रिपोर्ट – पवन आजाद
वाराणसी। मुख्य संवाददाता स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने प्रयागराज में अपने विरुद्ध दर्ज पॉक्सो (POCSO) मुकदमे की निष्पक्षता पर गंभीर प्रश्न खड़े किए हैं। वाराणसी में मीडिया से बात करते हुए शंकराचार्य ने प्रयागराज के जॉइंट पुलिस कमिश्नर (JCP) और मामले के वादी आशुतोष ब्रह्मचारी की एक कथित तस्वीर जारी की, जिसमें दोनों को एक साथ उत्सव मनाते देखा जा सकता है।
“गठजोड़ से कैसे होगी निष्पक्ष जांच?”
शंकराचार्य ने आरोप लगाया कि जांच अधिकारी और शिकायतकर्ता के बीच पहले से ही घनिष्ठ संबंध हैं। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा:
“जब पुलिस के उच्चाधिकारी और शिकायतकर्ता एक साथ केक काट रहे हों, तो ऐसी स्थिति में न्यायपूर्ण विवेचना की उम्मीद कैसे की जा सकती है? यह पूरा प्रकरण एक सोची-समझी साजिश का हिस्सा है।”
उन्होंने दावा किया कि प्रयागराज में स्नान से रोके जाने के बाद अचानक यह मामला सामने आया, जबकि 18 तारीख से पहले ऐसी किसी घटना का जिक्र तक नहीं था।
गिरफ्तारी की चर्चा और कानूनी प्रक्रिया
देर रात तक गिरफ्तारी की उड़ती अफवाहों पर विराम लगाते हुए शंकराचार्य ने कहा कि वे कानूनी प्रक्रिया का सामना करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। उन्होंने ‘मीठी गिरफ्तारी’ के दावों को महज माहौल बनाने की कोशिश करार दिया। उन्होंने पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए:
मेडिकल जांच: यदि मामला नाबालिगों से जुड़ा था, तो तत्काल मेडिकल परीक्षण क्यों नहीं कराया गया?
देरी से एफआईआर: शुरुआत में पुलिस ने केस दर्ज क्यों नहीं किया और कोर्ट के आदेश का इंतजार क्यों किया गया?
सियासी उबाल: कांग्रेस उतरी समर्थन में
मामले ने अब राजनीतिक तूल भी पकड़ लिया है। उत्तर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय ने वाराणसी पहुंचकर शंकराचार्य से मुलाकात की।
देशव्यापी विरोध: अजय राय ने घोषणा की कि कांग्रेस कार्यकर्ता प्रदेश के सभी 75 जिलों में इस कार्रवाई का विरोध करेंगे।
पीएम को पत्र: उन्होंने मामले की निष्पक्ष जांच हेतु प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखने की बात भी कही है।
पुलिस का पक्ष: साक्ष्यों के आधार पर होगी कार्रवाई
दूसरी ओर, प्रयागराज पुलिस ने स्पष्ट किया है कि मामला स्पेशल कोर्ट पॉक्सो के आदेश पर झूंसी थाने में दर्ज किया गया है। पुलिस की आगामी रणनीति इस प्रकार है:
वादी (शिकायतकर्ता) का ऑन-रिकॉर्ड बयान दर्ज करना।
कथित पीड़ित नाबालिगों के बयान कैमरे के सामने दर्ज कराना।
साक्ष्यों के संकलन के बाद ही आरोपियों से पूछताछ या अन्य विधिक कार्रवाई करना।
पुलिस सूत्रों के अनुसार, केस हाईप्रोफाइल होने के कारण हर कदम फूंक-फूंक कर रखा जा रहा है और पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी सुनिश्चित की जा रही है। फिलहाल, इस धार्मिक और कानूनी विवाद पर पूरे प्रदेश की निगाहें टिकी हुई हैं।
