रिपोर्ट – पवन आजाद 

वाराणसी। वाराणसी में ‘बनारस क्वियर-ट्रांस’ और ‘किन्नर संगठन’ के संयुक्त तत्वावधान में संसद में प्रस्तावित ‘ट्रांसजेंडर अधिकार संशोधन बिल 2026’ के खिलाफ जोरदार विरोध प्रदर्शन किया गया। समुदाय के प्रतिनिधियों ने इस बिल को ट्रांस नागरिकों की गरिमा, स्वायत्तता और संवैधानिक अधिकारों पर हमला करार देते हुए इसे तुरंत रद्द करने की मांग की।


पहचान पर नियंत्रण बर्दाश्त नहीं: सलमा चौधरी
किन्नर समाज की प्रतिनिधि सलमा चौधरी ने सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा, “हमारा लिंग क्या है, यह हम तय करेंगे या मोदी सरकार? ऐसा कानून जो हमारी पहचान पर नियंत्रण करे, हमें स्वीकार नहीं है। यह बिल हमें प्रशासनिक जांच और बाबूशाही के भ्रष्ट तंत्र में धकेलने की साजिश है।”
सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का उल्लंघन
क्वीयर अधिकार कार्यकर्ता नीति ने बिल की खामियों पर प्रकाश डालते हुए बताया कि यह विधेयक सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक ‘NALSA बनाम भारत संघ’ फैसले की सीधी अवहेलना है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि हर व्यक्ति को अपनी जेंडर पहचान तय करने का मौलिक अधिकार है, लेकिन यह नया बिल ट्रांस नागरिकों को मेडिकल बोर्ड और जिला मजिस्ट्रेट (DM) की मंजूरी के लिए मजबूर करता है। ‘बॉडी स्क्रीनिंग’ जैसी प्रक्रिया समुदाय के लिए अपमानजनक और डरावनी है।
संशोधन बिल की मुख्य आपत्तियाँ:
विज्ञप्ति के माध्यम से संगठन ने बिल की 15 प्रमुख खामियों को रेखांकित किया:
सीमित परिभाषा: बिल में ट्रांसजेंडर की परिभाषा को बेहद संकुचित कर दिया गया है, जिससे ट्रांस पुरुष, ट्रांस महिला और नॉन-बाइनरी लोग कानूनी दायरे से बाहर हो सकते हैं।
सहयोग का अपराधीकरण: “ट्रांसजेंडर बनने के लिए उकसाना अपराध है” जैसे अस्पष्ट प्रावधानों से समुदाय के भीतर एक-दूसरे की मदद करने वाले साथियों और संगठनों को अपराधी बनाया जा सकता है।
असमान सजा: ट्रांस लोगों के खिलाफ हिंसा के मामलों में सजा को भारतीय न्याय संहिता (BNS) की तुलना में काफी कम रखा गया है।
सर्जरी की बाध्यता: मेडिकल सर्जरी या लिंग परिवर्तन को ही पहचान का आधार बनाना उन लोगों के लिए खतरा है जो बिना सर्जरी के अपनी पहचान में जीते हैं।
एकजुटता की अपील
कार्यक्रम का संचालन करते हुए शहन किन्नर ने इसे ‘काला कानून’ बताते हुए कहा कि जो कानून सुरक्षा के लिए होने चाहिए थे, वे अब अधिकार छीनने का जरिया बन रहे हैं। बोबी किन्नर और कोमल किन्नर ने भी सभी सामाजिक संगठनों और नागरिकों से इस भेदभावपूर्ण बिल के खिलाफ एकजुट होने की अपील की।
प्रमुख माँगें:
प्रस्तावित ट्रांसजेंडर संशोधन बिल 2026 को तुरंत वापस लिया जाए।
ट्रांसजेंडर एक्ट 2019 को संशोधनों के बजाय और अधिक सुधार कर संरक्षित किया जाए।
आत्म-पहचान के अधिकार को बिना किसी मेडिकल बोर्ड के लागू किया जाए।
इस विरोध प्रदर्शन में माही किन्नर, मोनिका, अनामिका, रुमान, कृष्णा, हेतवी, सैम, कार्तिक, दक्ष और काजल किन्नर समेत सैकड़ों की संख्या में समुदाय के सदस्य और सहयोगी उपस्थित रहे।
प्रेषक:
सलमा चौधरी / नीति
बनारस क्वियर-ट्रांस, किन्नर संगठन

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