रिपोर्ट-  सुप्रिया गुप्ता

वाराणसी। 04 अप्रैल,36वीं वाहिनी पीएसी, रामनगर के रवींद्रालय सभागार में आज ‘फॉरेंसिक विज्ञान’ (Forensic Science) विषय पर एक विशेष सेमिनार का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम वाहिनी के सेनानायक डॉ. अनिल कुमार पाण्डेय (IPS) के कुशल निर्देशन एवं गरिमामयी उपस्थिति में संपन्न हुआ। सेमिनार का मुख्य उद्देश्य जवानों और आधारभूत प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे रिक्रूटों (RTC) को आधुनिक जांच प्रणालियों से अवगत कराना था।

वैज्ञानिक विश्लेषण और डिजिटल साक्ष्यों पर जोर

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सेनानायक डॉ. अनिल कुमार पाण्डेय ने फॉरेंसिक विज्ञान के विभिन्न आयामों पर विस्तृत प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि:

कानूनी और आपराधिक जांच में वैज्ञानिक सिद्धांतों का प्रयोग कैसे किया जाता है।

डिजिटल फॉरेंसिक और विशेषज्ञ गवाही (Expert Testimony) का न्याय प्रक्रिया में क्या महत्व है।

घटनास्थल पर साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ न होने देना और उनका सटीक विश्लेषण अपराधियों को सजा दिलाने की पहली सीढ़ी है।

महोदय ने जवानों का उत्साहवर्धन करते हुए कहा, “मुझे पूर्ण विश्वास है कि आज दी गई यह तकनीकी जानकारी फील्ड ड्यूटी और आपराधिक मामलों की जांच के दौरान आप सभी के लिए अत्यंत सहायक सिद्ध होगी।”

भारतीय न्याय संहिता और फॉरेंसिक का समन्वय

वाहिनी चिकित्साधिकारी डॉ. विनय कुमार मिश्रा ने भी अपने व्याख्यान में फॉरेंसिक विज्ञान की महत्ता पर विशेष चर्चा की। उन्होंने कहा कि वर्तमान में भारतीय न्याय संहिता के तहत अपराधों की जांच में इस विज्ञान की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो गई है। यह न केवल कानून व्यवस्था को सुदृढ़ करता है, बल्कि सटीक सबूतों के आधार पर निर्दोषों को न्याय दिलाने और वास्तविक अपराधियों को दंडित करने में निर्णायक भूमिका निभाता है।

इनकी रही उपस्थिति

इस ज्ञानवर्धक सेमिनार में मुख्य रूप से निम्नलिखित अधिकारी व कर्मचारी उपस्थित रहे:

श्री कैलाश नाथ यादव (शिविरपाल)

श्री सुरेंद्र कुमार (सूबेदार मेजर)

श्री गौरव त्रिपाठी (RTC प्रभारी)

श्री संजय सिंह (प्रभारी C/R)

सेमिनार में वाहिनी के समस्त अधिकारी, कर्मचारीगण तथा आधारभूत प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे सभी रिक्रूटों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और आधुनिक फॉरेंसिक तकनीकों की बारीकियों को समझा।

प्रसारित:मीडिया सेल 36वीं वाहिनी  पीएसी, रामनगर, वाराणसी

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