रिपोर्ट- पवन आजाद

वाराणसी। काशी की आध्यात्मिक धरा पर पर्यावरण संरक्षण का एक नया अध्याय जुड़ गया है। डोमरी (सुजाबाद) में नगर निगम द्वारा विकसित किया जा रहा ‘ग्रीन काशी’ प्रोजेक्ट अब धरातल पर जीवंत रूप ले रहा है। बुधवार को महापौर अशोक कुमार तिवारी और नगर आयुक्त हिंमाशु नागपाल ने मियावाकी तकनीक से विकसित हो रहे इस विशाल वन क्षेत्र का स्थलीय निरीक्षण किया और पौधों की प्रगति पर संतोष व्यक्त किया।

भीषण गर्मी से बचाव के लिए ‘सुरक्षा कवच’ का निर्देश

बढ़ते तापमान और भीषण गर्मी को देखते हुए महापौर ने पौधों के संरक्षण के लिए विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि:

ग्रीन नेट का प्रयोग: कोमल पौधों को सीधी धूप और लू से बचाने के लिए आवश्यकतानुसार ग्रीन नेट का ‘सुरक्षा कवच’ लगाया जाए।

हाईटेक सिंचाई: सिंचाई व्यवस्था को प्रभावी बनाने के लिए रेनगन सिस्टम का निरंतर उपयोग सुनिश्चित किया जाए।

पोषण एवं देखरेख: पौधों की नियमित निराई-गुड़ाई और समय पर खाद उपलब्ध कराने पर बल दिया गया, ताकि जड़ों तक नमी और हवा का संचार बना रहे।

काशी के 60 घाटों के स्वरूप में विभाजित है ‘महावन’

350 बीघा में फैला यह वन क्षेत्र काशी की सांस्कृतिक विरासत को भी समेटे हुए है। इसकी प्रमुख विशेषताएं निम्नलिखित हैं:

60 सेक्टर: पूरे वन क्षेत्र को काशी के दशाश्वमेध, मणिकर्णिका और अस्सी जैसे 60 ऐतिहासिक घाटों के नाम पर अलग-अलग सेक्टरों में बांटा गया है।

विविध प्रजातियां: यहां शीशम, सागौन और अर्जुन जैसी 27 देशी प्रजातियों के साथ-साथ अश्वगंधा और गिलोय जैसे औषधीय पौधे रोपे गए हैं।

विश्व कीर्तिमान: बता दें कि 1 मार्च को नगर निगम ने महज एक घंटे में 2,51,446 पौधे रोपकर विश्व कीर्तिमान स्थापित किया था, जिसकी सराहना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी कर चुके हैं।

सुरक्षा के कड़े इंतजाम

इतने विशाल हरित क्षेत्र की सुरक्षा के लिए नगर निगम ने हाईटेक इंतजाम किए हैं। पूरे क्षेत्र की निगरानी 25 सीसीटीवी कैमरों के जरिए की जा रही है। रात में रोशनी के लिए 20 हाईमास्क लाइटें लगाई गई हैं और 24 घंटे सुरक्षा गार्डों की तैनाती की गई है।

“यह ग्रीन काशी भविष्य में न केवल ऑक्सीजन का भंडार बनेगी, बल्कि गंगा किनारे एक हरित विरासत के रूप में काशी की शोभा बढ़ाएगी और भविष्य में आय सृजन का माध्यम भी बनेगी।” – अशोक कुमार तिवारी, महापौर

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