रिपोर्ट – गोपी गुप्ता 

वाराणसी। काशी के प्रसिद्ध संकट मोचन मंदिर के प्रांगण में आयोजित संगीत समारोह उस समय भक्ति और सुरों के संगम में डूब गया, जब कश्मीर से आए कलाकार ने अपने संतूर वादन से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
सुरमई हुआ मंदिर परिसर

 

कार्यक्रम के दौरान जैसे ही संतूर के तारों पर चोट पड़ी, उसकी झंकार ने पूरे वातावरण को सुरमई बना दिया। कश्मीरी कलाकार ने अपनी प्रस्तुति में संगीत की बारीकियों और भावपूर्ण रागों का ऐसा ताना-बना बुना कि उपस्थित श्रोता आत्मविभोर हो उठे। मंदिर परिसर में गूंजती संतूर की मधुर स्वरलहरियों ने आध्यात्मिक शांति का अहसास कराया।
श्रोताओं ने की प्रशंसा
संगीत प्रेमी हर धुन पर मंत्रमुग्ध दिखे और तालियों की गड़गड़ाहट के साथ कलाकार का उत्साहवर्धन किया। कार्यक्रम में उपस्थित लोगों का कहना था कि कश्मीर की इस पारंपरिक वाद्य कला को काशी की धरती पर सुनना एक अनूठा अनुभव रहा।
प्रमुख बिंदु:
स्थान: संकट मोचन मंदिर परिसर, वाराणसी।
कलाकार: कश्मीर से आए प्रख्यात संतूर वादक।
मुख्य आकर्षण: शास्त्रीय संगीत की बारीकियां और भावपूर्ण प्रस्तुति।
उपस्थिति: बड़ी संख्या में स्थानीय संगीत प्रेमी और श्रद्धालु मौजूद रहे।
यह आयोजन न केवल कला के आदान-प्रदान का माध्यम बना, बल्कि इसने एक बार फिर सिद्ध किया कि संगीत की कोई सीमा नहीं होती और यह सीधे दिल को छूती है।

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