार्ट सिटी और विकास कार्यों के दावों पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि शहर के कई हिस्सों में विकास और सौंदर्यीकरण के बड़े प्रोजेक्ट चल रहे हैं, लेकिन दूसरी ओर कुछ इलाकों में बुनियादी जलनिकासी की समस्या महीनों से बनी हुई है।

लोगों का कहना है कि किसी इलाके की गलियों में छह महीने तक पानी जमा रहना सामान्य स्थिति नहीं है। इसके लिए जलनिकासी व्यवस्था की तकनीकी जांच कर यह पता लगाया जाना चाहिए कि पानी की निकासी में बाधा कहां है और उसका स्थायी समाधान कैसे किया जा सकता है।
जनप्रतिनिधियों से भी जवाब की मांग
स्थानीय नागरिकों ने क्षेत्र की समस्या को लेकर जनप्रतिनिधियों से भी जवाब मांगा है। लोगों का कहना है कि सौरभ श्रीवास्तव के विधानसभा क्षेत्र में यदि किसी वार्ड की गलियों में महीनों से जलभराव की स्थिति बनी हुई है, तो संबंधित विभागों और जनप्रतिनिधियों को इसकी गंभीरता से समीक्षा करनी चाहिए।

नागरिकों का कहना है कि केवल कुछ समय के लिए पंप लगाकर पानी निकाल देना पर्याप्त नहीं होगा। यदि जलनिकासी की मूल समस्या दूर नहीं की गई तो बारिश के बाद दोबारा यही स्थिति पैदा हो सकती है। इसलिए नालियों, सीवर लाइन और पानी के निकासी मार्ग की पूरी जांच जरूरी है।
स्थायी समाधान की मांग
स्थानीय लोगों ने नगर निगम और जिला प्रशासन से तत्काल मौके का निरीक्षण कराने की मांग की है। इसके साथ ही जमा पानी की निकासी, नालियों की सफाई और जलनिकासी मार्ग की जांच कराने की अपील की गई है। जहां जरूरत हो, वहां नई नाली या पाइपलाइन की व्यवस्था किए जाने की भी मांग उठाई गई है।

क्षेत्रवासियों का कहना है कि जब तक समस्या का स्थायी समाधान नहीं होता, तब तक नियमित रूप से जलनिकासी और साफ-सफाई की व्यवस्था होनी चाहिए। लोगों को गंदे पानी और दुर्गंध के बीच रहने के लिए मजबूर नहीं किया जाना चाहिए।
अब क्षेत्रवासियों की निगाह नगर निगम और प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी है। स्थानीय लोगों का सीधा सवाल है कि जब वाराणसी को स्मार्ट सिटी के तौर पर विकसित किया जा रहा है, तो बजरडीहा-जोल्हा दक्षिणी की गलियां छह महीने से जलमग्न क्यों हैं और इस समस्या का स्थायी समाधान आखिर कब होगा?
