रिपोर्ट – पवन आजाद
वाराणसी | श्री मानसरोवर तीर्थ क्षेत्र स्थित श्री रामातरक आंध्र आश्रम के प्रांगण में आयोजित ‘श्री राम साम्राज्य पट्टाभिषेक महोत्सव’ का पाँचवाँ दिन वानर राज सुग्रीव की महिमा और भक्ति के नाम रहा। सोमवार को आयोजित अनुष्ठानों में यज्ञ मंडप के भीतर वानर प्रमुखों के निमित्त विशेष आहुतियां दी गईं, वहीं रामालय मंडप में वाल्मीकि रामायण के किष्किंधा कांड के पारायण को पूर्णता प्रदान की गई।
हनुमान जी की विद्वता से अभिभूत हुए प्रभु श्री राम
महोत्सव के मुख्य आचार्य श्री उलीमिरी सोमायाजुलू ने प्रसंग की व्याख्या करते हुए बताया कि जब माता सीता की खोज में निकले श्री राम और लक्ष्मण की भेंट ऋष्यमूक पर्वत पर हनुमान जी से हुई, तो प्रभु उनकी पहली ही मुलाकात में उनके विनय, विवेक और प्रकांड विद्वता से अत्यंत प्रभावित हुए। आचार्य ने रेखांकित किया कि यह हनुमान जी का ही कौशल था जिसने श्री राम और सुग्रीव की मैत्री कराई, जिससे सुग्रीव का नाम रामायण में प्रभु के अभिन्न मित्र के रूप में अमर हो गया।
अनुष्ठानों की गरिमा और सहभागिता
यज्ञ मंडप में वैदिक विद्वानों ने वाल्मीकि रामायण के विशिष्ट अध्यायों के पुण्यश्लोक मंत्रों के साथ आहुतियां अर्पित कीं।
मुख्य यजमान: आश्रम के मैनेजिंग ट्रस्टी वीवी सुंदर शास्त्री ने सविधि पूजन संपन्न किया।
संयोजन: आश्रम के प्रबंधक वीवी सीताराम द्वारा दोनों मंडपों के सत्रों का सुचारू संचालन किया गया।
इस अवसर पर मुख्य रूप से एम.वी. प्रकाश राय, पी. रमेश, बी. कृष्ण मूर्ति, श्रीमती कंडाला सत्यवानी, पप्पू कृष्ण प्रसाद और मंडपाका अंजनेय मूर्ति सहित कई श्रद्धालु उपस्थित रहे।
विशेष: महोत्सव के अगले चरण में अब सुंदरकांड के पारायण और लंका विजय के प्रसंगों पर चर्चा की जाएगी।
